पहले कोरोना संक्रमित हो चुके युवाओं को दोबारा इंफेक्शन का है खतरा, नहीं हैं पूरी तरह सुरक्षित; लैंसेट के शोध में दावा

 

युवा लोगों में दोबारा कोरोना संक्रमित होने का खतरा। (फोटो: दैनिक जागरण)

द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अवलोकन अध्ययन के अनुसार जो युवा लोग कोरोना से पहले संक्रमित हो चुके हैं उनमें दोबारा संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। वह पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते हैं। वैक्सीनेशन ही इसका एक उपाय है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप के साथ-साथ इससे जुड़े खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना वायरस लगातार अपना रूप बदलकर दुनियाभर में कहर बरपा रहा है। इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक नया शोध सामने आया है। ये शोध युवाओं में कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर किया गया है। इस शोध के मुताबिक, जो युवा पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं उन्हें दोबारा इंफेक्शन(रिइंफेक्शन) का खतरा बना रहता है। कोरोना से पहले ही संक्रमित हो जाने से वे दोबारा संक्रमण के खिलाफ सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं।

द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अवलोकन अध्ययन के अनुसार, एक पिछला कोरोना वायरस संक्रमण पूरी तरह से युवा लोगों को दोबारा इंफेक्शन(रीइन्फेक्शन) से बचाता नहीं है। इस शोध में बताया गया है कि प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती देने और कोरोना के प्रसार को कम करने के लिए युवा लोगों के लिए टीकाकरण अभी भी आवश्यक है।

अध्ययन में क्या निष्कर्ष निकला ?

यह शोध यूएस मरीन कॉर्प्स के 3,000 से अधिक स्वस्थ सदस्यों पर किया गया था, जिनमें से अधिकांश 18 से 20 वर्ष के थे। अमेरिका में माउंट सिनाई के इकाॅन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को जहां भी संभव हो टीका लगवाना चाहिए।उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले संक्रमण और एंटीबॉडी की मौजूदगी के बावजूद प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देने, पुन: संक्रमण को रोकने, संचरण को कम करने के लिए टीकाकरण अभी भी आवश्यक है।

आइकाहा स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर स्टुअर्ट सीलफॉन ने कहा कि वैक्सीन आने के बाद भी कोरोना का गति पकड़ना जारी रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले से कोरोना संक्रमित होने के बावजूद, युवा फिर से वायरस से संक्रमित हो सकता हैं और इसे दूसरों तक पहुंचा सकते हैं।

कैसे हुआ शोध ?

मई और नवंबर 2020 के बीच किए गए अध्ययन में 189 प्रतिभागियों में से लगभग 10 प्रतिशत या 19 जो पहले कोरोना संक्रमित (सेरोपोसिटिव) थे, दोबारा संक्रमित हो गए। यह प्रतिभागियों के 50 प्रतिशत (2,247 में से 1,079) नए संक्रमणों की तुलना में था जो पहले संक्रमित (सेरोनेगेटिव) नहीं थे। हालांकि अध्ययन युवा, फिट, ज्यादातर पुरुष मरीन रंगरूटों में था, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि उनके अध्ययन में पाया जाने वाला पुनर्निरीक्षण का जोखिम कई युवाओं पर लागू होगा।