राकेश टिकैत पर भड़के बॉलीवुड डायरेक्टर, बोले- 'सड़क इनके बाप की जागीर नहीं'

 

किसान नेता राकेश टिकैत और फिल्ममेकर अशोक पंडित की फाइल फोटो।

राकेश टिकैत ने कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के बीच चल रहे आंदोलन पर कहा कि किसान अपने घरों में ही हैं। हम उन्हें अब और कहां जाने की बात कर रहे हैं? क्या कोरोना यहां से फैल रहा है? हम यहां पिछले 5 महीनों से रह रहे हैं।

नई दिल्ली,  ऑनलाइन डेस्क। अगले एक सप्ताह में तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों की वापसी को लेकर चल रहे किसानों के आंदोलन को पूरे पांच महीने हो जाएंगे। इस बीच यूपी गेट पर सड़क घेरकर बैठे किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आम लोगों के साथ-साथ बॉलीवुड कलाकारों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब बॉलीवुड के नामी फिल्ममेकर अशोक पंडित ने नाम नहीं लेते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait, National Spokesperson of Bharatiya Kisan Union) पर इशारों-इशारों बोला है। किसान आंदोलन के दौरान यूपी गेट पर सड़क घेरने पर अशोक पंडित ने ट्वीट किया है- 'सड़क इनके बाप की जागीर नहीं'। दरअसल, पिछले दिनों लॉकडाउन के मुद्दे पर राकेश टिकैत ने कहा था कि वह कोरोना के डर से यहां से नहीं उठने वाले, अपनी मांगे मंगवाकर ही यहां  से अपने घर जाएंगे। राकेश टिकैत ने यह भी कहा था कि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का घर वहीं है, वो वहां से नहीं जाएंगे। इससे पहले राकेश टिकैत ने पहले किसान प्रदर्शनकारियों को कोरोना का टीका लगाने की बात कही थी तो अशोक पंडित ने ट्वीट किया था- 'हलवा है क्या?'

पढ़िये राकेश टिकैत का पूरा बयान

राकेश टिकैत ने कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के बीच चल रहे आंदोलन पर कहा कि किसान अपने घरों में ही हैं। हम उन्हें अब और कहां जाने की बात कर रहे हैं? क्या कोरोना यहां से फैल रहा है? हम यहां पिछले 5 महीनों से रह रहे हैं। अब यही हमारा घर है। बहुत से किसानों ने वैक्सीन ले लिया है, लेकिन वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। हमने अधिकारियों से कहा है कि वो यहां कैंप लगाएं। हम सब कोरोना का टीका लगवाएंगे।

मांगे मानने तक नहीं खत्म होगा किसान आंदोलन

किसान नेता राकेश टिकैत साफ-साफ कह चुके हैं कि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का घर वहीं है, वो वहां से नहीं जाएंगे। उनके इस बयान पर बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित ने उन पर अपनी भड़ास निकाली है।

गौरतलब है कि यूपी बॉर्डर पर किसान प्रदर्शनकारियों के धरना प्रदर्शन जारी रखने से पिछले साल 28 नवंबर से वाहन चालकों को बड़ी दिक्कत पेश आ रही है। लोगों को कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। इससे जहां समय ज्यादा लगता है तो ईंधन भी अधिक खर्च होता है। इसको लेकर स्थानीय लोग भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं, इसके उलट किसान नेता आंदोलन नहीं खत्म करने पर अड़े हैं।