कोरोना का कहर बढ़ने पर सोनिया गांधी को आई रायबरेली की याद, सांसद निधि से दिया 1.17 करोड़ रुपया


रायबरेली की सांसद तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी

 रायबरेली की सांसद तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोरोना वायरस के संक्रमण से कराह रही अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की याद आ ही गई।

रायबरेली। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के चरम पर आने के बाद कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली की याद आ गई। उन्होंने अपनी सांसद निधि से उपकरणों की खरीद के साथ अन्य जरूरी उपयोग के लिए एक करोड़ 17 लाख रुपए की धनराशि जारी की है। इसके साथ ही एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने भी निजी खर्च पर 500 बेडों का अस्थाई अस्पताल बनाने के लिए डीएम रायबरेली को पत्र लिखा है।

रायबरेली की सांसद तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोरोना वायरस के संक्रमण से कराह रही अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की याद आ ही गई। ऐसा तब हुआ जब दैनिक जागरण ने शुक्रवार के अंक में मैं रायबरेली...दर्द से तड़पती खबर प्रकाशित कर माननीयों को जगाने का काम किया। सांसद सोनिया गांधी ने प्रशासन को अपनी निधि के 1.17 रुपये खर्च करने की स्वीकृति का पत्र देरशाम जारी कर दिया। इसके साथ ही एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने अपने निजी खर्च पर 500 बेडों का अस्थाई अस्पताल बनवाने का प्रस्ताव डीएम को भेजा है।

रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा। इसमें उन्होंने लिखा है कि कोविड-19 जैसी महामारी पूरे देश में व्यापक स्तर पर फैली हुई है। इससे जनता को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सांसद निधि में एक करोड़ 17 लाख 77 हजार रुपये अभी भी हैं। प्रशासन जब और जैसे चाहे, इसे कोरोना के रोकथाम में जरूरी उपकरणों की खरीद व अन्य जरूरतों को पूरा करने में उपयोग कर ले ताकि, संसदीय क्षेत्र की जनता सुरक्षित रहे।

भाजपा एमएलसी भी जागे: सोनिया गांधी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़े भारतीय जनता पार्टी से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने जीआइसी ग्राउंड या अन्य किसी स्थान पर जर्मन हैंगर वाटरप्रूफ टेंट लगवाने का प्रस्ताव दिया है। कहा है कि 500 बेड के अलावा इसमें पंखा, कूलर सब रहेगा। ऑक्सीजन, जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सीय स्टॉफ की व्यवस्था प्रशासन कर ले। उन्होंने कहा है कि इसपर जो खर्च आएगा, उसे वे वहन करेंगे। बजट कम पड़ा तो दूसरों से सहयोग लिया जाएगा।

कई जनप्रतिनिधि अभी भी नींद में: रायबरेली में अभी भी कई जनप्रतिनि की नींद टूटनी है। जिले में अभी भी तमाम जनप्रतिनिधि अभी भी गहरी नींद में हैं। प्रदेश में जल रहे पंचायत चुनाव में जमीन-आसमान एक कर देने वाले ये जनप्रतिनिधि 15 अप्रैल के बाद से कहीं नजर नहीं आए। यही नही, न तो इन्हेंं अस्पतालों में अव्यवस्थाएं दिख रहीं हैं और न हीं आए महामारी से हो रही मौतें। इस कारण जनता में रोष है।