बुंदेलखंड के किबंरलाइट चट्टानों के नीचे पांच करोड़ कैरेट हीरे का भंडार

 

जियोग्राफिकल सिचयुरेशन को देखा जाए तो बुंदेलखंड में डायमंड के अपार भंडार हो सकते हैं।

उज्जैन के विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञान के प्रो. पीके वर्मा ने बताया कि बुंदेलखंड में डायमंड के लिए अभी और शोध की जरूरत बुंदेलखंड में निजी कंपनियों ने डायमंड खोजने को लेकर काम किया है वह अभी पर्याप्त नहीं है।

छतरपुर। एक बार फिर बुंदेलखंड हीरों की दमक से चमक उठने को तैयार है। मध्य प्रदेश की सचिवालय वल्लभ भवन से आ रही खबरों के मुताबकि छतरपुर जिले के बकस्वाहा में दिसंबर 2022 से पहले हीरे की खदान में खनन शुरू होने की उम्मीद है। प्रदेश के पन्ना जिले में भी हीरे की खदान है। हालांकि पर्यावरणीय स्थिति के चलते एक खनन पर काफी समय तक रोक लगी रही। जनवरी 2021 से इस पर रोक लगा दी गई है। इसके खिलाफ नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन(एनएमडीसी) सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। उनका दावा है कि पन्ना हीरा खदान में अभी भी बड़ी मात्रा में हीरा है। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में ही क्यों बहुतायात में पाया जाता है? और हीरों का कितना भंडारण है? इस पर विस्तृत रिपोर्ट:

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को जल्द ही अब पूरे विश्व में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। छतरपुर जिले के बकस्वाहा में मिले जेम क्वालिटी (सबसे उत्तम) के हीरों के अथाह भंडार में जल्द ही खनन शुरू हो सकती है। एक्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने खनन की योजना तैयार कर ली है, जो पहले चरण के फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की मंजूरी) के लिए वन विभाग को भेजी जा रही है। कंपनी को खदान तक पानी ले जाने की मंजूरी मिल चुकी है और बिजली पहुंचाने पर भी काम चल रहा है। कंपनी ने दिसंबर 2019 में सबसे अधिक (30.5 फीसद की हिस्सेदारी और 11.50 फीसद रॉयल्टी) की बोली लगाकर यह खदान 50 साल के लिए लीज पर ली है। कंपनी ने परियोजना के तहत किए जा रहे कामों को लेकर खनिज साधन मंत्री ब्रजेंद्र सिंह यादव के सामने प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें बताया कि कंपनी तय समय से पहले खदान से खनन शुरू कर देगी। इससे पहले की तैयारी के लिए कंपनी को पांच साल (वर्ष 2024) का समय दिया गया था। विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने बताया कंपनी ने भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण से सर्वे करा लिया है।

15 गुना अधिक हीरों का भंडार: अभी तक पन्ना जिला हीरा के लिए विश्वविख्यात था, लेकिन अब छतरपुर जिले बकस्वाहा में पन्ना से करीब 15 गुना अधिक और शानदार क्वालिटी के हीरा भंडार खोज लिए गए हैं। छतरपुर जिले के बकस्वाहा विकासखंड में करीब 10 साल पहले ऑस्ट्रेलियन कंपनी रियो-टिंटो ने यहां सर्वेक्षण के दौरान हीरा के अथाह भंडार होने की रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। सर्वेक्षण प्रोजेक्ट के बाद अब यहां पर हीरा उत्खनन का काम आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज कंपनी को दिया गया है। बकस्वाहा में फिलहाल 3.42 करोड़ कैरेट हीरा होने का अनुमान है।

करीब 5 करोड़ कैरेट हीरा होने की संभावना: छतरपुर और पन्ना जिले में अभी तक करीब 20 से 30 लाख कैरेट हीरे की खोज की जा चुकी है। ऑस्ट्रेलियन कंपनी रियो-टिंटो ने अपने सर्वेक्षण प्रोजेक्ट में बकस्वाहा के बंदर प्रोजेक्ट में 3.42 करोड़ कैरेट हीरा होने की रिपोर्ट शासन को दी है। डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में समय-समय पर आयोजित हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में विषय विशेषज्ञ द्वारा जो शोध- पत्र प्रस्तुत किए हैं इनमें पन्ना जिले के मझगवां, सकरिया, रमखिरिया, छतरपुर जिले के बकस्वाहा, सगोरिया, अनगौर सहित अन्य स्थानों पर करीब 5 करोड़ कैरेट से अधिक हीरा होने का अनुमान है।

