होम आइसोलेट दूल्हे का ऑनलाइन निकाह, जम्मू संभाग के जिला रियासी में आया अनोखा मामला

 

कोरोना संक्रमित तथा होम आइसोलेट होने की वजह से ऐसा संभव नहीं दिख रहा था।

दुल्हन पक्ष को भी इस बारे में पता चला तो दोनों पक्ष चिंता तथा सोच में पड़ गए। दोनों तरफ से शादी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। आपसी सोच विचार में पहले तो निकाह ही कुछ दिन आगे स्थगित करने पर लगभग सहमति बन चुकी थी।

रियासी,  कोरोना भी न जाने क्या-क्या करवाएगा। अभी तक आपने ऑनलाइन शॉपिंग व पढ़ाई के बारे में ही ज्यादातर सुना होगा लेकिन कोरोना की वजह से अब ऑनलाइन निकाह की परंपरा भी शुरू होने लगी है। ऐसा शायद ही किसी ने सोचा होगा। जम्मू संभाग के जिला रियासी में ऐसा हुआ है। जी हां, रियासी जिला में अपनी तरह का यह पहला तथा अनोखा मामला सामने आया है। निकाह से कुछ दिन पहले ही दूल्हा कोरोना संक्रमित पाया गया। उसे होम आइसोलेट होना पड़ा। ऐसे में दूल्हा घोड़ी चढ़कर शादी करने तो नहीं जा पाया। लेकिन दुल्हन के घर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दूल्हे को जोड़कर मौलवी ने ऑनलाइन निकाह पढ़वा दिया।

रियासी जिला के कोटला गांव के रहने वाले मनीर का निकाह बंधार पंचायत के पनासा गांव की रजिया बीवी से 8 अप्रैल को होना तय हुआ था। मनीर शिवखोड़ी ट्रैक पर घोड़ा चलाता है। पिछले कुछ दिन से शिव खोड़ी ट्रैक पर घोड़ा चलाने वालों की कोरोना जांच की जा रही है। मनीर की भी जांच हुई तो वह कोरोना संक्रमित पाया गया। मनीर को तुरंत होम आइसोलेट कर दिया गया। होम आइसोलेशन के 13वें दिन 8 अप्रैल को उसे घोड़ी चढ़कर दुल्हन के घर पनासा में बारात लेकर जाना था लेकिन कोरोना संक्रमित तथा होम आइसोलेट होने की वजह से ऐसा संभव नहीं दिख रहा था।

दुल्हन पक्ष को भी इस बारे में पता चला तो दोनों पक्ष चिंता तथा सोच में पड़ गए। दोनों तरफ से शादी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। आपसी सोच विचार में पहले तो निकाह ही कुछ दिन आगे स्थगित करने पर लगभग सहमति बन चुकी थी।

इसी बीच फॉरेस्ट राइट एक्ट के चेयरमैन लियाकत अली, स्थानीय पूर्व सरपंच बशीर अहमद तथा कुछ अन्य बड़े बुजुर्गों ने लड़की के पिता दीन मोहम्मद और दूल्हा पक्ष से बातचीत कर यह तय किया कि तारीख में बदलाव नहीं किया जाएगा। निकाह उसी दिन होगा परंतु हाेगा ऑनलाइन। इसमें एक सहमति यह भी बनी कि कोरोना संक्रमित दूल्हा ही नहीं बल्कि महामारी से बचाव के लिए उनके माता-पिता, बहन-भाई सहित सगे संबंधी भी बारात में शामिल नहीं होगा।

अब सवाल यह उठा कि लड़की के घर में निकाह का माहौल कैसे बने। जब बारात नहीं जाएगी तो शादी की खुशियां भी अधूरी रह जाएंगी। दोनों पक्षों ने बातचीत कर इसका हल भी निकाल लिया। तय किया गया कि वर पक्ष की तरफ से रनसू गांव में रहने वाले उनके संबंधियों में लगभग 40 लोग बरात लेकर जाएंगे। फिर क्या था, सब कुछ तय होते ही शादी की तैयारियां शुरू हो गई। शादी के दिन 8 अप्रैल को रनसू से लगभग 40 लोग बिना दूल्हे के बारात लेकर लड़की पक्ष के जहां पनासा पहुंच गए। बारात के पहुंचने पर लड़की पक्ष की तरफ से पूरा स्वागत किया गया।

बारी जब निकाह पढ़ाने की आई तो वधू पक्ष के घर में बैठकर अपने घर कोटला मे होम आइसोलेट हुए मनीर से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क साधा गया। फिर मुफ्ती रोशन दीन ने प्रत्यक्ष रूप से मौजूद वधु और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े वर के बीच निकाह पढ़ा दिया। निकाह की रस्म पूरी होने के बाद दुल्हन को डोली में बिठाकर बरात के साथ विदा कर दिया गया। चूंकि मनीर का अगला टेस्ट नो अप्रैल को होना तय था। इसलिए दुल्हन को उसके ससुराल ना भेजकर रनसू स्थित उसकी मौसी के घर भेजा गया।

पूर्व सरपंच बशीर अहमद ने बताया कि दूल्हे का टेस्ट जैसे ही नेगेटिव आएगा दुल्हन अपने ससुराल चली जाएगी। जिले में पहली बार हुई इस अनोखी शादी को लेकर हर कोई चर्चा कर रहा है। लोग यह भी कह रहे हैं कि कोरोना भी ना जाने कौन-कौन करवाएगा।