पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ने की ईवीएम के इस्तेमाल की पैरवी, विशेषज्ञों ने किया विरोध

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ईवीएम के इस्तेमाल की पैरवी की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा ईवीएम के इस्तेमाल की पैरवी का देश के लोगों और विशेषज्ञों ने जबर्दस्त विरोध किया है। विशेषज्ञों ने इसके पीछे विश्वसनीयता के मसलों को बताया है। जानें विशेषज्ञों ने ईवीएम के इस्तेमाल पर क्‍या बातें कही हैं।

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा ईवीएम के इस्तेमाल की पैरवी का देश के लोगों और विशेषज्ञों ने जबर्दस्त विरोध किया है। उन्होंने बड़ी लागत के साथ-साथ विरोध का कारण तकनीकी और विश्वसनीयता के मसलों को बताया है। सीनेट चेयरमैन के हालिया विवादित चुनाव के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा ईवीएम के इस्तेमाल की पैरवी का मुद्दा गर्मा गया है। इस चुनाव में सरकार के प्रत्याशी को संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार से कम मत प्राप्त हुए थे।

चुनाव में नियमों को तोड़ने के लिए पीठासीन अधिकारी को सात मतपत्रों को नष्ट करना पड़ा था। पिछले महीने हुए इस चुनाव के दौरान पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआइ) पार्टी के प्रत्याशी सादिक संजरानी को 48 मत प्राप्त हुए थे जबकि उनके प्रतिपक्षी व पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को 42 मत प्राप्त हुए क्योंकि उन्हें मिले सात मतों को खारिज कर दिया गया था।

पाकिस्तान के पूर्व चुनाव आयुक्त के सचिव कंवर दिलशाद ने कहा कि वित्तीय, तकनीकी और अन्य बाधाओं की वजह से अगले चुनावों तक ईवीएम के इस्तेमाल की शुरुआत होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मतपत्रों के स्थान पर ईवीएम के इस्तेमाल के लिए एक लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। सिर्फ 3.5 लाख ईवीएम खरीदने के लिए ही 60 अरब रुपयों की जरूरत होगी।

दिलशाद ने कहा कि यह बेकार की कवायद है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग की ईवीएम से संबंधित पायलट परियोजना अतीत में विफल हो चुकी है। पीपीपी के सीनेटर ताज हैदर ने कहा कि 2018 के रिजल्ट ट्रांसमिशन सिस्टम मुद्दे के बाद कोई भी राजनीतिक पार्टी तकनीक पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं है। अभी एक दिन पहले ही पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट  ने चुनाव आयोग के खिलाफ इमरान की पार्टी की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया था। यह याचिका इमरान के दल तहरीक ए इंसाफ ने चुनाव आयोग के द्वारा एनए-75 दस्का निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने के विरोध में की थी। बता दें कि यहां उपचुनाव के दौरान व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़की थी। इस हिंसा की वजह से निर्वाचन आयोग ने दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था। 

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