मध्य प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जे से मुक्त करवाए चार मंदिर

 

उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित चार मंदिरों और संपत्ति पर 70 साल से था अवैध कब्जा

दूसरे नंबर पर 33 मंदिरों के साथ राजस्थान है। उत्तर प्रदेश में 12 और छत्तीसगढ़-तमिलनाडु में एक-एक मंदिर है। इन्हें अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई पिछले साल शुरू हुई है। इनमें महाराष्ट्र का भीमाशंकर ज्योतिर्लिग और अयोध्या में एक राम मंदिर और रामेश्वरम में भी तीन मंदिर हैं।

भोपाल। उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित चार मंदिरों और उनकी संपत्तियों को मध्य प्रदेश सरकार ने अवैध कब्जे से मुक्त करवा लिया है। राज्य सरकार के अधिकार वाले इन चार मंदिरों श्री कुंजबिहारी वंशीवट, सामंत बिहारीजी मंदिर, श्री हीरामोहन कुंज और संपत्ति बाग पर करीब 70 साल से कुछ लोग कब्जा किए हुए थे। हालांकि दो मंदिरों (राजमनोहर और प्रियवल्लभ) से कब्जा हटाने को लेकर विवाद भी हुआ है, इस कारण उनका कब्जा नहीं लिया जा सका है।

गौरतलब है कि देश के पांच राज्यों में मध्य प्रदेश सरकार की धार्मिक महत्व की संपत्ति फैली हुई है। 84 ऐसे मंदिर-अन्य संपत्तियां भी तलाश ली गई हैं, जो देश की आजादी के बाद से अवैध कब्जे में हैं। ये संपत्तियां आजादी के पहले प्रदेश में शासन करने वाले राजवंशों की है। इनमें श्री कुंजबिहारी मंदिर रतलाम स्टेट, श्री सामंत बिहारी जी मंदिर छतरपुर स्टेट, श्री हीरामोहन कुंज और संपत्ति बाग दतिया स्टेट की संपत्ति रहे हैं। मध्य प्रदेश के अधिकार वाले सबसे ज्यादा 37 मंदिर महाराष्ट्र में हैं।

दूसरे नंबर पर 33 मंदिरों के साथ राजस्थान है। उत्तर प्रदेश में 12 और छत्तीसगढ़-तमिलनाडु में एक-एक मंदिर है। इन्हें अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई पिछले साल शुरू हुई है। इनमें महाराष्ट्र का भीमाशंकर ज्योतिर्लिग और अयोध्या में एक राम मंदिर और रामेश्वरम में भी तीन मंदिर हैं। इनकी संपत्ति भी अरबों रपये में है। इन मंदिरों से कब्जेधारी आस्था के नाम पर कमा तो रहे हैं, पर उनके रखरखाव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मंदिरों पर ऐसे हुआ प्रदेश का अधिकार स्वतंत्रता से पहले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राजवंशों का शासन था। वे धर्मार्थ प्रसिद्ध जगहों पर मंदिर, पवित्र नदियों पर घाट और धर्मशालाएं बनवाते थे। ये संपत्ति रियासतों की थीं।

देश की आजादी के वक्त राज्यों का गठन हुआ, रियासतें उनमें शामिल कर दी गई और उनकी संपत्ति को शासन के अधीन कर लिया गया। इन्हीं में प्रदेश की 84 संपत्ति हैं। आजादी के बाद विकास और अन्य व्यवस्थाएं जुटाने में लगीं सरकारें पुराने रिकॉर्ड को भूल गई इसलिए मंदिरों पर अवैध कब्जे कर लिए गए। पुराने रिकॉर्ड खंगाले तब चला पता इन मंदिरों को लेकर सरकार को कोई दावा नहीं था, पर कोरोना काल में अध्यात्म विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने पुराने रिकॉर्ड को खंगालना शुरू किया और एक के बाद एक दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश की संपत्ति के प्रमाण मिलते गए। उन पर कब्जा पाने के लिए विशेष टीमें गठित की गई। टीमों ने उन राज्यों में जाकर मंदिर व संपत्ति के हालात देखे और स्थानीय प्रशासन की मदद से कब्जेधारियों से संपत्ति वापस लेने के प्रयास शुरू किए।

अध्यात्म एवं संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर ने कहा, 'जब हमें पता चला कि प्रदेश के बाहर हमारी संपत्तियां है और वे किसी के कब्जे में है, तो हमने अधिकारियों के निर्देश दिए और उसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। हम संबंधित सरकारों से बात करके सभी मंदिर और संपत्तियों को मुक्त कराएंगे। हमारा उद्देश्य इन मंदिरों की व्यवस्थाओं को भी दुरस्त करना है।'