भारत-चीन के बीच वार्ता पर मालदीव के विदेश मंत्री ने जताई प्रसन्नता

 

भारत-चीन के बीच वार्ता पर मालदीव ने जताई प्रसन्नता

भारत आए मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भारत-चीन के बीच वार्ता पर प्रसन्नता प्रकट की है। उन्होंने दोनों देशों को दुनिया का आर्थिक ताकत बताते हुए इस बात का भरोसा जताया कि वार्ता से तनाव कम होगा।

नई दिल्ली, एएनआइ। मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने शुक्रवार को भारत-चीन मामले में वार्ता पर प्रसन्नता प्रकट की। उन्होने कहा, 'मैं बहुत प्रसन्न हूं कि भारत-चीन के बीच  वार्ता हो रही है। मुझे इस बात का भरोसा है कि दुनिया के दोनों आर्थिक ताकतों भारत और चीन के बीच वार्ता से तनाव कम होगा। मुझे उनके नेतृत्व पर इस बात का विश्वास है कि वे सही कदम उठाएंगे।' मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने विदेश मंत्री डॉ.एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और आपसी हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद दो दिवसीय यात्रा पर गुरुवार को भारत आए हैं। इस दौरान वह मालदीव तथा भारत के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने को लेकर व्यापक चर्चा करेंगे। उनके आने की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया था कि विदेश मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच करीबी द्विपक्षीय सहयोग को और गति मिलने की संभावना है। बता दें कि मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का करीबी नौवहन सहयोगी है और प्रधानमंत्री के 'सागर' दृष्टिकोण (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रीजन) में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

भारत मालदीव को हिंद महासागर में अपना मुख्य भागीदार मानता है। वहीं भारत का रणनीतिक प्रतिद्वंदी चीन पिछले कुछ सालों से मालदीव पर अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपने अरबों डॉलर के Belt and Road Initiative प्रोजेक्ट के जरिए अपनी पैठ बढ़ाना चाहता है। हिंद महासागर में चीन अपनी नौसेना की पहुंच को भी बढ़ाना चाहता है। चीन ने जिबूती में अपना पहला विदेशी अड्डा बना लिया है और हिंद महासागर में अपनी नौ सेना की पैठ बढ़ाने के प्रयास में जुटा हुआ है। बता दें कि फरवरी में अपने मालदीव दौरे के दौरान भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने मालदीव की मेरीटाइम क्षमता को मजबूत करने के लिए 5 करोड़ डॉलर का समझौता किया था। इस दौरान कुल 5 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे।