अमेरिकी रक्षा मंत्री के भारत दौरे से विशेषज्ञ आशान्वित, दशकों बाद भारत के साथ रक्षा साझेदारी नई ऊंचाई छुएगा

 

अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन 19 से 21 मार्च तक भारत की यात्रा पर

यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के वरिष्ठ सलाहकार विक्रम सिंह कहते हैं कि जो बाइडन प्रशासन ने सीधे तौर पर ये संकेत दे दिया है कि वह भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर मजबूत साझेदारी करेगा।

नई दिल्‍ली/ वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की भारत यात्रा को लेकर अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञ बहुत आशान्वित हैं। विशेषज्ञों की राय है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों की दशकों बाद बेहतरीन शुरुआत हो रही है। मौजूदा समय में चीन का आक्रामक रवैया और आर्थिक नीतियों में जोर-जबरदस्ती चल रही है। ऐसी स्थिति में क्‍वॉड सम्मेलन के बाद रक्षा मंत्री ऑस्टिन की यात्रा जो बाइडन प्रशासन का भारत को महत्वपूर्ण श्रेणी में रखने का संकेत है। 

भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर मजबूत साझेदारी

अमेरिकी रक्षा मंत्री 19 से 21 मार्च तक भारत की यात्रा पर हैं। यहां वह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर से वार्ता करेंगे। उनकी बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी होगी। यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के वरिष्ठ सलाहकार विक्रम सिंह कहते हैं कि जो बाइडन प्रशासन ने सीधे तौर पर ये संकेत दे दिया है कि वह भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर मजबूत साझेदारी करेगा। इधर अमेरिकी संसद में यात्रा से पहले कुछ सांसदों ने कहा कि वे रूस से खरीदे जा रहे एस-400 मिसाइल सिस्टम के बारे में जरूर वार्ता करें।

2016 से भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा 

उल्लेखनीय है कि भारत ने रूस से 2018 में अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल सिस्टम के लिए 5 बिलियन डॉलर (करीब तीन लाख 62 हजार रूपये) का रक्षा समझौता किया है। यह जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं। ज्ञात हो कि अमेरिका ने 2016 से भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया हुआ है। पिछले सप्ताह ही पेंटागन ने भारत के बारे में जो बाइडन की नीतियों को स्पष्ट किया था। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ रक्षा साझेदारी के तहत हथियारों और तकनीक को देने के साथ ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में भी मदद करना चाहता है। जिससे भारत इस क्षेत्र का बड़ा रक्षा उत्पादक बन सके।

सांसद बोले, वैक्सीन पर डब्ल्यूटीओ में भारत का समर्थन करें 

वाशिंगटन, प्रेट्र : भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से वैक्सीन को पेटेंट नियम से निश्चित समय तक बाहर रखने की अपील की है। इसके लिए भारत ने बाकायदा मुहिम चला रखी है, जिसमें तमाम देश भारत के साथ हैं। अब अमेरिकी सांसदों ने भी जो बाइडन को सलाह दी है कि वे इस मांग पर भारत का समर्थन करें। भारत की इस पहल से गरीब देशों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने की राह और आसान होगी।

उल्लेखनीय कि भारत के इस कदम का ट्रंप प्रशासन ने विरोध किया था। जो बाइडन से भारत का समर्थन करने वाले प्रमुख सांसदों में रोसा डी लौरा, एडरियानो एस्पैलट, जैन शाकोव्सकी, लॉयड डोगेट, एंडी लेविन हैं। ऐसे साठ सांसदों ने भारत के समर्थन में जो बाइडन को पत्र लिखा है।

ग्रीन कार्ड के लिए भारतवंशी हेल्थ वर्कर का संसद पर प्रदर्शन 

वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी हेल्थकेयर वर्कर ने ग्रीन कार्ड की लंबी सूची को समाप्त करने के लिए संसद के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वाले भारतवंशियों ने ग्रीन कार्ड में देशों का कोटा निर्धारण और विशेष कोटे को भी समाप्त करने की सांसदों और राष्ट्रपति जो बाइडन से मांग की। ग्रीन कार्ड अमेरिका में आप्रवासियों को स्थाई रूप से रहने का अधिकार देता है।

प्रदर्शन करने वाले डा. राज कर्नाटक और डा. प्रनव सिंह ने बताया कि हम फ्रंटलाइन वर्कर हैं। हम पूरे देश से यहां इकट्ठा होकर न्याय मांगने के लिए आए हैं। हम अधिकांश लोग भारतवंशी हैं। हमने अमेरिका में ही पढ़ाई की है और यहीं काम करने की शपथ ली है। हमें ग्रीन कार्ड के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि प्रतीक्षा सूची बड़ी हो गई है।