रैन बसेरों में रहने वालों की संख्या एकाएक बढ़ी, सरकार ने कहा- सबका रखेंगे खयाल

 

डूसिब ने रैन बसेरा संचालकों को निर्देश दिया कि जब तक जगह रहती है किसी को वापस न भेजा जाए।

डूसिब के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी रैन बसेरों में दोपहर और शाम का भोजन दिया जा रहा है। जल्द ही सुबह का नाश्ता भी शुरू किया जाएगा। इसके लिए टेंडर किए जा रहे हैं। जल्द ही यह सुविधा मिल सकेगी।

नई दिल्ली । उपराज्यपाल के आदेश के बाद रैन बसेरों में रहने वालों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। अभी तक पिछले काफी दिनों से रैन बसेरों में रहने वालों की संख्या पांच हजार से 5200 रहती थी जो बढ़कर अब छह हजार से लेकर 6200 तक हो गई है। जानकारों का कहना है कि अभी एक हजार लोग यहां और ठहर सकते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग ठहरने आते हैं तो यहां समस्या खड़ी हो सकती है।

किसी को नहीं भेजा जाएगा वापस

दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने सभी रैन बसेरा संचालकों को निर्देश दिया है कि जब तक जगह रहती है किसी को वापस न भेजा जाए। सभी को ठहरने और भोजन के उचित प्रबंध किए जाएं।

जल्द मिलेगा सुबह का नाश्ता

डूसिब के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी रैन बसेरों में दोपहर और शाम का भोजन दिया जा रहा है। जल्द ही सुबह का नाश्ता भी शुरू किया जाएगा। इसके लिए टेंडर किए जा रहे हैं। जल्द ही यह सुविधा मिल सकेगी।

205 रैन बसेरों में 7200 लोगों के ठहरने की है व्यवस्था

डूसिब द्वारा चलाए जा रहे 205 रैन बसेरों में 7200 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। गर्मी शुरू होने के साथ ही रहने वालों की संख्या 52 सौ पर आ गई थी। मगर पिछले तीन दिनों में लोगों की संख्या बढ़ी है। मगर इनमें श्रमिक कम हैं। यहां पहुंचने वालों में वे लोग अधिक हैं जो सड़क के किनारे या अन्य स्थानों पर रहते थे, लाकडाउन लग जाने से अब ये लोग रैन बसेरों की ओर आ रहे हैं।

हर जरूरत का रखा जा रहा खयाल

डूसिब बोर्ड के सदस्य विपिन राय कहते हैं कि जब से कोरोना का प्रकोप आया है पिछले 13 माह से डूसिब बेहतरीन तरीके से पूरी संवेदनशीलता के साथ बेघरों को रैन बसेरों में ठहरा रहा है और उन्हें भोजन दे रहा है। यहां शारीरिक दूरी का पालन का किया जा रहा है। बीमार लोगों के लिए अलग इंतजाम किए गए हैं।