संजय और अजय चंद्रा को फिर जाना होगा जेल, बेल पर SC ने जताई नाराजगी

 

पटियाला हाउस कोर्ट के चीफ मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने संजय और अजय चंद्रा को 13 जनवरी को जमानत दे दी थी।

रियल एस्टेट कंपनी यूनीटेक के पूर्व एमडी संजय और अजय चंद्रा करीब चार साल जेल में काट चुके हैं और उन्हें फिर जेल जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पटियाला हाउस अदालत द्वारा जमानत दिए जाने पर नाराजगी जताई है।

नई दिल्ली, संवाददाता। होम बायर्स से पैसे लेकर फ्लैट नहीं देने के कारण विवादों में घिरी रियल एस्टेट कंपनी यूनीटेक के पूर्व एमडी संजय और अजय चंद्रा करीब चार साल जेल में काट चुके हैं और उन्हें फिर जेल जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पटियाला हाउस अदालत द्वारा दोनों को जमानत दे दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे न्यायिक अनुशासन के खिलाफ बताते हुए संजय और अजय चंद्रा को जमानत दिए जाने के चीफ मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को सोमवार 22 मार्च तक तिहाड़ जेल में समर्पण करने का आदेश दिया है। साथ ही दोनों को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है। कोर्ट मामले पर सात अप्रैल को फिर सुनवाई करेगा।ये आदेश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने दिए। पटियाला हाउस कोर्ट के चीफ मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने संजय और अजय चंद्रा को 13 जनवरी को जमानत दे दी थी।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर चीफ मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, तब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने संजय और अजय को निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल करने की छूट दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट की कार्रवाई पर एतराज जताते हुए उन्हें चौंकाने वाला और न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन करने वाला करार दिया।

पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों को 750 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर 30 अक्टूबर, 2017 को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हुआ। पीठ ने कहा, 'चीफ मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश में लिखा है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत अर्जी देने की छूट दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत अर्जी निपटाने पर कोई रोक नहीं लगाई है। अभियुक्त लगभग चार साल जेल में रह चुके हैं। अब वे यूनीटेक के एमडी भी नहीं हैं। रिज्यूलूशन प्लान के मुताबिक कंपनी का पूरा प्रबंधन बदल गया है। अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 750 करोड़ रुपये रजिस्ट्री में जमा करा दिए हैं।'

सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने संजय और अजय चंद्रा को 750 करोड़ जमा कराने का आदेश दिया था, लेकिन जो रकम जमा कराई गई है वह कंपनी की संपत्तियों के मोनिटाइजेशन का नतीजा है जो जस्टिस धींगरा कमेटी का प्रयास है। पीठ ने कहा कि मामला गंभीर है, फोरेंसिक आडिट रिपोर्ट में मनीलांड्रिंग और पैसे को विदेश भेजने का पता चला है। यह पैसा होम बायर्स द्वारा दिया गया पैसा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्तों का दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका वापस लेकर मजिस्ट्रेट कोर्ट में नियमित जमानत की अर्जी दाखिल करने की छूट लेना और मजिस्ट्रेट से नियमित जमानत लेना, सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण और अनदेखी है।अभियुक्तों की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला अंतरिम जमानत खारिज होने के खिलाफ अपील का है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों को नियमित जमानत के लिए अर्जी देने से नहीं रोका था। पैसा जमा करने में भले ही देर हुई हो, लेकिन 750 करोड़ से ज्यादा रकम जमा करा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने रोहतगी की दोनों दलीलें खारिज कर दीं। पीठ ने कहा कि जमा कराई गई रकम अभियुक्तों द्वारा जमा कराई हुई नहीं मानी जा सकती। इसके अलावा अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट से बीमारी के आधार पर भी जमानत मांगी थी। पीठ ने कहा कि जब यूनीटेक लिमिटेड के बोर्ड आफ मैनेजमेंट से लेकर सारा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और कोर्ट उस पर विचार कर रहा है तो अभियुक्तों का मजिस्ट्रेट अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करना इस अदालत की प्रक्रिया की अनदेखी करना है।