भारत में वर्तमान में केवल पन्ना और छतरपुर में ही हीरे की खाने हैं। जो भारतीय खनिज विकास निगम के अंतर्गत हीरा उत्पादन के कार्य से जुड़ी हैं। अब इन खदानों का भी निजीकरण कर 55,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के हीरे निकालने की योजना बनाई जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई कंपनी रियो-टिंटों इन क्षेत्रों की 490 हेक्टेयर भूमि में हीरा उत्खनन की तैयारी में है। हालांकि अकेले छतरपुर में ही निगम ने 958 हेक्टेयर क्षेत्र में हीरा होने की उम्मीद जताई है। पहले आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और कुलूर की खानों से भी हीरे निकाले।

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को जल्द ही अब पूरे विश्व में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। छतरपुर जिले के बकस्वाहा में मिले जेम क्वालिटी (सबसे उत्तम) के हीरों के अथाह भंडार में जल्द ही खनन शुरू हो सकती है। एक्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने खनन की योजना तैयार कर ली है, जो पहले चरण के फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की मंजूरी) के लिए वन विभाग को भेजी जा रही है। कंपनी को खदान तक पानी ले जाने की मंजूरी मिल चुकी है और बिजली पहुंचाने पर भी काम चल रहा है।

कंपनी ने दिसंबर 2019 में सबसे अधिक (30.5 फीसद की हिस्सेदारी और 11.50 फीसद रॉयल्टी) की बोली लगाकर यह खदान 50 साल के लिए लीज पर ली है। कंपनी ने परियोजना के तहत किए जा रहे कामों को लेकर खनिज साधन मंत्री ब्रजेंद्र सिंह यादव के सामने प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें बताया कि कंपनी तय समय से पहले खदान से खनन शुरू कर देगी। इससे पहले की तैयारी के लिए कंपनी को पांच साल (वर्ष 2024) का समय दिया गया था। विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने बताया कंपनी ने भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण से सर्वे करा लिया है।

15 गुना अधिक हीरों का भंडार: अभी तक पन्ना जिला हीरा के लिए विश्वविख्यात था, लेकिन अब छतरपुर जिले बकस्वाहा में पन्ना से करीब 15 गुना अधिक और शानदार क्वालिटी के हीरा भंडार खोज लिए गए हैं। छतरपुर जिले के बकस्वाहा विकासखंड में करीब 10 साल पहले ऑस्ट्रेलियन कंपनी रियो-टिंटो ने यहां सर्वेक्षण के दौरान हीरा के अथाह भंडार होने की रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। सर्वेक्षण प्रोजेक्ट के बाद अब यहां पर हीरा उत्खनन का काम आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज कंपनी को दिया गया है। बकस्वाहा में फिलहाल 3.42 करोड़ कैरेट हीरा होने का अनुमान है।

करीब 5 करोड़ कैरेट हीरा होने की संभावना: छतरपुर और पन्ना जिले में अभी तक करीब 20 से 30 लाख कैरेट हीरे की खोज की जा चुकी है। ऑस्ट्रेलियन कंपनी रियो-टिंटो ने अपने सर्वेक्षण प्रोजेक्ट में बकस्वाहा के बंदर प्रोजेक्ट में 3.42 करोड़ कैरेट हीरा होने की रिपोर्ट शासन को दी है। डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में समय-समय पर आयोजित हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में विषय विशेषज्ञ द्वारा जो शोध- पत्र प्रस्तुत किए हैं इनमें पन्ना जिले के मझगवां, सकरिया, रमखिरिया, छतरपुर जिले के बकस्वाहा, सगोरिया, अनगौर सहित अन्य स्थानों पर करीब 5 करोड़ कैरेट से अधिक हीरा होने का अनुमान है।

भारत में वर्तमान में केवल पन्ना और छतरपुर में ही हीरे की खाने हैं। जो भारतीय खनिज विकास निगम के अंतर्गत हीरा उत्पादन के कार्य से जुड़ी हैं। अब इन खदानों का भी निजीकरण कर 55,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के हीरे निकालने की योजना बनाई जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई कंपनी रियो-टिंटों इन क्षेत्रों की 490 हेक्टेयर भूमि में हीरा उत्खनन की तैयारी में है। हालांकि अकेले छतरपुर में ही निगम ने 958 हेक्टेयर क्षेत्र में हीरा होने की उम्मीद जताई है। पहले आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और कुलूर की खानों से भी हीरे निकाले

बुंदेलखंड में ही हीरा क्यों: देश में सर्वाधिक हीरा बुंदेलखंड में पाए जाने की संभावना है। इस संबंध में महाराजा कॉलेज के भू-गर्भ विज्ञान में पदस्थ प्रोफेसर डॉ.पीके जैन ने बताया कि हीरा हाइटेम्परेचर पर कार्बन क्रिस्टालाइजेशन की प्रक्रिया है। बुंदेलखंड में किम्बरलाइट रॉक में चुंबकीय दवाब और हाइटेम्परेचर के कारण हीरा बना है। विश्व की सबसे कठोर और पुरानी चट्टानों पर बुंदेलखंड है। यहां पर इस कारण हीरा के बड़ा भंडार होने की संभावना है। बकस्वाहा के अलावा छतरपुर जिले में अनगौर में भी हीरा व अन्य खनिज संपदा के बड़े भंडार की संभावना है। वर्ष 1978 में अनगौर में भी हीरा के भंडार खोजे गए थे।

