दिल्ली में एक झील का ऐसा हाल, बरसात का पानी बनाता है झील, आम दिनों में लोग फेंकते हैं कूड़ा

तिहाड़ झील में पानी ही नहीं है। सूखी पड़ी हरि नगर झील- जागरण

पिछले एक दशक से तिहाड़ झील में पानी ही नहीं है। कभी बारिश के पानी से लबालब रहने वाला यह झील अब मैदान में तब्दील हो चुका है। झील में बारिश के मौसम को छोड़कर पानी की एक बूंद भी कहीं नजर नहीं आती है।

 संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पिछले एक दशक से तिहाड़ झील में पानी ही नहीं है। कभी बारिश के पानी से लबालब रहने वाला यह झील अब मैदान में तब्दील हो चुका है। झील में बारिश के मौसम को छोड़कर पानी की एक बूंद भी कहीं नजर नहीं आती है। बारिश के मौसम में भी झील के कुल हिस्से के दस फीसद भाग में ही पानी की थोड़ी बहुत मात्र नजर आती है। बारिश के बीतते ही यह पानी भी सूखी धरती में समा जाती है।

कभी पर्यटन के लिहाज से दिल्ली विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार तिहाड़ झील की दुर्दशा सरकारी विभागों की ओर से जल संरक्षण को लेकर समय समय पर कहे जाने वाले वादों की पोल खोलकर रख देती है। तिहाड़ झील के आसपास पिछले पांच छह वर्षों से रहने वाले लोग तो अब यह बात भी बड़ी मुश्किल से मानते हैं कि यहां कभी झील होती थी।

झील के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि करीब एक दशक से यहां नौकायन नहीं हो रहा है। अधिकांश समय सूखी रहने वाली इस झील में बारिश के समय भी इतना पानी नही रहता है कि इसमें नौकायन की सुविधा मिले। लोगों का कहना है कि कुछ वर्ष तो किनारों पर बोट नजर आए, लेकिन पिछले करीब एक दशक से एक भी बोट नजर नहीं आया जबकि कभी यहां छह बोट थे।

छह एकड़ जलग्रहण क्षेत्र

डीडीए के स्वामित्व वाला तिहाड़ झील लगभग 50 एकड़ विस्तृत भूखंड में फैला है। इसके 32 एकड़ क्षेत्रफल पर पार्क है। जबकि छह एकड़ में जलग्रहण है। इसके अलावा लगभग आठ एकड़ क्षेत्र में बड़े हरित क्षेत्र है। तिहाड़ गांव निवासी भजन सिंह का कहना है कि डीडीए की ओर से यहां भूजल स्तर को बढ़ाने के उपाय गंभीरतापूर्वक कभी नहीं किए गए।

जिसकी वजह से यहां पर अब सिर्फ बरसात के दिनों में ही पानी जमा दिखता है बाकी समय कूड़ा कचरा ही दिखाई देता है। यदि अधिक बरसात हो जाती है तो पानी कुछ दिनों तक नजर आता है उसके बाद वो भी खत्म हो जाता है।