सबक लिया होता तो आज ऐसे हालात नहीं होते

 

लापरवाही ने स्थिति को भयावह कर दिया।

कोरोना संक्रमितों की दिनोदिन बढ़ रही संख्या से स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं। अब लोगों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्हें खुद ही सावधानी बरतनी होगी। मास्क पहनने के साथ ही शारीरिक दूरी का भी पालन करना होगा।

नई दिल्‍ली। इस समय पूरी दुनिया बेहद कठिन दौर से गुजर रही है। कोरोना की दूसरी लहर अन्य देशों में पहले ही तबाही मचा चुकी है। भारत में भी मौजूदा स्थिति भयावह है। राजधानी दिल्ली में हालत सबसे गंभीर हैं। संक्रमण के साथ मौत के आंकड़े भी दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाएं ज्यादा बेहतर हैं। बावजूद इसके अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं। जरूरतमंद मरीज तक को तमाम कोशिशों के बावजूद बेड नहीं मिल पा रहे हैं। इस महामारी के सामने हर कोई लाचार और बेबस नजर आ रहा है।

लोग चाहकर भी अपनों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। एक माह पहले तक की बात करें तो दिल्ली में सब कुछ सामान्य लग रहा था। जनवरी और फरवरी महीने में तो संक्रमण इतना कम हो गया था कि हर कोई पहले की तरह निडर हो गया था। लोगों को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि यह कोरोना काल है। बस लोगों की यही लापरवाही भारी पड़ गई। कोरोना की मौजूदा लहर तो आनी ही थी, लेकिन लापरवाही ने स्थिति को भयावह कर दिया।

हर स्तर पर हुई अनदेखी : लापरवाही आम जनता और सरकार दोनों स्तर पर हुई है। दुनिया के कई देशों में दूसरी लहर की जानकारी होने के बावजूद इससे सबक लेने के बजाय लोग और गैर जिम्मेदार होते चले गए। बाजार से लेकर दफ्तर तक कहीं कोई मास्क पहनने को राजी नहीं था। इसे सख्ती से लागू करवाने की दिशा में सरकारी एजेंसियां भी नरम पड़ गईं।

रू हुआ सौ बेड का कोविड केयर सेंटर, 60 बेड पर आक्सीजन की सुविधासबक लेने में हुई चूक: हर अस्पतालों में मरीजों के इलाज की क्षमता निर्धारित है। मरीजों की संख्या क्षमता से थोड़ी अधिक हो तो बात समझ आती है, लेकिन संख्या क्षमता से बहुत ज्यादा हो तो किसी के लिए भी इलाज उपलब्ध कराना आसान नहीं होता। अन्य देशों को देखते हुए हमें पहले ही सबक लेना चाहिए था और खुद को दूसरी लहर के लिए तैयार रखना चाहिए था। अस्पतालों में संसाधनों को जुटाने के साथ-साथ बिस्तर बढ़ाने की तैयारी भी पहले ही करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जो व्यवस्था पिछली लहर के दौरान बनाई गई थीं, वो भी खत्म कर दी गईं। यदि वही उपलब्ध होती तो हम अब आगे की तैयारी कर रहे होते। और इस तरह से अस्पतालों में एक बेड पर दो मरीज जैसे हालात नहीं दिखते।

सरकार और जनता दोनों ही स्तर पर परिस्थितियों को समझने में चूक हुई है। पहली लहर के कमजोर होने के बाद स्कूल, कालेज खुल गए। शादी समारोहों में भी लोग बिना रोक टोक शामिल होने लगे। बस, ट्रेन व मेट्रो में भीड़ बढ़ती गई। इसी बीच म्यूटेंट वायरस आ गया। इससे संक्रमण तेजी से फैलने लगा। लोगों की लापरवाही के बीच वायरस को फैलने का भरपूर मौका मिला। अब यह वायरस इतना आक्रामक हो गया है कि एक कोरोना संक्रमित 10 लोगों को संक्रमित कर रहा है, जबकि अक्टूबर और नवंबर में संक्रमण के दौरान एक व्यक्ति से दो लोगों में ही संक्रमण फैल रहा था।

बरतनी होगी ज्यादा सावधानी: कोरोना संक्रमितों की दिनोदिन बढ़ रही संख्या से स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं। अब लोगों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्हें खुद ही सावधानी बरतनी होगी। मास्क पहनने के साथ ही शारीरिक दूरी का भी पालन करना होगा। यदि सांस लेने में परेशानी हो रही है तो पेट के बल लेट कर लंबी-लंबी सांस लें। उससे शरीर में आक्सीजन की मात्र बढ़ जाती है। हर घंटे एक मिनट तक ऐसा करने से शरीर में आक्सीजन की मात्र बनी रहेगी। यदि आक्सीजन सेचुरेशन 85 है उनमें भी आक्सीजन का स्तर सामान्य स्तर पर पहुंच सकता है।