मरीजों को फ्री सिलिंडर मुहैया करा 'ऑक्सीजन मैन' बने कानपुर के सदाकत , बताया- कैसे मिली प्रेरणा

 

कानपुर के सदाकत उल्ला खां की फाइल फोटो।

 सदाकत ने बताया कि मोहल्ले में रहने वाले साथी अरशद की बहन जीटी रोड स्थित रीवा अस्पताल में भर्ती थीं। डॉक्टरों ने वेंटीलेटर पर कुछ दिन रखने के बाद ऑक्सीजन लगाकर घर पर रखने के लिए कहा था। जिस पर वह लोग उन्हें घर लाए थे।

कानपुर, बाबूपुरवा मुंशीपुरवा डाकखाने के पास रहने वाले रेलवे कर्मी का बेटा सदाकत उल्ला खां जरूरतमंदों को निश्शुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं। सदाकत बीते चार साल से इंसानियत अभी जिंदा है नाम से एक सामाजिक संस्था चलाते हैं। लोगों की मदद के लिए उन्होंने 63500 रुपये जमा करके कोयला नगर से पांच ऑक्सीजन गैस सिलिंडर किराये पर लिये हैं। वहीं पांच सिलिंडर क्षेत्र में गैस वेल्डिंग का काम करने वाले दुकानदारों से लिये हैं।

इस तरह मिली समाजसेवा की प्रेरणा: सदाकत ने बताया कि मोहल्ले में रहने वाले साथी अरशद की बहन जीटी रोड स्थित रीवा अस्पताल में भर्ती थीं। डॉक्टरों ने वेंटीलेटर पर कुछ दिन रखने के बाद ऑक्सीजन लगाकर घर पर रखने के लिए कहा था। जिस पर वह लोग सिलिंडर का इंतजाम करके उन्हें घर लाए थे। गैस खत्म होने पर उनकी मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने ऑक्सीजन के जरूरतमंदों की मदद का ठान ली थी। सदाकत ने बताया कि संस्था के सदस्यों से कुछ-कुछ रुपये लेकर 12700 रुपये प्रति सिलिंडर के हिसाब से 63500 रुपये जमा करके पांच सिलिंडर किराये पर लिये हैं। एक सिलिंडर का किराया पांच सौ रुपये है। फजलगंज में सिलिंडर रीफिलिंग कराकर लोगों को मुहैया कराते हैं। एक बार इसकी शुरूआत हुई तो धीरे-धीरे लोगों को जानकारी हुई। जरूरत बढऩे पर उन्होंने आसपास वेल्डिंग का काम करने वाले दुकानदारों से संपर्क करके बड़े छोटे पांच सिलिंडर और लिए हैं। मरीज का ऑक्सीजन लेवल देखने के बाद ही सिलिंडर मुहैया कराया जाता है। गंभीर मरीजों को सिलिंडर मुहैया कराने की प्राथमिकता रही है।