कोरोना संक्रमण के बीच चुवी सनाभाओं में नियम पालन की बढ़ी चिंता

 

कोरोना को लेकर जो दिशानिर्देश हैं उसका पालन कैसे संभव होगा?

 जिस तरह से राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है उससे बंगाल भाजपा के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि पीएम की सभा में अक्‍सर भारी भीड़ जुटती है।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। एक तरफ कोरोना महामारी तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक, दो नहीं, बल्कि में बंगाल छह चुनावी सभाएं होनी हैं। आगामी दस दिनों में सूबे के विभिन्न चुनाव वाले जिलों में पीएम की सभा के आयोजन की तैयारी है। परंतु जिस तरह से राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है उससे बंगाल भाजपा के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि पीएम की सभा में भारी भीड़ जुटती है। ऐसे में कोरोना को लेकर जो दिशानिर्देश हैं उसका पालन कैसे संभव होगा? दूसरी यदि पीएम की सभा रद होती है तो इसका नुकसान पार्टी को हो सकता है। ऐसे में भाजपा नेताओं को दोहरी चिंता सता रही है।

कोरोना को लेकर सभी सावधानियों का पालन करते हुए कैसे सभा आयोजित की जा सके इसे लेकर मंथन चल रहा है। हालांकि इस बीच शुक्रवार को चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है जिसमें प्रबल संभावना है कि चुनाव प्रचार को लेकर सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी जो खुद भी कोरोना को लेकर काफी सतर्क रहते हैं, वह अब बंगाल में रैलियां कैसे करते हैं यह भी देखने वाली बात होगी।

राज्य में पांचवें दौर के मतदान के दिन शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की दक्षिण दिनाजपुर और पश्चिम बर्धमान में दो जनसभा होनी है। इसके अलावा चार और सभाएं है। मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और कोलकाता में एक-एक सभा संभावित है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भी राज्य में कई सभाएं एवं रोड शो हैं। शुक्रवार को फिर से शाह कोलकाता पहुंच रहे हैं। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की भी रैली है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा एक सभा और रोड शो करेंगे।

बंगाल भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कोरोना के दिशानिर्देशों के मुताबिक इन बड़े नेताओं की सभा और रैलियां कैसे कराई जाएं। वैसे भी केंद्रीय नेताओं की रैलियों एवं रोड शो को लेकर पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। परंतु भीड़ को लेकर बड़ी चिंता है। इसीलिए अब मास्क से लेकर सैनिटाइजर तक की पर्याप्त मौजूदगी की बातें कही जा रही हैं। लेकिन इनका उपयोग कितना किया जाएगा, यह भी ध्यान देने वाली बात है।

चुनावी रैली में स्वयंसेवकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जाएगा कि जो भी व्यक्ति रैली में पहुंचे उनके लिए मास्क लगाना अनिवार्य होगा। जिनके पास मास्क नहीं है, उन्हें टीम द्वारा मास्क दिया जाएगा। पर शारीरिक दूरी को लेकर क्या होगा? यह बड़ी चिंता का विषय है। अब सब कुछ आयोग पर निर्भर है कि प्रचार क्या निर्देश जारी होता है।