दुष्कर्मी को पीड़िता से शादी करने की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट के समर्थन में आई बार काउंसिल


दुष्कर्मी को पीड़िता से शादी करने की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट के समर्थन में आई बार काउंसिल

बार काउंसिल ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे को लिखे पत्र को न्यायपालिका पर दुर्भावनापूर्ण हमला करार देते हुए कहा कि बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी को उस स्तर तक नहीं खींचा जाना चाहिए कि यह संस्थान की छवि को धूमिल और कमजोर करे।

नई दिल्ली, प्रेट्र। दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर उसके प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे शीर्ष अदालत को बदनाम न करें और उसकी कार्यवाहियों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए न करें। उल्लेखनीय है कि कुछ लोगों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर दुष्कर्म के मामले में की गई टिप्पणी को वापस लेने का अनुरोध किया था।

बार काउंसिल ने एक बैठक के दौरान पारित प्रस्ताव में माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात द्वारा चीफ जस्टिस एसए बोबडे को लिखे पत्र को न्यायपालिका पर दुर्भावनापूर्ण हमला करार देते हुए कहा कि बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी को उस स्तर तक नहीं खींचा जाना चाहिए कि यह संस्थान की छवि को धूमिल और कमजोर करे।

उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने बुधवार को कहा था कि चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ द्वारा दुष्कर्म के आरोपी से किया गया यह सवाल कि क्या वह पीडि़ता से विवाह करेगा, न्यायिक रिकॉर्ड पर आधारित था। यह उस व्यक्ति के हलफनामे में शामिल था कि वह नाबालिग लड़की (रिश्तेदार) के 18 साल के हो जाने पर उससे विवाह करेगा।