शरीर की बनावट बताएगी किस खेल में पदक लाएगा खिलाड़ी

 

केंद्र सरकार की ओर से 35 लाख रुपये की ग्रांट भी रिसर्च के लिए दी गई थी।

 टैलेंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम इन स्पोर्ट्स (टिस) रिसर्च के तहत दो मॉडल विकसित किए गए हैं जिससे शारीरिक बनावट और विशेष अनुवांशिक विशेषताओं से यह तय किया जाएगा कि कौन सा खिलाड़ी किस खेल का महारथी बनेगा।

ग्वालियर,  कौन सा खिलाड़ी किस खेल में पदक जीत सकता है या यूं कहें कि आगे जा सकता है, यह पहले ही पता चल जाएगा। ग्वालियर स्थित लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन (एलएनआइपीई) के पूर्व वाइस चांसलर (अब श्रीश्री अनुरुद्ध देव स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी असम के कुलपति) डा. जेपी वर्मा ने एक अनोखी रिसर्च की है जिसका फायदा देश को मिलेगा।

टैलेंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम इन स्पोर्ट्स (टिस) रिसर्च के तहत दो मॉडल विकसित किए गए हैं, जिससे शारीरिक बनावट और विशेष अनुवांशिक विशेषताओं से यह तय किया जाएगा कि कौन सा खिलाड़ी किस खेल का महारथी बनेगा। अच्छी बात यह है कि आर्मी ब्वॉयज कैंप और स्पोर्ट्स अथॉरिटी के 2000 बच्चों पर यह रिसर्च की गई, जिसमें सफलता मिली है। इसमें फोनोटाइप कैरेक्टर (अनुवांशिक गुणों को पता लगाने की प्रक्रिया) का उपयोग किया जाता है, जिसमें अंगूठे व बीच की अंगुली का साइज, बनावट व रेखाओं के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया। लंबी प्रक्रिया के बाद अब यह मॉडल बनकर तैयार हो चुका है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 35 लाख रुपये की ग्रांट भी रिसर्च के लिए दी गई थी। जल्द ही इसका प्रयोग खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया में उपयोग किया जा सकेगा है। इसका फायदा ओलंपिक के लिए खिलाड़ी तैयार करने के लिए भी हो सकेगा।

स्पोर्ट्स स्पेसेफिक फिटनेस पैरामीटर

इसमें खिलाड़ी के शरीर की बनावट के आधार पर यह देखा जाता है कि उसका शरीर कितना लचीला, कठोर, शरीर का कौन सा हिस्सा अधिक लचीला या आगे-पीछे के लिए फोर्स करता है। जैसे तैराक का शरीर आगे की तरफ फोर्स करना चाहिए। उसी आधार पर चयन होना चाहिए।

जेनेटिक मॉडल

इसमें खिलाड़ी की अंगूठे की रेखाएं बतातीं हैं कि यह एथलेटिक्स में अच्छा करेगा। इसी तरह बीच की अंगुली की रेखाओं से यह पता चलता है कि कौन सा खिलाड़ी जिमनास्टिक्स, कुश्ती, बास्केटबॉल आदि खेलों में महारथ हासिल करेगा।

डा. प्रेमचंद कश्यप, सेवानिवृत्त एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, साई

लोगों की दो सोच हैं एक तो यह कि चैंपियन पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते। दूसरी यह कि चैंपियन पैदा नहीं होते बनाए जाते हैं। मगर टैलेंट आइडेंटीफिकेशन सिस्टम इन स्पोर्ट्स मॉडल इस थीम पर तैयार हुआ है कि चैंपियन पैदा होते हैं और उन्हें तराशने की जरूरत है। यह प्रोजेक्ट मेरे सामने ही तैयार हुआ है। यह मॉडल पूरी तरह से साइंटिफिक है। इसमें खेल मंत्रलय की ओर से मदद भी दी गई थी।

जेपी भुखर, रजिस्ट्रार, सेंट्रल यूनिवर्सटिी, हरियाणा

यह मॉडल बताता है कि बच्चे की शारीरिक बनावट और अनुवांशिक गुण किस खेल के लिए उपयुक्त हैं। खेल संस्थान इन्हें पहचानकर उन्हें उस खेल के लिए तराश सकते हैं। रिसर्च आधारित इस मॉडल से अच्छे खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिलेगी। 

प्रो. डा. जेपी वर्मा, पूर्व वाइस चांसलर, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक प्रशिक्षण केंद्र

एक विशेष दिन बेहतर प्रदर्शन करने वाला ही बेहतर खिलाड़ी नहीं हो सकता। उसमें अनुवांशिक गुण व शारीरिक बनावट भी खेल के अनुरूप होना चाहिए। टिस मॉडल इसी चयन प्रक्रिया पर आधारित है। इस रिसर्च को पेटेंट के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।