उच्च-स्तरीय बैठक में भिड़े अमेरिका और चीन, घंटों चली तीखी नोकझोंक

अमेरिका बोला, बीजिंग की हरकतों से कानून आधारित व्यवस्था के लिए पैदा हुआ खतरा
अमेरिका और चीन के बीच यह दो दिवसीय वार्ता अलास्का के एंकरेज शहर में गुरुवार को शुरू हुई। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवान अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं।

वाशिंगटन, एजेंसियां। बाइडन प्रशासन में अमेरिका और चीन के बीच गुरुवार को हुई पहली उच्च स्तरीय बैठक में तीखी नोकझोंक हुई। कैमरे के सामने दोनों देशों के बीच एक घंटे से ज्यादा समय तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में सार्वजनिक तौर पर इस तरह की तकरार आम तौर पर देखने को नहीं मिलती है। अमेरिकी विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने शीर्ष चीनी राजनयिकों से सख्त शब्दों में कहा कि बीजिंग की हरकतों के चलते कानून आधारित व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो गया है। जबकि इस पर पलटवार करते हुए चीनी पक्ष ने कहा कि वाशिंगटन सैन्य ताकत और आर्थिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

अमेरिका और चीन के बीच यह दो दिवसीय वार्ता अलास्का के एंकरेज शहर में गुरुवार को शुरू हुई। इसमें विदेश मंत्री ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवान अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के निदेशक यांग जेइची और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं। ब्लिंकन ने कैमरे के सामने अपने चीनी समकक्षों से कहा, 'हम शिनजियांग, हांगकांग व ताइवान के साथ ही अमेरिका पर साइबर हमलों और हमारे सहयोगियों पर बनाए गए आर्थिक दबाव समेत चीनी हरकतों पर अपनी गहरी चिंताओं पर चर्चा करेंगे। इस तरह की प्रत्येक हरकत से कानून आधारित उस व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक स्थिरता कायम रहती है।'

उन्होंने बताया कि बाइडन प्रशासन चीन के बर्ताव में बदलाव की उम्मीद कर रहा है। साथ ही यह भी उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन में खराब हुए संबंध दोबारा पटरी पर आ जाएंगे। इसके जवाब में चीनी राजनयिक यांग जेइची ने आरोप लगाया, 'अमेरिका अपनी सैन्य ताकत और आर्थिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर दूसरे देशों पर दबाव बनाता है और उन्हें दबाने की कोशिश करता है।' उन्होंने करीब 15 मिनट के अपने संबोधन के दौरान यह भी दावा किया, 'अमेरिका सामान्य व्यापारिक आदान-प्रदान में बाधा डालने और चीन पर हमला करने के लिए कुछ देशों को उकसाने का काम करता है।' यांग ने कहा कि उनका देश आंतरिक मामलों में अमेरिकी दखल का विरोध करता है।

मानवाधिकार पर भी हुई बहस

यांग ने अमेरिका को उलटे मानवाधिकार का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि वाशिंगटन को पहले अपने यहां मानवाधिकारों को बेहतर करना चाहिए। चीन में इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। इस पर पलटवार करते हुए अमेरिकी एनएसए सुलिवान ने कहा, 'हम चीन के साथ टकराव नहीं चाहते हैं। हम अपने सिद्धांतों, अपने लोगों और अपने दोस्तों के साथ हमेशा खड़े हैं।'

ट्रंप ने अपना रखा था सख्त रुख

ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका और चीन के संबंध बेहद खराब रहे। इस प्रशासन ने कोरोना महामारी, मानवाधिकार उल्लंघनों और दक्षिण चीन सागर को लेकर बीजिंग के खिलाफ सख्त रवैया अपना रखा था। हांगकांग में नए सुरक्षा कानून और शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार और जासूसी को लेकर ट्रंप प्रशासन ने चीन की कई कंपनियों और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।