आज ही के दिन बनी थी बिहार की पहली निर्वाचित सरकार, कांग्रेस ने मोहम्‍मद युनूस का किया था जोरदार विरोध

 

सन 1937 में बनी सरकार का बाढ़ के किसानों ने किया था स्‍वागत। साभार: इंटरनेट मीडिया

कांग्रेस ने किया था बिहार की पहली निर्वाचित सरकार का जोरदार विरोध मोहम्‍मद युनूस के नेतृत्‍व में सरकार बनाए जाने के अगले ही दिन किया था बिहार बंद का आह्वान जय प्रकाश नारायण ने भी की थी कड़ी आलोचना

पटना, बिहार ऑनलाइन डेस्‍क। आधुनिक भारत के इतिहास में बिहार सहित ब्रिटिश शासित सभी तत्‍कालीन 11 प्रांतों में चुनाव की परंपरा ब्रिटिश राज के दौरान ही शुरू हो गई थी। सन 1937 में पहली बार अंग्रेजी हुकूमत ने प्रांतीय स्तर पर चुनाव संपन्न कराए। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भारत में कुल 11 प्रांत हुआ करते थे। इनमें से एक बिहार भी था। 1937 के चुनाव के बाद बिहार में मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद यूनुस ने सरकार बनाई। उन्होंने 1 अप्रैल 1937 को बिहार के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। तब प्रांतीय सरकार के मुखिया को प्रधानमंत्री ही कहा जाता था। आजादी के बाद भारतीय संव‍िधान के अनुसार 1950 में चुनाव हुए तो प्रांतीय सरकार के प्रधान को मुख्‍यमंत्री पदनाम दिया गया। प्रदेश में पहली निर्वाचित सरकार के गठन का कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया था।

जय प्रकाश नारायण ने की थी मोहम्‍मद युनूस की आलोचना

कांग्रेस के युवा नेता जयप्रकाश नारायण ने मोहम्मद युनूस द्वारा सरकार बनाने का आमंत्रण स्वीकार करने के लिए कड़ी आलोचना की थी। गौरतलब है कि इस चुनाव में बिहार में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत से कई मुद्दों पर मतभेद की वजह से कांग्रेस ने देश की किसी भी प्रांत में सरकार बनाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद अंग्रेज गवर्नर ने दूसरी पार्टियों को सरकार बनाने के लिए न्योता दिया था। इसी वजह से मोहम्मद यूनुस को बिहार का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। उनकी सरकार बनने के अगले ही दिन कांग्रेस की ओर से बिहार बंद का आह्वान किया गया। कांग्रेस अल्‍पमत वाले दल को सरकार बनाने के लिए न्‍योता देने से  नाराज थी।

मुसलमानों के लिए आरक्षित आधी  सीटें जीत गई थी युनूस की पार्टी

बिहार में अल्‍पमत की सरकार के विरोध में कांग्रेस की ओर से बुलाई गई हड़ताल काफी असरदार रही। हड़ताल के दौरान फ्रेजर रोड स्थित मोहम्मद युनूस के आवास के सामने से कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था था कि अल्पमत वाली पार्टी को सरकार बनाने का मौका देना उचित नहीं है। आजादी की लड़ाई से परेशान ब्रिटिश हुकूमत ने प्रांतीय स्‍तर पर स्‍थानीय स्‍वशासन को बढ़ावा देने के लिए चुनाव कराने शुरू किए थे। इसके लिए 1936 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्‍ट बनाया गया। तब बिहार के चुनाव में 40 सीटें मुसलमानों के लिए आरक्षित रखी गई थी इनमें से 20 सीटों पर मोहम्मद यूनुस की पार्टी मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी ने जीत हासिल की थी। मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों में से केवल 4 सीटें ही कांग्रेस जीत पाई।

कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे युनूस

मोहम्मद यूनुस ने कांग्रेस के साथ मिलकर भी सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि उनकी पार्टी ही बिहार में मुसलमानों की असली प्रतिनिधि है। इसलिए उनकी पार्टी का सरकार में रहना जरूरी है। हालांकि कांग्रेस इस पर राजी नहीं हुई। करीब 3 महीने के बाद के बाद मोहम्मद यूनुस की अल्पमत वाली सरकार को जाना पड़ा। उसके बाद कांग्रेस के श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में सरकार बनी। इस सरकार में डॉ. एएन सिन्हा उप प्रधानमंत्री बनाए गए। मोहम्मद युनूस के बेटे बैरिस्टर मोहम्मद यासीन युनूस ने कहा था कि कांग्रेस हठधर्मी रवैये की वजह से ही पाकिस्तान की नींव पड़ी। अगर कांग्रेस सरकार में मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी को भी शामिल कर लेती तो शायद ऐसा नहीं होता।

आजादी के बाद तैयार भारतीय इतिहास में नहीं मिली जगह

आजादी के बाद तैयार किए गए भारतीय इतिहास में इस दौर का का समुचित दस्तावेजीकरण नहीं किया गया। इसके इसके कारण इस दौर से जुड़े बहुत कम प्रमाण मिल पाते हैं। खुद बिहार में मोहम्मद यूनुस को बहुत कम लोग जानते हैं। प्रांत के तौर पर बिहार के पहले निर्वाचित मुखिया को राज्य में पर्याप्त सम्मान नहीं मिल सका। कुछ वर्ष पहले तक तो इसको लेकर जानकारी का काफी अधिक अभाव था। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद मोहम्मद युनूस की जयंती पर कुछ कार्यक्रम आयोजित होने लगे।