:चुनाव कर्मी ड्यूटी पर, कोरोना वायरस छुट्टी पर: कागजों में चुनाव आयोग के अनेक नियम, वास्तविकता एकदम उलट

सिलीगुड़ी डीसीआरसी का हाल चुनाव कर्मी ड्यूटी पर कोरोना वायरस छुट्टी पर

कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी फिर जोर पकड़ने लगी है। जगह-जगह इसके नए मामलों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2021 भी जारी है। कोरोना महामारी के बीच मतदान को ले आम मतदाताओं से ले कर चुनाव कर्मी तक काफी चिंतित हैं।

 संवाददाता, सिलीगुड़ी : कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) की महामारी फिर से जोर पकड़ने लगी है। जगह-जगह इसके नए मामलों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2021 भी जारी है। कोरोना महामारी के बीच मतदान को ले आम मतदाताओं से ले कर चुनाव कर्मी तक काफी चिंतित हैं। बंगाल चुनाव के पांचवें चरण के तहत शनिवार 17 अप्रैल को उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग व कालिम्पोंग जिलों के 13 और दक्षिण बंगाल के नदिया, उत्तर 24 परगना और पूर्व बर्द्धमान जिले के 32, कुल 45 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होंगे। उसे लेकर शुक्रवार को ही विभिन्न जिला मुख्यालयों से चुनाव कर्मियों की टीम ईवीएम लेकर सुरक्षा बलों के साथ अपने-अपने संबंधित मतदान केंद्रों पर मतदान कराने के लिए रवाना हो गई।

इस दौरान सिलीगुड़ी काॅलेज स्थित डीसीआरसी में जिस तरह की लापरवाही भरी व्यवस्था रही उसे लेकर चुनाव कर्मियों में कोरोना वायरस संक्रमण का भय व रोष साफ दिखा। कई चुनाव कर्मियों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि न तो मास्क की अनिवार्यता का ख्याल रखा गया, न ही हैंड सैनिटाइजर दिए गए और न ही सुरक्षित शारीरिक दूरी के अनुपालन पर नजर रखी गई। ईवीएम व अन्य कागजात लेने और अपनी-अपनी टीम संग गाड़ी पकड़ कर मतदान केंद्र रवाना होने के लिए डीसीआरसी में चुनाव कर्मियों की भीड़ उमड़ पड़ी।अफरा-तफरी भरा माहौल रहा। इस बीच कोविड-19 सुरक्षा संबंधी सारे नियमों की खुल्लम-खुल्ला धज्जियां उड़ीं। अब मतदान केंद्रों पर क्या होगा, कैसा होगा, कुछ भी कहना मुश्किल है और यह वर्तमान परिस्थिति के मद्देनजर अत्यंत चिंतनीय है। इससे पूर्व चौथे चरण के मतदान के दौरान भी मतदान केंद्रों पर कोविड-19 सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का वैसा अनुपालन नजर नहीं आया, जैसा चुनाव आयोग ने नियमों में बताया है।

कोरोना सुरक्षा का ध्यान रखते हुए चुनाव आयोग के अनेक नियम हैं।पर, वे सारे नियम कागजों में ही हैं। जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही है। वैसे नियम जान कर रख लें कि, मतदान से एक दिन पहले हर मतदान केंद्र का सैनिटाइजेशन अनिवार्य होगा। पोलिंग स्टाफ या पैरा मेडिकल स्टाफ या आशा कर्मी द्वारा थर्मल जांच व सैनिटाइजेशन के बाद ही मतदाताओं को मतदान केंद्र में प्रवेश करने दिया जाएगा।

मतदान केंद्रों पर मतदान हेतु जाने वाले मतदाता सुरक्षित छह-छह फीट शारीरिक दूरी अपनाते हुए ही कतार में लगेंगे। इसके लिए हर मतदान केंद्र पर निर्दिष्ट रूप में छह-छह फीट की दूरी पर 15-20 गोल घेरे भी बनाए हुए रहेंगे। हर मतदान केंद्र पर पुरुषों, महिलाओं और विकलांगों व वयोवृद्ध लोगों के लिए अलग-अलग कुल तीन कतार होगी। मतदाता मास्क लगा कर ही मतदान कर सकेंगे। कोरोना संक्रमण का संदेह होने पर संबंधित मतदाता को प्रतीक्षा करने हेतु अलग से प्रतीक्षालय की सुविधा दी जाएगी।

उन्हें आखिरी समय में मतदान करने दिया जाएगा। जगह-जगह कोरोना सतर्कता व कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षा के पोस्टर भी प्रदर्शित किए जाएंगे। पर, उत्तर बंगाल में बीते 10 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान मतदान केंद्रों पर ये सारे नियम पूरी तरह अमल में व प्रभावी नजर नहीं आए। इधर तो यही नजर आया कि मानो चुनाव कर्मी ड्यूटी पर और कोरोना वायरस छुट्टी पर है। इधर, कोरोना के मामले भी काफी बढ़ गए हैं तो स्वाभाविक रूप में लोगों की चिंता भी काफी बढ़ गई है।