कहां है निर्भया का एकमात्र जिंदा दोषी, मिला नया नाम फिर भी है गुमनाम
सजा खत्म होने के बाद अधिकारियों ने नाबालिग को नया नाम दिया और उसकी पहचान पूरी तरह बदल दी।

 निर्भया का छठा आरोपित जिंदा है और नई पहचान के साथ जिंदगी जी रहा है। बताया जा रहा है कि दिल्ली के बाल सुधार गृह में सजा के दौरान इस नाबालिग दोषी ने कुक का काम सीखा था। वह फिलहाल यही काम कर रहा है।

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क।  ठीक एक साल पहले 20 मार्च, 2020 को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर निर्भया के चारों दोषियों (मुकेश कुमार सिंह, अक्षय सिंह ठाकुर, विनय कुमार शर्मा और पवन कुमार गुप्ता) को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया था। 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में निर्भया के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म और हत्या में शामिल कुल छह आरोपियों में से चार को फांसी मिली। इनमें से एक राम सिंह की मार्च, 2013 में तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। जांच में पता चला था कि उसने फांसी लगाई थी। वहीं, छठा आरोपित जिंदा है और नाम-पहचान बदलकर देश के किसी कोने में गुमनाम भरी जिंदगी जी रहा है। हैरानी की बात यह है कि वह अपने गांव गया तो उसने घुसने नहीं दिया, मां-बाप ने भी उससे किनारा कर लिया है। कुल मिलाकर उसने नया नाम मिला और पहचान भी नई मिली, लेकिन जिंदगी भर वह गुमनाम ही रहेगा।

दक्षिण भारत में कुक है छठा दोषी

बताया जा रहा है कि दिल्ली के बाल सुधार गृह में सजा के दौरान इस नाबालिग दोषी ने कुक का काम सीखा था। वहीं, अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक फिलहाल नाबालिग दोषी दक्षिण भारत के किसी राज्य में यही काम कर रहा है और अपना गुजर-बसर कर रहा है। सजा खत्म होने के बाद अधिकारियों ने इस नाबालिग को नया नाम दिया है और उसकी पहचान पूरी तरह बदल दी है, जिससे उसे जिंदगी में इस वजह से कोई परेशानी नहीं पेश आए। जुवैनाइल में सजा काटने के दौरान हुनरमंद बनाने वाले गैरसरकारी संगठन के मुताबिक, दिल्ली से वह दक्षिण भारत चला गया और वहां पर नाम बदलकर रह रहा है और वहां पर कुक का काम करता है। खाना बनाने का काम इस नाबालिग दोषी ने दिल्ली में रहने के दौरान सीखा था।

कागजों में निकला था नाबालिग, इसलिए बच गया फांसी से

16 दिसंबर, 2012 की रात को निर्भया के साथ ड्राइवर राम सिंह के साथ मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, पवन कुमार, विनय शर्मा और एक नाबालिग ने चलती बस में निर्भया के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया था। दिल्ली पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में बंद कर दिया। मुकदमा चलने के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा जांच में सामने आया कि छठा आरोपित नाबालिग है। इसके बाद किशोर न्यायालय द्वारा सजा सुनाने के बाद यह नाबालिग तीन साल तक बाल सुधार गृह में रहा। दरअसल, अपराध के बाद दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जांच पड़ताल की तो पता चला कि स्कूल में दाखिले के आधार पर वह नाबालिग है। कागजात के आधार पर अपराध के समय यानी 16 दिसंबर, 2012 को उसकी उम्र 17 साल थी। इसके लिए दिल्ली पुलिस जांच के लिए दोषी के पैतृक गांव भी पहुंची थी, जिसके बाद सारी बात सामने आई। फिर सजा के तौर पर उसे तीन साल तक बाल सुधार गृह में भी रहना पड़ा और फिर वह बरी हो गया और फिलहाल दक्षिण भारत के किसी राज्य में कुक का काम करता है।

8 साल बाद भी अपने गांव नहीं जा सका है नाबालिग

बता दें कि महज 11 साल की उम्र में बेहतर जिंदगी की तलाश में वह दिल्ली चला आया था, लेकिन बाल सुधार गृह से अपनी सजा पूरी करने के बाद जब यह दोषी छूट को गांव वालों ने एलान कर दिया, वे इस गांव में ही नहीं घुसने देंगे। हुआ भी ऐसा ही यह दोषी अपने पैतृक घर भी नहीं जा सका। वहीं, मां-बाप भी निर्भया के दोषी इस बेटे को भुला चुके हैं।  कहा जाता है कि बस ड्राइवर रामसिंह के पास नाबालिग के 8000 रुपये बकाया थे। 16 दिसंबर, 2012 को भी वह अपने पैसे लेने ही गया था। रात में बस में मौजूद रहने के दौरान वह भी पांचों के साथ इस अपराध में शामिल हो गया। 

उत्तर प्रदेश के किसी गांव के रहने वाले इस दोषी के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह 1995 में ही भागकर दिल्ली आ गया था और यहां पर वह बस अड्डों पर खड़ी बसों में सफाई कर अपना पेट भरने लगा था। बताया जाता है कि उस दौरान उसके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वह दिल्ली जाए। बावजूद इसके वह जिद करके दिल्ली आया और कुछ साल बाद ही निर्भया दरिंदगी में दोषी बन गया।