अमेरिका ने ग्वांतानामो बे स्थित गुप्त कैदखाने पर लगाया ताला, जानें- यहां किन्हें रखा गया

 

अमेरिका ने ग्वांतानामो बे स्थित गुप्त कैदखाने पर लगाया ताला, जानें- यहां किन्हें रखा गया

सजा काट रहे कैदी दूसरी जेल में स्थानांत। इससे पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उनका इरादा ग्वांतानामो बे में स्थित इस जेल को बंद करने का है लेकिन इसके लिए कुछ कैदियों को सुनवाई या कारावास की सजा देने के लिए संसद से मंजूरी की आवश्यकता होगी।

वाशिंगटन, एपी। अमेरिका ने ग्वांतानामो बे जेल की एक सीक्रेट यूनिट (कैंप-7) को बंद कर दिया है। यहां सजा काट रहे कैदियों को क्यूबा में एक अन्य अमेरिकी बेस पर स्थित जेल में भेज दिया गया है। यह जानकारी अमेरिकी सेना ने दी है। बता दें कि कैंप-7 को बेहद ही गुप्त कैदखाना माना जाता है। कुछ मीडिया रिपो‌र्ट्स में दावा किया गया है कि यहां दुनिया के कुछ सबसे खूंखार चरमपंथियों को रखा गया है।

अमेरिका के दक्षिणी कमान एक बयान में कहा, कैंप-7 में बंद कैदियों को इसके पास में स्थित एक अन्य जेल में भेज दिया गया है। इसके पीछे की वजह ऑपरेशनल योग्यता और प्रभावशीलता को बढ़ाना है। मियामी स्थित दक्षिणी कमान ने ये नहीं बताया कि नई जेल में कितने कैदियों को रखा गया है। इस कमान की विदेशी जेल क्यूबा के दक्षिण-पूर्वी किनारे पर स्थित है। अधिकारियों ने बताया कि कैंप-7 में 14 लोगों को कैद करके रखा गया था। वहीं, ग्वांतानामो जेल में 40 कैदी हैं। बता दें कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उनका इरादा ग्वांतानामो बे में स्थित इस जेल को बंद करने का है, लेकिन इसके लिए कुछ कैदियों को सुनवाई या कारावास की सजा देने के लिए संसद से मंजूरी की आवश्यकता होगी।

वर्ष 2006 में खोला गया कैंप 7

दिसंबर 2006 में पहली बार कैंप-7 को खोला गया था। इसके खोलने के पीछे की मंशा यहां सीआइए के गुप्त हिरासत केंद्रों के नेटवर्क में बंद कैदियों को रखना था। कैंप-7 को ब्लैक साइट्स कहा जाता है, जहां कैदियों के साथ कथित रूप से क्रूर तरीके से पूछताछ की जाती है।

कैंप-7 की लोकेशन को नकारती रही है सेना

कैंप-7 को सेना सीआइए संग हुए एक समझौते के तहत चलाती है। दक्षिणी कमान ने कहा कि कैदियों को ट्रांसफर करने के दौरान खुफिया एजेंसी ने भी मदद की। सेना लंबे समय तक कैंप-7 की लोकेशन को स्वीकार करने से इन्कार करती रही है।कैंप-7 में पांच कैदियों को रखा गया है, जिन पर 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों के लिए मदद करने का आरोप है।