चिताएं बढ़ा रहीं चिंता, आगरा का कोई शमशान ऐसा नहीं जहां शवों का आंकड़ा दर्जन पार नहीं

 

कैलाश घाट पर शवों को लेकर पहुंचे लोग।

ताजगंज के अलावा अन्य शमशान घाटों पर भी शवों के अंतिम संस्कार को इंतजार। बल्केश्वर शमशान घाट पर एक अप्रैल से बढ़ा शवों के अंतिम संस्कार का आंकड़ा। चार दिन में जलीं 100 से ज्यादा चिताएं। शाहगंज समेत अन्य श्मशान घाट पर यही स्थिति है।

आगरा, संवाददाता। ताजगंज के अलावा अन्य शमशान घाटों पर भी शवों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। हर दिन शवाें की संख्या बढ़ रही है। बल्केश्वर शमशान घाट पर चार दिन में 100 से ज्यादा चिताएं जल चुकी हैं। वहीं शाहगंज समेत अन्य श्मशान घाट पर यही स्थिति है।

ताजगज में विद्युत शवदाह गृह पर गुरुवार को रात 12 बजे तक 40 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। वहीं लकड़ी वाले घाट पर भी 40 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया। शवों को लेकर स्वजनों के साथ गिने-चुने लोग ही पहुंच रहे हैं। उधर, बल्केश्वर के शमशान घाट पर अंतिम संस्कार कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।गुरुवार को यहां पर 18 शवाें का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि बुधवार को यह संख्या 32 थी।

बल्केश्वर में यमुना किनारे शहर का प्रमुख शमशान घाट है। यहां शमशान घाट के लिए अलग से कमेटी बनी हुई है। यहां पर अंतिम संस्कार सामग्री की व्यवस्था अग्रवाल महासभा द्वारा की जाती है। घाट के व्यवस्था प्रमुख महेश जौहरी ने बताया कि आम दिनाें फरवरी तक यहां चार से पांच शव अंतिम संस्कार के लिए अाते थे। मार्च के दूसरे सप्ताह के बाद अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों की संख्या आठ से दस पहुंच गई। एक अप्रैल के बाद 15 से ज्यादा शवों का प्रतिदिन अंतिम संस्कार हो रहा है। वहीं 15 अप्रैल के बाद यहां आंकड़ा और बढ़ गया है। महेश जाैहरी के अनुसार घाट पर 19 अप्रैल को 28, 20 अप्रैल को 30 व 21 अप्रैल को 32 शवों का अंतिम संस्कार किया गया।