पन्ना के 70 किलोमीटर क्षेत्र में फैली है हीरा धारित पट्टी पन्ना जिले में हीरा धारित पट्टी का विस्तार लगभग 70 किमी है, जो पहाड़ीखेरा से लेकर मझगवां तक फैली है। इस हीरा धारित पट्टी की चौड़ाई 30 किमी है। हीरे के प्राथमिक स्नोतों में मझगवां किंबर लाइट, पाइप व हिनौता किंबर लाइट पाइप पन्ना जिले में ही स्थित है। शहर के दक्षिण-पश्चिम में 20 किमी की दूरी पर है।

मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं हीरे का निर्माण पृथ्वी की सतह से 250- 300 किमी नीचे होता है। जो भारी तापमान व दबाव में हीरे के रूप में क्रिस्टलित होता है। तदोपरांत वेगवान मैग्मा लावा द्वारा ज्वालामुखी चट्टानों के माध्यम से भूपृष्ठ पर आता हैं। जहां किंबर लाइट चट्टान कहलाता है, मुख्यत: किंबर लाइट चट्टान में ही हीरा खनिज पाया जाता है। हीरों को प्राय एक कैरेट अर्थात 200 सेंट में मापा जाता है। मुख्य गुण जैसे रंग स्वच्छता कट व वजन के अनुसार प्रत्येक हीरे का मूल्यांकन किया जाता है। इन गुणों के आधार पर मुख्यत: तीन श्रेणियों उज्जवल, मैलो, मट्ठो में आता है।

छह दशक पूर्व मिला था अब तक का सबसे बड़ा हीरा पन्ना जिले के इतिहास में साठ वर्ष पूर्व सबसे बड़ा 44.5 कैरेट का हीरा मिला था। दो वर्ष पूर्व दूसरा बड़ा 42.59 कैरेट वजन वाला नायाब हीरा मिला था, जो खुली नीलामी में 2 करोड़ 55 लाख रुपये में बिका है। इसके बीच में जो हीरे मिले वह उक्त दोनों हीरों के वजन से कम के ही मिले हैं। उल्लेखनीय है कि हीरों की नीलामी सिर्फ पन्ना और मुंबई में होती है।

उज्जैन के विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञान के प्रो. पीके वर्मा ने बताया कि बुंदेलखंड में डायमंड के लिए अभी और शोध की जरूरत बुंदेलखंड में निजी कंपनियों ने डायमंड खोजने को लेकर काम किया है वह अभी पर्याप्त नहीं है। यहां अभी सरकारी प्रयास नहीं हुए हैं। बकस्वाहा में ऑस्ट्रेलियन कंपनी ने सर्वे का काम किया है। पन्ना में भी कई दशक पहले सर्वे कार्य हुआ था। जियोग्राफिकल सिचयुरेशन को देखा जाए तो बुंदेलखंड में डायमंड के अपार भंडार हो सकते हैं। 

पन्ना डायमंड प्रोजेक्ट 275 हेक्टेयर में संचालित होता है। इस क्षेत्र में से केवल 16 हेक्टेयर की खदान ही संचालित हो रही है। खदान को यदि 10 हेक्टेयर का चौड़ीकरण कर दिया जाए तो यहां अभी हीरा का अपार भंडार है। हालांकि एक जनवरी 2021 से बंद है। इसे दोबारा चालू किया जाना चाहिए।

समर बहादुर सिंह, महामंत्री, एमपी राष्ट्रीय हीरा खनिज मजदूर संघ

हीरा आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी मिल रहा है, लेकिन जो क्वालिटी और भंडार बुंदेलखंड में संभावित हैं उसके लिए शासन को सर्वेक्षण के लिए अभी और प्रयास करना चाहिए। इसके लिए हमें सर्वेक्षण भी बड़े और आधुनिक स्तर से करना होगा।

प्रो. आदिल, भू गर्भ विज्ञानी, डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर

20 देशों में निकलता है हीरा

  • भारत के अलावा दुनिया के 20 अन्य देशों में भी हीरे की खदानें हैं।
  • पंद्रहवीं शताब्दी तक हीरों के गहने केवल राजा-महाराजाओं के उपयोग तक सीमित थे।
  • यूरोपीय देशों में फ्रांस ही एकमात्र ऐसा देश था, जो आधुनिक फैशन और आभूषण अपनाने में अव्वल था।
  • सन 1734 में यहीं की ऐगंस सोरल नाम की धनाढ्य महिला ने हीरे के गहने पहनकर राजा-महाराजाओं के मिथक को तोड़ने का दुस्साहस कर तहलका मचाया।
  • भारत लगातार तीन सौ साल तक इन देशों में हीरों की आर्पूित करता रहा।