अजनबी से भी रिश्ता कायम करने में माहिर हैं RSS के सरकार्यवाह चुने गए दत्तात्रेय होसबले

 

दत्तात्रेय होसबले तीन साल के कार्यकाल के लिए संघ के सरकार्यवाह होंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह चुने गए दत्तात्रेय होसबले मातृभाषा कन्नड़ के अलावा अंग्रेजी हिंदी संस्कृत तमिल मराठी आदि अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के मर्मज्ञ विद्वान हैं। वह लोकप्रिय कन्नड़-मासिक ‘असीमा’ के संस्थापक-संपादक भी हैं।

नई दिल्ली। भैय्या जी जोशी की जगह पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह चुने गए दत्तात्रेय होसबले संघ में दत्ता जी के नाम से मशहूर हैं। वह कर्नाटक के शिवमाेंगा जिले के सोरबा तालुक के एक छोटे से गांव होसबले से हैं। उनका जन्म एक दिसंबर, 1954 को हुआ। उनके नाम में गांव का नाम भी जुड़ा हुआ है। संघ से संपर्क में आने के बाद महज 13 वर्ष की आयु में ही संघ से फिर 1972 में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ गए। वह 1978 में विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। इस बीच कॉलेज की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वे बेंगलुरु चले गए और प्रसिद्ध नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने बैंगलोर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है। दत्तात्रेय होसबले की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सबसे मुलाकात के लिए सुलभ रहते हैं और उनसे कोई भी सहज होकर अपनी बात रख सकता है। 

शिक्षकों के प्रिय थे होसबले

दत्तात्रेय होसबले शिक्षा और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय थे। उनके कर्नाटक के लगभग सभी लेखकों और पत्रकारों से करीबी संबंध रहे हैं। उनमें वाइएन कृष्णमूर्ति और गोपाल कृष्ण अडिगा का नाम प्रमुखता से आता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के खिलाफ लोकतंत्र को बहाल करने की लड़ाई में वर्ष 1975-77 के जेपी आंदोलन में काफी सक्रिय थे और इस कारण लगभग पौने दो वर्ष उन्होंने ‘मीसा’ के तहत जेल में भी गुजारे। उनके करीबियों की मानें तो दत्तात्रेय होसबले छात्र जीवन में शिक्षकों के काफी प्रिय थे। 

पूर्वोत्तर भारत में ABVP के विस्तार का श्रेय दत्तात्रेय होसबले को

दत्तात्रेय होसबले 15 साल तक विद्यार्थी परिषद के संगठन महामंत्री रहे। उन्होंने गुवाहाटी में युवा विकास केंद्र के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर भारत में विद्यार्थी परिषद के कार्य-विस्तार का पूरा श्रेय उन्हें जाता है।

दत्तात्रेय होसबले बने RSS के सरकार्यवाह, प्रतिनिधि सभा की बैठक में हुआ चुनाव

अमेरिका समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं

मिली जानकारी के मुताबिक, दत्तात्रेय होसबले ने नेपाल, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका की यात्राएं की हैं। संपूर्ण भारतवर्ष की कई बार यात्रा की। कुछ साल पहले नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद संघ द्वारा भेजी गई राहत-सामग्री और राहतदल के प्रमुख के नाते वह काफी दिनों में नेपाल में भी रहे थे। वहां कई दिनों तक सेवा-कार्य किया था। वर्ष 2004 में ये संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बनाए गए। इसके बाद वर्ष 2008 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह चुने गए थे। होसबले संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के संरक्षक भी थे। तो अब कर्नाटक में चल रहे अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में जोशी की जगह सरकार्यवाह का दायित्व दिया गया है।

वह मातृभाषा कन्नड़ के अलावा अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, तमिल, मराठी, आदि अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के मर्मज्ञ विद्वान हैं। वह लोकप्रिय कन्नड़-मासिक ‘असीमा’ के संस्थापक-संपादक भी हैं। उन्होंने भारतीय धर्मनिरपेक्षता के हिंदू विरोधी होने पर अपनी राय देते हुए कहा, 'जब भारत के विचार की बात आती है, तो कोई विवाद नहीं होता है, सवाल यह है कि विभिन्न प्रकार के विचार हो सकते हैं और प्रत्येक को उसके स्थान की अनुमति दी जानी चाहिए।' यह आवश्यक नहीं है कि वे एक-दूसरे के लिए विरोधाभासी हो। फुटबॉल के प्रशंसक दत्तात्रेय ने फुटबाल को वैश्विक एकता का प्रतीक करार दिया।

तीन साल तक रहेंगे संघ के सरकार्यवाह

वह तीन साल के कार्यकाल के लिए संघ के सरकार्यवाह होंगे। सरकार्यवाह के पद पर चुनाव तीन साल में एक बार होता है। उनके बारे में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार कहते हैं कि वह एकदम सहज है, अनौपचारिक संबंध बनाने में मास्टर हैं। लोग अपने मन की बात बेहिचक कह सकते हैं। उनसे मिलकर बहुत जल्द लगता है कि वह हमारे मित्र हैं।