रिटायर हुए चीफ जस्टिस बोबडे, कहा- संतोषजनक रहा कार्यकाल, मैंने अपना बेहतर किया

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए चीफ जस्टिस बोबडे

जस्टिस बोबडे ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐतिहासिक अयोध्या मामलों समेत कई मुद्दों को सुलझाया। उन्होंने 47वें CJI के तौर पर नंवबर 2019 में शपथ लिया था और आज रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने महामारी के दौरान भारतीय कानून व्यवस्था का नेतृत्व किया।

नई दिल्ली, प्रेट्र। चीफ जस्टिस (CJI) शरद अरविंद बोबडे  ने शुक्रवार को बताया कि वो खुशी, गुडविल व अच्छी यादों के साथ सुप्रीम कोर्ट से बाहर निकले। जस्टिस बोबडे  ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐतिहासिक अयोध्या मामलों समेत कई मुद्दों को सुलझाया। उन्होंने  47वें CJI के तौर पर नंवबर 2019 में शपथ लिया था और आज रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने महामारी के दौरान भारतीय कानून व्यवस्था का नेतृत्व किया।

आज अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कोविड-19 हालात पर सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि अपने इस अंतिम सुनवाई मं मिला-जुला अनुभव है। देश के चीफ जस्टिस पद की कमान जस्टिस एनवी रमना को सौंपने से पहले बोबडे ने कहा, 'इस अंतिम सुनवाई के दौरान मन में मिला जुला अहसास है। मैं पहले भी बेंच में रह चुका हूं, लेकिन ये भावनाएं इतनी मिली-जुली हैं कि मैं कुछ भी साफ तौर पर नहीं कह पा रहा हूं।'

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि  CJI का कार्यकाल 3 साल का होना चाहिए। 'मार्च 2020 में दुनिया कोविड-19 के चपेट में आ गई। सुप्रीम कोर्ट को भी फैसला लेना पड़ा था, ऐसा लगा कि कोर्ट बंद हो जाएगा। लेकिन तब CJI बोबडे ने मौके का सही फैसला लिया और वर्चुअल सुनवाई की शुरुआत की। इस मोड के जरिए कारब 50 हजार मामलों की सुनवाई की गई। यह बहुत बड़ी उपलब्धि रही।' सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि  CJI बोबडे केवल बेहतरीन और मेधावी जज ही नहीं बल्कि बेहतर और अच्छे इंसान भी हैं। 

24 अप्रैल 1956 को नागपुर में जन्मे जस्टिस बोबडे ने बैचलर ऑफ आर्ट्स और एलएलबी की डिग्री नागपुर यूनिवर्सिटी से हासिल की। 1978 में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र में उनका नाम दर्ज हुआ। जस्टिस बोबडे ने बॉम्बे हाईकोट के नागपुर बेंच के साथ प्रैक्टिस की। वर्ष 1998 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया। 29 मार्च 2000 को उनकी पदोन्नति हुई और वे एडिशनल जज बने। 16 अक्टूबर 2012 को उन्होंने मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। 12 अप्रैल 2013 को वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने।