पंजाबी बाग इलाके में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा, टेंपो सवार शख्स की मौत

 

पंजाबी बाग थाना क्षेत्र में एक निर्माणाधीन पुल के एक पिलर का हिस्सा एक टेंपों पर गिर गया।

 से मिली जानकारी के मुताबिक पंजाबी बाग थाना क्षेत्र में एक निर्माणाधीन पुल के एक पिलर का हिस्सा एक टेंपों पर गिर गया जिससे इसकी चपेट में आए एक टेंपो सवार की मौत हो गई।

नई दिल्ली,  संवाददाता।  पंजाबी बाग थाना क्षेत्र से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर निर्माणाधीन पुल का गार्टर गिर गया। गार्टर के हिस्से पुल के नीचे खड़े कुछ टैंपो के उपर जाकर गिरे। इनमें एक टैंपो में सो रहे शख्स की मौत हो गई। मृतक का नाम राम बहादुर 50 है। पुलिस का कहना है कि यह हादसा पुल का निर्माण करने वाली एजेंसी की लापरवाही के कारण हुआ है। संबंधित एजेंसी के बारे में पता करके उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस अभी यह पता करने में जुटी है कि पुल का निर्माण कितने दिनों से रुका हुआ था। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्ष 2017 से ही यहां काम रुका है। हालांकि रेलवे की ओर से इस बात पुष्टि नहीं की गई है। उधर रेलवे प्रशासन का कहना है कि लाइन के नीचे जो वाहन खड़े थे वे अवैध रूप से यहां खड़े थे।

यह हादसा पंजाबी बाग के पास स्थित दया बस्ती रेलवे स्टेशन के लिए बन रहे ग्रेड सेपरेटर लाइन पर हुआ है। यह रेलवे लाइन जमीन के उपर से पीलर के सहारे गुजर रही है। रामपुरा गोल्डन पार्क अंडरपास के पास जिस जगह हादसा हुआ है कि वहां लाइन के नीचे काफी वाहन खड़े रहते हैं। राम बहादुर यहां गार्ड का काम करते थे। यहां रात करीब दस बजे पीलर के उपर स्थित गार्टर ढहकर गिर गया। जब लोगों को यह पता चली तो सभी मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि गार्टर कुछ वाहनों के उपर गिरा है। इसके बाद लोग अपने घर चले गए।

उधर जब सुबह राम बहादुर डयूटी के बाद अपने घर नहीं पहुंचे तो स्वजन को कुछ संदेह हुआ। स्वजन व मोहल्ले के लोग घटनास्थल पर उनकी तलाश के लिए पहुंचे। इस बीच लोगों ने मामले से पुलिस को भी अवगत करा दिया। मौके पर पुलिस, आपदा प्रबंधन व अग्निशमन विभाग की टीम पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने पाया कि एक टैंपो पर गार्टर का बड़ा हिस्सा गिरा हुआ है। इसके अंदर पैर नजर आने के बाद गार्टर को टैंपो से हटाने का प्रयास किया गया। फिर हाइड्रोलिक क्रेन के सहारे गार्टर को हटाया गया। जिसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रात में ही बचाव कार्य शुरू होता तो शायद राम बहादुर की जान बच सकती थी। लेकिन रात के समय किसी ने राम बहादुर को ढूंढ़ना जरूरी नहीं समझा। लोगों का कहना है कि रात को लगा कि राम बहादुर कहीं चले गए हैं, इसलिए उनकी तलाश नहीं की गई। 

कुछ सवाल

इस मामले में एक सवाल यह है कि रात को हुए हादसे की जानकारी पुलिस को तत्काल क्यों नहीं मिली। क्या पुलिस का अपना तंत्र किसी हादसे के बारे में सूचना के लिए पूरी तरह दूसरों पर आश्रित है। क्षेत्र में गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों को हादसे की जानकारी क्यों नहीं मिली। ऐसे कई सवाल हैं जिनकी तलाश छानबीन के दौरान होगी।