तृणमूल को पटखनी देने के लिए भाजपा की जोर आजमाइश

 

तृणमूल के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा नजर गड़ाई र्बैठी है

आठवें चरण में कोलकाता की चार और सीटें मानिकतल्ला इंटाली काशीपुर- बेलगछिया व बेलेघाटा में है चुनाव चारों सीटों पर तृणमूल का कब्जा है। तृणमूल के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा नजर गड़ाई है और पटखनी देने के लिए जोर आजमाइश कर रही है।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल में आठवें व अंतिम चरण में 29 अप्रैल को उत्तर कोलकाता की चार और विधानसभा सीटें मानिकतल्ला, इंटाली, काशीपुर- बेलगछिया व बेलेघाटा में चुनाव होना है। इन चारों सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कब्जा है। काशीपुर-बेलगछिया सीट पर पिछले दो दशक से जबकि मानिकतल्ला, इंटाली व बेलेघाटा में एक दशक से टीएमसी जीतती आ रही है। 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से यह तृणमूल का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेकिन इस बार तृणमूल के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भाजपा नजर गड़ाई है और पटखनी देने के लिए जोर आजमाइश कर रही है। 

 इन चारों सीटों को बचाने के लिए तृणमूल को इस बार कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। 2016 के विधानसभा व 2019 के लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में भाजपा का वोट फीसद उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इसको लेकर भगवा दल काफी उत्साहित है। 

 मानिकतल्ला में मंत्री व आठ बार के विधायक व दिग्गज फुटबॉलर के बीच जंग

 इन चारों में से सबसे हाई प्रोफाइल मानिकतल्ला सीट पर जबर्दस्त जंग है। 2011 से यहां तृणमूल का कब्जा है। पिछले दो बार से यहां से लगातार जीतते आ रहे ममता सरकार में उपभोक्ता मंत्री व आठ बार के विधायक साधन पांडे तृणमूल की ओर से यहां फिर मैदान में हैं। 

 वहीं, उनके विजय रथ को रोकने के लिए भाजपा ने उनके खिलाफ दिग्गज फुटबॉलर व भारतीय टीम के गोलरक्षक रहे कल्याण चौबे को उतारा है। दोनों के बीच दिलचस्प मुकाबला है। वहीं संयुक्त मोर्चा की ओर से माकपा की रूपा बागची मैदान में हैं, जो एक दशक पहले यहां से विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं। साधन को दोनों तरफ से चुनौती मिल रही है, ऐसे में इस सीट को बचाना इस बार उनके लिए आसान नहीं है। साधन 2011 से पहले बड़तल्ला सीट से छह बार विधायक रहे हैं।

   काशीपुर-बेलगछिया में भी सत्तारुढ़ दल को मिल रही चुनौती

 काशीपुर-बेलगछिया सीट तृणमूल का गढ़ माना जाता है। दो दशक से इस सीट पर तृणमूल का कब्जा है। इस बार तृणमूल ने यहां से कोलकाता नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर अतिन घोष को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा की ओर शिवाजी सिंह राय एवं संयुक्त मोर्चा की ओर से माकपा के प्रतीप दासगुप्ता मैदान में हैं। इस विधानसभा सीट से टीएमसी की माला साहा ने साल 2011 व 2016 के विधानसभा चुनाव में जीत का ताज पहना था। जबकि इससे पहले वर्ष 2001 व 2006 में तृणमूल के ही तारक बंद्योपाध्याय ने यहां से जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार निवर्तमान विधायक माला का टिकट काट पार्टी ने अतिन घोष पर दांव खेला है। तृणमूल को यहां गुटबाजी का भी नुकसान हो सकता है। भाजपा यहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी है, जिनसे उन्हें चुनौती मिल रही है।

  इंटाली में स्वर्ण कमल को चुनौती दे रहीं प्रियंका

 इंटाली सीट की बात करें तो यहां 2011 से तृणमूल का कब्जा है। लगातार दो बार जीतते आ रहे निवर्तमान विधायक स्वर्ण कमल साहा को एक बार फिर तृणमूल ने प्रत्याशी बनाया है। वहीं, भाजपा की ओर से प्रियंका टिबड़ेबाल जबकि संयुक्त मोर्चा से आइएसएफ के मोहम्मद इकबाल आलम मैदान में हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या है। मुस्लिम वोट बंटने पर यहां भाजपा को फायदा हो सकता है।

 बेलेघाटा में भी तृणमूल की राह आसान नहीं

 इसी तरह बेलेघाटा सीट पर 2011 से तृणमूल का कब्जा है। लगातार दो बार से यहां से जीतते आ रहे परेश पाल पर तृणमूल ने फिर भरोसा जताया है। वहीं, भाजपा ने उनकी हैट्रिक रोकने के लिए एडवोकेट काशीनाथ विश्र्वास को उतारा है। वहीं संयुक्त मोर्चा की ओर से माकपा के राजीव विश्र्वास मैदान में हैं। यहां भी तृणमूल व भाजपा के बीच मुकाबला है। यहां भी तृणमूल की राह आसान नहीं है।