झारखंड हाई कोर्ट ने कहा- रिम्स में सीटी स्कैन मशीन नहीं होना शर्म की बात

 

RIMS Ranchi News, Jharkhand Samachar हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार शपथ पत्र-शपथ पत्र खेल रही है।

मुूख्‍य न्‍यायाधीश डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि लोग मर रहे हैं लेकिन किसी को कोई परवाह नहीं है और सरकार शपथ पत्र-शपथ पत्र खेल रही है।

रांची, राज्य ब्यूरो।  झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और इमरजेंसी जैसे हालात हो गए हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी रिम्स में अब तक सीटी स्कैन मशीन नहीं खरीदी जा सकी है। इस मामले में सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है। रिम्स और सरकार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। यह कहीं से भी उचित नहीं है। चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिम्स में अपनी सीटी स्कैन मशीन नहीं होना शर्म की बात है।

लोग मर रहे हैं, लेकिन किसी को कोई परवाह नहीं है और सरकार शपथ पत्र-शपथ पत्र खेल रही है। अदालत ने तत्काल रिम्स निदेशक को सीटी स्कैन मशीन खरीदने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने का निर्देश दिया और राज्य सरकार को इस पर अविलंब कार्रवाई करने को कहा। इस मामले में अब नौ अप्रैल को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है और यहां आवश्यक जांच मशीनें नहीं हैं। यह इस राज्य के लिए शर्म की बात है।

ऐसे में कल्याणकारी राज्य कहा जाना समझ से परे है। जब अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इमरजेंसी जैसे हालात हैं। ऐसे में रिम्स में कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए आवश्यक मशीनों की खरीदारी जल्द से जल्द की जाए। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी मशीनों की खरीदारी नहीं हो पाई है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि दो सप्ताह में रिम्स में सीटी स्कैन मशीन की खरीदारी की जाए। क्योंकि कोरोना संक्रमण की जांच में सबसे पहले इसी मशीन की जरूरत पड़ती है।

इस दौरान रिम्स निदेशक ने अदालत को बताया कि उन्होंने आवश्यक उपकरणों की खरीदारी के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि इस मामले में कोई तो झूठ बोल रहा है। जब कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया था कि इमरजेंसी हालात में होने वाली खरीदारी के तहत रिम्स में जांच उपकरणों की खरीदारी की जाए, तो अभी तक इसकी खरीदारी क्यों नहीं की गई है।

अदालत ने कहा कि अब कितने लोगों के मरने का इंतजार किया जाएगा। इस प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति बहुत ही खराब है। ऐसे में कल्याणकारी प्रदेश कहा जाना कितना जायज है। अधिकारी सांप सीढ़ी का खेल खेल रहे हैं। कोर्ट के आदेश को अधिकारी मजाक में ले रहे हैं। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने अदालत को बताया कि रांची में अभी कोरोना के करीब 4100 एक्टिव केस हैं।

रिम्स के निदेशक खरीद समिति के चेयरमैन होते हैं और उनको ही मशीनों की खरीदारी का प्रस्ताव भेजना है। इसके बाद कैबिनेट से सहमति लेकर मशीनों की खरीदारी की जा सकती है। इस पर अदालत ने कहा कि कोर्ट रिम्स को सभी संसाधनों से मजबूत करना चाहती है, ताकि इलाज में किसी को कोई दिक्कत नहीं हो। सुनवाई के दौरान रिम्स निदेशक, स्वास्थ्य सचिव, वित्त सचिव अदालत में ऑनलाइन हाजिर हुए थे।