अब वक्‍त है अमेरिकी फौज की घर वापसी का और यूएस के सबसे लंबे चलने वाले युद्ध के अंत का- बाइडन

 

सितंबर के बाद अफगानिस्‍तान में नहीं दिखाई देगा अमेेरिकी फौजी

अमेरिका आखिरकार 21 वर्ष बाद अफगानिस्‍तान से अपनी वापसी की राह तय कर चुका है। सितंबर तक अमेरिकी फौज यहां से पूरी तरह से बाहर हो जाएगी। इसके बाद अफगानिस्‍तान को अपने सभी मुद्दे और मामले खुद सुलटने होंगे।

वाशिंगटन (रॉयटर्स)। अमेरिका इस वर्ष सितंबर तक पूरी तरह से अफगानिस्‍तान से बाहर चला जाएगा। सितंबर के बाद उसका कोई जवान अफगानिस्‍तान में नहीं होगा और अफगानिस्‍तान को अपने सभी तरह के मामले खुद सुलझाने होंगे। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज की घर वापसी का रास्‍ता दरअसल, पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ही तैयार किया था। उन्‍होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार इस बात को दोहराया कि वो अपनी फौज को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फरवरी 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच जो समझौता ट्रंप कार्यकाल में दोहा में हुआ वो इस फैसले पर लगी एक मुहर जैसा ही था।

इस समझौते में कहा गया था कि अमेरिकी फौज को 1 मई तक अफगानिस्‍तान से वापस ले जाया जाएगा। लेकिन अमेरिका में सरकार के बदलने और जो बाइडन के सत्‍ता में आने के बाद इस समझौते में थोड़ा सा बदलाव किया गया और अमेरिकी फौज की वापसी की समय सीमा कोसितंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया। अब अमेरिका में हुए 9/11 हमले की बरसी से पहले सभी अमेरिकी जवान अपनी धरती पर वापस लौट जाएंगे। इसको लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ये वक्‍त अमेरिका के सबसे लंबे चलने वाले युद्ध के अंत का है और अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज की वापसी का है। 

लांकि अमेरिकी फौज ने फरवरी 2020 में जो समझौता तालिबान से किया था वो काफी कुछ एकतरफा था। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस वार्ता में अफगान सरकार का कोई पक्षकार शामिल नहीं था। अमेरिका के लिए केवल यहां से निकलना ही प्राथमिकता थी, जिसको तालिबान ने भलीभांति जाना। यही वजह थी कि तालिबान ने वार्ता से पहले ही साफ कर दिया था कि वो अमेरिका से समझौते के बाद ही किसी तरह से अफगान सरकार से बातचीत करने के बारे में विचार करेगा। जब जबकि ये दौर समाप्‍त हो गया है और अमेरिकी फौज की वापसी का रास्‍ता साफ हो गया है तो तालिबान इसको लेकर नाराज हे कि अमेरिका मई की पहले वाली समय सीमा से मुकर रहा है। इसलिए वो अफगान शांति वार्ता में भाग नहीं लेगा।

आपको बता दें कि अमेरिकी फौज अफगानिस्‍तान में न्‍यूयॉर्क पर हुए आतंकी हमले के बाद वर्ष 2001 में दाखिल हुई थीं। उनकी इस मौजूदगी के बाद अलकायदा चीफ ओसाबा बिन लादेन को पाकिस्‍तान के ऐबटाबाद में मार गिराया गया। आईएस चीफ अबुबक्र बगदादी और तालिबान का प्रमुख मुल्‍लाह उमर खत्‍म हुआ। अमेरिकी की वहां पर मौजूदगी से निसंदेह आईएस और तालिबान को जबरदस्‍त क्षति पहुंची है। हालांकि अमेरिका को ज्‍यादा कुछ हाथ नहीं लग सका। लेकिन ये सही है कि उसने यहां पर आकर 9/11 के हमलावरों को सजा जरूर दी।

गौरतलब है कि मानव इतिहास में 9/11 का हमला सबसे बड़ा आतंकी हमला था जिसमें करीब 3000 लोगों की मौत हुई थी और अरबों रुपये की संपत्ति पल भर में खाक हो गई थी। अफगानिस्‍तान में शुरू किए गए अमेरिका के इस सबसे बड़े युद्ध का अब अंत होने को है। इस युद्ध में अमेरिका के खरबों डॉलर रुपये खर्च हुए। इसको लेकर कई बार अमेरिकी सदन में सवाल भी उठे और अमेरिकी फौज की वापसी को लेकर आवाज भी सुनाई दी। अब ये आवाजें और वहां वापसी की राह देखने वाले अमेरिकी फौजियों का सपना सच होने वाला है।