ग्रेजुएट राजेश महिलाओं को बना रहे आत्मनिर्भर, जैविक खाद से करा रहे आमदनी

 


Chatra News, Jharkhand Samachar धीरे-धीरे गांव के लोगों में जैविक खेती को लेकर जागरुकता बढ़ रही है।

 चतरा जिले के कान्हाचट्टी में महिलाएं जैविक खाद बनाकर उसकी बिक्री भी कर रहीं हैं। इसके अलावा इस खाद का उपयोग अपने खेती के कार्यों में भी करती हैं। धीरे-धीरे गांव के लोगों में जैविक खेती को लेकर जागरुकता बढ़ रही है।

कान्हाचट्टी (चतरा), सं।चतरा जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड में महिलाएं जैविक खाद का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। यहां के अति घोर नक्सल प्रभावित पंचायत बेंगोकला स्थित सहातु गांव के 25 वर्षीय युवक राजेश सिंह भोक्ता महिलाओं को जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। गांव की 60 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हेंं जैविक खाद उत्पादित करने के साथ-साथ प्रयोग में लाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। राजेश ने परमेश्वर आजीविका समूह बनाकर गांव में जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है।

राजेश का कहना है कि जैविक खाद बनाने एवं इसके प्रयोग से खेती में किसानों का खर्च कम होता है। उन्होंने कहा कि जैविक उर्वरक में हमेशा उपजाऊ बनी रहती है। साथ में जैविक कृषि से उत्पन्न फसल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। उन्होंने बताया कि आज धीरे-धीरे गांव के लोगों में जैविक खेती को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है। हमारी कोशिश है कि आने वाले समय में आसपास के गांव के लोगों को भी जैविक खेती के संबंध में जानकारी देकर उन्हें इसके बारे में जागरूक किया जाएगा।

बेंगो कला पंचायत में परमेश्वर आजीविका महिला सखी मंडल द्वारा जैविक खाद उत्पादन की शुरुआत की गई है। सफाई कर्मी महिलाएं सुबह सभी घरों से डोर टू डोर कचरा एकत्र कर कमपोस्ट में डालते हैं। राजेश ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात रांची से जैविक खाद को लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए जैविक खाद, धनाजीवाक्रीत, द्रव्यजीवाकृत, निमासत्र निर्माण करने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद गांव आकर समूह बनाकर महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया।

महिलाओं को वर्मी कंपोस्ट बनाने के तरीके नाडे, धनाजीवक्रीत, द्रव्यजीवक्रीत, नीमाशत्र, सहित पशुओं को खिलाए जाने वाले अजोला उत्पादन के संबंध में जानकारी दी। गांव की महिलाएं जैविक खाद बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। अपने-अपने खेत में कृषि कार्य में भी जैविक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। राजेश ने बताया कि गांव में पढ़ लिखकर बेकार पड़ा था लेकिन अब इस काम को करने में काफी संतुष्टि हो रही है। वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। इस खाद से अपने क्षेत्र में जैविक खेती करने के अलावा आसपास के किसानों को खाद बेच कर आमदनी करा रहे हैं।