कोरोना की रफ्तार के बीच दिल्ली, महाराष्ट्र में वैक्सीन की कमी! कई शहरों में ठप हुए वैक्सीनेशन सेंटर


... बंद हो गए हैं वैक्सीनेशन सेंटर

संक्रमण के दूसरी लहर के चपेट में महाराष्ट्र के वैक्सीनेशन सेंटरों को बंद किया जा रहा है क्योंकि यहां कोविड-19 वैक्सीन की पर्याप्त खुराकें मौजूद नहीं है। इस क्रम में ओडिशा झारखंड व अन्य कई राज्य शामिल हैं।

नई दिल्ली, रॉयटर्स। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से बचाव के लिए संघर्ष कर रहे देश के कई राज्यों में कोविड-19 वैक्सीन की कमी रिपोर्ट की जा रही है। यहां तक कि कई राज्यों में आधे से अधिक वैक्सीनेशन सेंटरों को बंद कर दिया गया है। अनेकों राज्य में युवाओं के वैक्सीनेशन पर भी जोर दिया जा रहा है। देेश के संक्रमित राज्यों में महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में वैक्सीन के स्टॉक में आई कमी को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में हैं।

इस बीच स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन व सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने महाराष्ट्र सरकार की वैक्सीन की कमी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य अपनी कमियों को छिपाने के लिए दहशत का माहौल खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। वैक्सीन की कमी और 18 साल से अधिक उम्र के सभी युवाओं को टीका लगाने की मांग संबंधी बयान इसी सिलसिले दिए जा रहे हैं।

दिल्ली में केवल 4-5 दिन का ही वैक्सीन का स्टॉक

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अब जो वैक्सीन का स्टॉक है वह केवल अगले 4-5 दिनों तक का ही है। उन्होंने उम्मीद जताई और कहा कि वैक्सीन की मांग की गई है और यह हमें मिल जाएगी।

झारखंड ने मांगी वैक्सीन की खेप  

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने गुरुवार को राज्य में कोविड-19 वैक्सीन की कमी की बात कही। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'अगले एक-दो दिनों के लिए हमारे पास वैक्सीन का स्टॉक है। हमने केंद्रीय गृह मंत्री से वैक्सीन की मांग की है और उम्मीद है कि वे इसे पूरा करेंगे।' 

महाराष्ट्र में नहीं है वैक्सीन की पर्याप्त खुराकें

देश के कई राज्यों में चलने वाले वैक्सीन केंद्रों में वैक्सीन की कमी रिपोर्ट की जा रही है। इसमें संक्रमण से सबसे अधिक बेहाल राज्य महाराष्ट्र भी शामिल है जहां हर रोज आने वाले नए मामलों का आंकड़ा 50 हजार से अधिक है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, 'महाराष्ट्र की आधी जनसंख्या के बराबर गुजरात है। गुजरात को अब तक 1 करोड़ वैक्सीन की खुराक दी गई है जबकि हमें केवल 1.04 लाख वैक्सीन की खुराक दी गई।' स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'राज्य में केवल तीन दिन के लिए 14 लाख वैक्सीन बचे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैक्सीन की कमी के कारण कई वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़ रहे हैं। इसीलिए उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द से जल्द वैक्सीन के 40 लाख डोज उपलब्ध कराने की मांग की है।  

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने भी केंद्र से मांगी वैक्सीन

तेलंगाना में कोविड-19 वैक्सीन का काफी कम स्टॉक बचा है। राज्य स्वास्थ्य मंत्री ई. राजेंद्र के अनुसार केंद्र से कोरोना वैक्सीन की अतिरिक्त डोज की मांग की गई है। वहीं आंध्र प्रदेश ने केंद्र सरकार से वैक्सीन के एक करोड़ डोज की मांग की है।

ओडिशा में बंद हो गए वैक्सीनेशन सेंटर

ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर वैक्सीन के लिए अपनी मांग रखी है। राज्य सरकार के अनुसार, उनके पास केवल तीन दिन का स्टॉक है। ओडिशा ने केंद्र से कहा है कि राज्य को 15 से 20 लाख कोविशील्ड की डोज उपलब्ध कराई जाए। ओडिशा का कहना है कि राज्य में आधे वैक्सीनेशन सेंटर बंद हो चुके हैं।  

आज आए 1,26,789 नए मामले

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार सुबह संक्रमण के 1,26,789 नए मामले दर्ज किए गए। रोज आने वाले नए मामलों का आंकड़ा पहली बार इसी सोमवार को 1 लाख के पार गया और लगातार तीसरे दिन भी 1 लाख 26 हजार से अधिक नए मामले रिकॉर्ड किए गए। पिछले साल की महामारी के पहली लहर की तुलना में इस साल की दूसरी लहर काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का आरोप है कि लोगों की लापरवाही के कारण संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। इस क्रम में न्यूजीलैंड ने दो सप्ताह के लिए भारत से आने वाले यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। 

 विपक्षी पार्टियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दूसरे देशों को वैक्सीन सप्लाई किए जाने के फैसले की निंदा की जा रही है। इनका कहना है कि अपने देश में वैक्सीन की कमी होने के बावजूद दूसरे देशों को वैक्सीन की बड़ी खेप भेजा जाना गलत है। बता दें कि  भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका शॉट के निर्माण के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने को लेकर 30 बिलियन रुपये की मांग की है। बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ने  देश में 88 मिलियन वैक्सीन की खुराक का 90 फीसद सप्लाई किया है। भारत (India) में सरकार के संस्थान व भारत बायोटेक द्वारा स्वदेश में विकसित वैक्सीन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है जो अपने आउटपुट को मजबूती प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रही है।