यह सियासत नहीं जम्मू कश्मीर के सशक्तिकरण का बजट है, जानिए इसमें किस वर्ग को क्या मिलेगा

 

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश का वित्त वर्ष 202़1-22 के लिए बजट संसद में पेश हो चुका है।

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश का वित्त वर्ष 202़1-22 के लिए बजट संसद में पेश हो चुका है। लगातार दूसरे वर्ष बजट एक लाख करोड़ के पार गया है। कई लोगों के लिए यह आंकड़ों का खेल होगा लेकिन विभिन्न क्षेत्रों के आबंटन राशि और योजनाओं का जो उल्लेख है

जम्मू। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश का वित्त वर्ष 202़1-22 के लिए बजट संसद में पेश हो चुका है। लगातार दूसरे वर्ष बजट एक लाख करोड़ के पार गया है। कई लोगों के लिए यह आंकड़ों का खेल होगा, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों के आबंटन राशि और योजनाओं का जो उल्लेख है, वे इन आंकड़ों के पीछे की कहानी बता देते हैं।

ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि, स्वास्थ्य, जल शक्ति और उद्योगों के साथ जिस तरह से युवा व स्थानीय निकायों की आत्मनिर्भरता पर इसमें जोर दिया गया है, उससे साफ हो जाता है कि यह बजट केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के सशक्तिकरण का प्रबंधन है। बजट को पूरी तरह से सुशासन, जन कल्याण, बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन पर केंद्रित रखते हुए कृषि, बागवानी और आत्मनिर्भर भारत को भी ध्यान में रखा गया है।

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश में विधानसभा की अनुपस्थिति के कारण लगातार दूसरे साल प्रदेश का बजट संसद में पेश किया गया है। वर्ष 2020-21 का बजट 101428 कराेड़ का था और बुधवार को लोसभा में पेश बजट 108621 लाख करोड़ का है।

पंचायत राज और स्थानीय नगर निकायों के लिए कुल मिलाकर 1600 करोड़ का प्रावधान

जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र के मूल आधार कहे जाने वाले पंचायत राज और स्थानीय नगर निकायों के लिए कुल मिलाकर 1600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। युवाओं के समग्र विकास के लिए शुरू किए गए युवा मिशन के लिए बजट में 200 करोड़ का आबंटन करने के अलावा सरकारी विभागों में विभिन्न वर्गाें के करीब 23 हजार पदों को अगले एक साल में भरने की प्रकि्रया पूरी करने का यकीन दिलया गया है।

बजट दस्तावेज का आंकलन किया जाए तो यह कहा जा सकता है कि कई घोषणाएं पहले हो चुकी हैं और यही बात इसमें सबसे अहम है। अतीत में जम्मू कश्मीर में जिन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बिना सोचे विचारे आम लोगों को लुभाने के लिए जिन योजनाओं का वादा किया गया था, उन्हें अब हकीकत में बदला जा रहा है। चाहे प्रदेश में दो कैंसर संस्थानों की बात हो या तीन फूड पार्क की या फिर नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना। जम्मू कश्मीर में निजी पूंजी निवेश के लिए जिस वैश्विक शिखर सम्मेलन को 2019 में आयोजित किया जाना था, उसे आगामी एक साल में अायोजित करने का यकीन इस बजट में दिलाते हुए बताया गया कि इसके लिए 50 करोड़ भी दिए जा चुके हैं।

प्रदेश का प्रशासकीय सेक्टर का राजस्व बजट 12460 करोड़

प्रदेश का प्रशासकीय सेक्टर का राजस्व बजट 12460 करोड़ है। इसका 71 प्रतिशत गृह विभाग पर खर्च होगा जबकि 21691 करोड़ के सामाजिक क्षेत्र बजट का 51 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। बुनियादी ढांचा क्षेत्र का राजस्व बजट 29059 करोड़ है और इसका 60 प्रतिशत वित्त विभाग द्वारा ही खर्च किया जाएगा। आर्थिक क्षेत्र का राजस्व बजट 5464 करोड़ है और इसका 28 प्रतिशत वन विभाग द्वारा खर्च किया जाएगा। जम्मू कश्मीर पूंजी प्राप्तियां 11480 करोड़ और पूंजी व्यय 39817 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया है। बजट क 37 प्रतिशत विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 97141 करोड़ और राजस्व व्यय 68804 करोड़ रूपये रहने का अनुमान है। इससे पूंजीगत व्यय के लिए 28337 कराेड़ रुपये अतिरिक्त रहने का अनुमान है।

जम्मू कश्मीर को मेडिकल-एजूकेशनल हब बनाने की एक झलक इस बजट में साफ नजर आती है

जम्मू कश्मीर को मेडिकल और एजूकेशनल हब बनाने की एक झलक इस बजट में साफ नजर आती है। एक व्यापार कंद्र भी बनाया जा रहा है। प्रदेश में दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए श्वेत क्रांति का आगाज करने के इरादे से दुग्ध गांव तैयार करने की योजना भी है। फिल्म निर्माण और संबंधित गतविधियों के लिए भी बजटीय प्रावधान किया गया है। वित्तीय विभाग में तीसरे पक्ष की निगरानी और जांच की व्यवस्था सुनिश्चित बनाने का फैसला किया गया है जो आर्थिक सुधारों और प्रबंधन की दिशा में जम्मू कश्मीर के आगे बढ़ने का संकेत है। ऑनलाइन वेतन, डीबीटी जैसी व्यवस्था पहले ही लागू हो चुकी हैं। कश्मीर पंडितों के पुनर्वास के नाम पर कोई बड़ा हो-हल्ला बजट में नजर नहीं आता, बल्कि उनकी सुविधाओं और उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे कार्याें का नपे तुले शब्दों में जिक्र है। मतलब साफ है कि केंद्र ने इस मुद्दे पर सियासत करने वालों को शांत रहने का संकेत कर दिया है।

जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ प्रो हरि ओम ने कहा कि मैं आर्थिक मामलों का ज्यादा जानकार नहीं हूं, लेकिन जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था का गणित अच्छी तरह जानता हूं। अगर आप बीते एक दो दशक के दौरान जम्मू कश्मीर राज्य में पेश किए गए बजट दस्तावेजों का, बुधवार को लोकसभा में वित्तमंत्री द्वारा पेश किए गए बजट दस्तावेज के साथ आंकलन करेंगे तो आप जान जाएंगे कि क्या हुआ है और अब आगे क्या होने जा रहा है। अब अनावश्यक खर्चां पर लगाम लगायी जा रही है और जनहित की योजनाओं पर पैसा लगाया जा रहा है और वह भी पूरे हिसाब के साथ। अब सड़क, गली, अस्पताल या स्कूल का एलान किसी को खुश करने के लिए नहीं हो रहा है। मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाया जा रहा है। किसी भी वर्ग का तुष्टिकरण इसमें नहीं है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद केंद्र शासित जम्मू कश्मीर अलगाववादियों के तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति बंद हो रही है। यह एक तरह से जम्मू कश्मीर के लोगों के सशक्तिकरण का बजट है।

बजट में किस-किस वर्ग के लिए है क्या-क्या खास :

  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीर्थ पर्यटन को विकसित करेन के अलावा नए राेपवे भी बनाए जाएंगे।
  • हिमायत योजना के तहत अगले एक साल के दौरान 209112 युवाओं को रोजगार योग्य बनाया जाएगा।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 24866 स्वयं सहायता समूहों काे रिवाल्विंग फंड व 46799 को सामुदायिक निवेश निधि के तहत मदद का प्रावधान किया गया है।
  • स्वास्थ्य सेवा ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश करते हुए नशा उन्मूलन केंद्र भी बनेंगे।
  • सीमावर्ती इलाकों बंकर निर्माण के लिए 50 करोड़।
  • पुलिस काॅलाेनी के लिए 50 करोड़ दिए जा रहे हैं।
  • क्षेत्रवार आबंटन के आधार पर देखा जाए तो शिक्षा के लिए 1837 करोड़।
  • पर्यटन के लिए 786 करोड़।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए 214 करोड़।
  • युवा सशक्तिकरण, राेजगार व उद्यमशीलता के लिए 511 करोड़।
  • भेड़ एवं पशु पालन के लिए 338 करोड़।
  • कृषि एवं बागवानी के लिए 2008 करोड़।
  • बिजली ढांचे के लिए 2728 करोड़।
  • सामाजिक सुरक्षा के लिए 174 करोड़।
  • औद्योगिक क्षेत्र के लिए 648 कराेड़। 
  • ग्रामीण विकास के लिए 4817 करोड़।
  • जलशक्ति विभाग को 6346 करोड़ रूपये का आबंटन किया गया है।