केस को कमजोर करने के लिए मजदूरों को मरवा देता था मुख्तार अंसारी, 11 साल पहले किया था कारनामा

 

मुख्तार अंसारी के बुरे दिनों की शुरुआत 11 साल पहले हुई थी।

कभी यूपी का डॉन बनकर जेल से ही अपने काले साम्राज्य को चलाने वाले मुख्तार अंसारी के बुरे दिनों की शुरुआत 11 साल पहले हुई थी जब उसने ठेकेदार की हत्या के मामले में गवाह और सिपाही को दिनदहाड़े गोलियों से भुनवा दिया था।

गाजियाबाद। कभी यूपी का डॉन बनकर जेल से ही अपने काले साम्राज्य को चलाने वाले मुख्तार अंसारी के बुरे दिनों की शुरुआत 11 साल पहले हुई थी, जब उसने ठेकेदार की हत्या के मामले में गवाह और सिपाही को दिनदहाड़े गोलियों से भुनवा दिया था।

आरटीओ के सामने दिनदहाड़े की थी हत्या

गाजीपुर तिराहे पर 29 अगस्त 2008 को पीडब्ल्यूडी ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया था। उनके चालक शब्बीर व साथी राजेश को भी गोली लगी थी, जिसमें राजेश की मौत हो गई थी।

मन्ना सिंह की हत्या अंसारी को ठेकों से 10 फीसद रंगदारी नहीं देने पर की गई थी। मन्ना के भाई हरेंद्र व अशोक के समझौते नहीं करने पर मऊ के दक्षिण टोला थाना क्षेत्र में 19 मार्च 2010 को आरटीओ के सामने मन्ना हत्याकांड के गवाह राम सिंह मौर्य और शब्बीर की सुरक्षा में तैनात सिपाही सतीश को मुख्तार ने गोलियों से भुनवा दिया। फिर शब्बीर ने गवाही देने से मना कर दिया था।

सिपाही की हत्या के बाद एसटीएफ ने गाजीपुर जेल में छापा मारा तो अंसारी को जेल में मिलने वालीं वीआइपी सुविधाओं का पता चला। उसे तुरंत मथुरा जेल में भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने मऊ व आसपास के जिलों में अंसारी के छह शूटरों को ढेर कर दिया था। अंसारी पर यह पहली बड़ी चोट थी। मऊ में दोहरे हत्याकांड की विवेचना तत्कालीन दक्षिण टोला थानाध्यक्ष संदीप सिंह ने की थी।

इसके दो माह बाद अंसारी व उसके 15 गुर्गों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। 2014 में अंसारी ने अपने साथी राजन से अपनी ही साइट पर मजदूरों पर गोलियां चलवा दीं, जिसमें एक की मौत हुई थी। आरोप मन्ना सिंह के भाई हरेंद्र व अशोक पर लगवाया। विवेचना बलिया ट्रांसफर की गई। बलिया कप्तान ने रसड़ा थाना प्रभारी संदीप को विवेचना दी। पता चला कि हरेंद्र व अशोक को फंसाने और मन्ना हत्याकांड के केस को कमजोर करने के लिए मजदूर को मरवाया था।

सूत्र बताते हैं कि गाजीपुर जेल में जिले के आलाधिकारी उसके साथ बैडमिंटन खेलते थे और एक सीओ जेल में अंसारी के लिए इस्त्री किए कपड़े पहुंचाते थे। गाजियाबाद के नगर कोतवाल संदीप सिंह ने पूर्व में मऊ व बलिया में थाना प्रभारी रहते सिपाही-गवाह व एक मजदूर की हत्या के मामलों में अंसारी व उसके गुर्गों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थीं।