कोरोना को ढाल बना एनडीएमसी सुधार रहा आबोहवा, युवाओं का भी मिल रहा साथ

 

प्लास्टिक बोतल दो मास्क लो अभियान को मिल रहा लोगों का साथ।

एनडीएमसी ने एक दिसंबर से प्लास्टिक के बदले मास्क देने की योजना शुरू की थी। जिसका उद्देश्य नागरिकों को साफ हवा के साथ कोरोना जैसी महामारी से बचाना है। लोगों ने इस योजना को बड़े ही सकारात्मक ढंग से लिया है और पूरा सहयोग दे रहे हैं।

नई दिल्ली । आपदा को अवसर को बना नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) की प्लास्टिक लाओ मास्क ले जाओ पहल पर्यावरण बचाने में भी नजीर साबित हुई है। इससे न केवल आबोहवा खराब होने से बच रही है बल्कि लोगों को कोरोना से बचाव के लिए भी मददगार साबित हो रही है। अगर, यह योजना इसी तरह जारी रही तो आने वाले समय हजारों टन कार्बन हवा में मिलने से रोका जा सकेगा। वहीं, दूसरे राज्यों के लिए यह परियोजना मिशाल बन सकती है।

पर्यावरण में जाने से बचाया 18.50 टन कार्बऩ

दरअसल, बीते वर्ष कोरोना के बढ़ते मामले और प्रदूषण की समस्या की देखते हुए एनडीएमसी ने एक दिसंबर से प्लास्टिक के बदले मास्क देने की योजना शुरू की थी। जिसका उद्देश्य नागरिकों को साफ हवा के साथ कोरोना जैसी महामारी से बचाना है। लोगों ने इस योजना को बड़े ही सकारात्मक ढंग से लिया है और पूरा सहयोग दे रहे हैं।

कोरोना से बचाव के लिए वितरित किए 8 हजार से ज्यादा बांटे मास्क

यही वजह है कि एनडीएमसी के पास बड़ी मात्रा में प्लास्टिरक की बोतले पहुंच रही हैं। इसके साथ ही लोग अन्य तरह का प्लास्टिक कचरा भी देकर जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक दिसंबर, 2020 को कनाट प्लेस के चरखा म्यूजियम से यह अभियान शुरू किया था। मुख्य सचिव विजय देव खुद इसका उद्धाटन करने आए थे। इसका उद्देश्य मास्क देकर कोरोना संक्रमण को रोकने के साथ प्लास्टिक कचरे का निस्तारण था।

दोस्तों की टोली देकर जाती है प्लास्टिक की बोतलें

एनडीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि जब से यह केंद्र खोले गए हैं तब से लोगों में प्लास्टिक के बदले मास्क लेने की प्रवृति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कनाट प्लेस में बड़ी मात्रा में युवा आते हैं। ऐसे में कई युवा जब एक समूह में पहुंचते हैं तो कोल्ड ड्रिक बोतलों को कूड़ेदान में फेंकने या इधर-उधर फेंकने की बजाय बोतलों को एकत्रित कर प्लास्टिक देकर जाते हैं और उसके बदले मास्क लेकर जाते हैं। इसके अलावा कई ऐसे सरकारी कर्मचारी और युवा भी हैं जो एक से अधिक बार ऐसा करते हैं।

एनडीएमसी का काम हो रहा आसान

ठोस कचरा प्रबंधंन उप नियम 2017 के तहत स्थानीय निकायों को गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करना है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का अलग निस्तारण भी अनिवार्य है। अगर, एनडीएमसी इन केंद्रों को न खोले तो उनके कर्मचारियों को कूड़ेदानों से आए कचरे में से प्लास्टिक अलग-अलग करनी पड़ती। जिसकी वजह से एनडीएमसी के संसाधन लगते। अब जबकि लोग खुद ही अलग से प्लास्टिक कचरा दे रहे हैं जिससे एनडीएमसी को लाभ हो रहा है।

श्रेणी-                            चरखा म्यूजियम-   खान मार्केट

जमा किया प्लास्टिक कचरा- 5291 किलो ग्राम - 2262 किलोग्राम

प्लास्टिक कचरे का किया गया निस्तारण- 5291 किलोग्राम-2262 किलोग्राम

कार्बन उत्सर्जन होने से बचा-13टन-5.59 टन

वितरित किए गए मास्क-5266-3036

कितना प्लास्टिक कचरा आया

स्थान-प्लास्टिक बोतलें- प्लास्टिक बैग- प्लास्टिक का अन्य कचरा- कुल

खान मार्केट-184-473-71-728

चरखा म्यूजियम-666-2161-497-3324

चरखा म्यूजियम 1-1060-3440-791-5291

खान मार्केट 1-571-1470-221-2262

सभी आंकड़े एक दिसंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक के।