हर शाख पे उल्‍लू बैठा है अंजाम ए गुलिस्‍ता क्‍या होगा? किस्‍मत बदलने के लिए दूसरे देश का रुख करने वालों पर सटीक बैठती हैं ये लाइनें

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अच्‍छे जीवन की तलाश में हर साल लोग दूसरे देश का रुख करते हैं।

हर साल अफ्रीकी देशों से हजारों लोग अपने बेहतर जीवन के लिए दूसरे देशों का सफर शुरू करते हैं। ये सफर कई तरह जोखिम से भरा होता है। इन लोगों पर मानव तस्‍करों की कड़ी निगाह भी लगी होती है।

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। बर्बाद गुलिस्ता करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था, हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ता क्या होगा। शौक बहराइची का ये शेर बहुत लोगों ने सुना होगा। लेकिन ये उनकी लिखी गई ये पक्तियां उन लोगों पर काफी सटीक बैठती हैं जो बेहतर किस्‍मत या खुशनुमा जिंदगी की तलाश में एक ऐसे सफर पर निकलते हैं जिसके बारे में उन्‍हें ये भी पता नहीं होता है कि वो वहां तक पहुंच भी पाएंगे या नहीं। ऐसे लोगों के लिए हर दूसरा शख्‍स संदिग्‍ध होता है। इसकी वजह है कि इन लोगों पर मानव तस्‍करों की हमेशा ही नजरें लगी रहती हैं। पूरी दुनिया में मानव तस्‍करी का दंष झेल चुके हजारों की तादाद में लोग हैं।

हाल ही में संयुक्‍त राष्‍ट्र की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में उन लोगों का जिक्र किया है जो लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में दूसरे देशों का रुख करते हैं। ऐसे लोगों के लिए इसकी वजह अपने देश का राजनीतिक संकट, वहां पर छिड़ा गृह युद्ध, रोजगार की कमी, भूखमरी और गरीबी होती है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन और माइग्रेशन (आईओएम) की रिपोर्ट की बताती है कि हर साल अफ्रीकी देशों से हजारों लोग अपनी किस्‍मत आजमाने के अनजान सफर पर निकलते हैं। इनकी ये यात्रा खतरों से भरी होती है।

आईओएम के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 में करीब एक लाख 38 हजार लोग ऐसे ही खतरनाक सफर पर निकले थे। वर्ष 2020 में वैश्विक महामारी कोरोना के बावजूद करीब 37,500 लोगों ने इस तरह का सफर किया। मौजूदा वर्ष की शुरुआत में जनवरी के माह में करीब ढाई हजार लोगों ने इस तरह की ही यात्रा की है। संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है इनका मकसद खाड़ी देशों में पहुंचना होता है जिससे इन्‍हें काम मिल सके। इसके अलावा कुछ इथियोपिया और जिबूती भी पहुंचते हैं। यमन की तरफ भी कुछ लोग अपना रुख करते हैं। हालांकि यहां पर काफी लंबे समय से गृह युद्ध चल रहा है।

आईओएम ने कहा है कि अभी जबकि कई देशों में कोरोना को लेकर यात्रा पर नियम काफी सख्‍त हैं तो इतने लोग यात्रा कर रहे हैं। यदि ये नियम हट गए तो अधिक संख्‍या में लोग इस तरह की यात्राएं करेंगे और समस्‍या गंभीर हो जाएगी। आपको बता दें कि आईओएम ही नहीं बल्कि संयुक्‍त राष्‍ट्र की दूसरी एजेंसियां समय-समय पर मानव तस्‍करी को लेकर अपनी रिपोर्ट देती रही हैं। दो दिन पहले ही एक दुखद घटना पर यूएन और आईओएम ने अफसोस भी जताया है। दरअसल, कुछ दिन पहले जिबूती से यमन के लिए नाव पर 200 लोग सवार हुए थे, जिनमें कुछ बच्‍चे भी शामिल थे। लेकिन मानव तस्‍करों ने इस नाव पर सवार 80 लोगों को बीच रास्‍ते में ही गहरे समुद्र में फेंक दिया जिसकी वजह से 20 लोगों की मौत हो गई। आईओएम के मुताबिक पिछले छह माह में इस तरह की ये तीसरी घटना है।

जिबूती में आईओएम की प्रमुख स्टैफनी डेवियॉट के मुताबिक ये घटना इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि आपराधिक तत्‍व और मानव तस्‍करी में लिप्‍त गिरोह अपने निजी हितों को पाने के लिए ऐसे लोगों का शोषण कर रहे हैं। इन लोगों के निशाने पर वो लोग हैं जो अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये खतरा मोल ले रहे हैं। उन्‍होंने पूरी दुनिया से अपील की है कि ऐसे लोगों और गिरोह के खिलाफ एकजुट होकर सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्‍होंने इस बात की भी अपील की है कि ऐसे लोगों के लिए कुछ ऐसा विकल्‍प तलाशा जाए जिससे ये लोग बिना अपने जीवन को खतरे में डाले जिंदगी को संवार सकें। आईओएम के मुताबिक यमन में हजारों की संख्‍या में प्रवासी फंसे हुए हैं। वहीं कई अन्‍य देशों में वो मानव तस्‍करों के हाथों उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।

संयुक्‍त राष्‍ट्र की जनवरी 2021 में आई एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 में दूसरे देशों में किस्‍मत आजमाने की चाहत रखने वाले 1283 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वहीं 2018 में 2299 लोगों की मौत हुई थी। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014 से मार्च 2020 तक भूमध्‍य सागर के रास्‍ते अपने नए जीवन की शुरुआत करने वाले करीब 19164 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। रिपोर्ट ये भी बताती है कि इस खतरनाक सफर पर जाने वालों को इस बात का अंदाजा नहीं होता है कि वो मानव तस्‍करी का शिकार भी बन सकते हैं। इसका पता उन्‍हें तब चलता है जब वो खुद को कैद किया हुआ महसूस करते हैं।