आठ बार के विधायक और पूर्व भारतीय गोलरक्षक में जबर्दस्त जंग

 

ममता सरकार में मंत्री साधन पांडे को हैट्रिक की हैट्रिक लगाने का पूरा यकीन

 मानिकतल्ला के मतदाताओं की यह खासियत रही है कि बंगाल में जब जो राजनीतिक दल मजबूती से उभरा उन्होंने उनके प्रतिनिधियों को मौका दिया। यही कारण है कि कल्याण चौबे अबकी बार भाजपा को मौका देने की बात कर रहे हैं।

 कोलकाता। कोलकाता की हाई-प्रोफाइल मानिकतल्ला विधानसभा सीट पर आठ बार के विधायक और पूर्व भारतीय गोलरक्षक कल्याण चौबे में जबर्दस्त जंग है। वहीं संयुक्त मोर्चा से माकपा प्रत्याशी रूपा बागची भी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। ममता सरकार में मंत्री साधन पांडे जहां पिछले 10 वर्षों के विकास कार्यों का हवाला देते हुए हैट्रिक की हैट्रिक लगाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं, वहीं कल्याण चौबे कह रहे हैं कि साधन पांडे आठ बार के विधायक जरूर हैं लेकिन अब उनके रिटायर होने का वक्त आ गया है। मानिकतल्ला के मतदाता उन्हें सम्मानजनक विदाई देंगे। वहीं एक दशक पहले इसी सीट से विधायक रहीं रूपा बागची ममता सरकार की नाकामियां गिना रही हैं। मानिकतल्ला में आठवें व अंतिम चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा।

मानिकतल्ला के मतदाताओं ने सबको दिया है मौका

मानिकतल्ला के मतदाताओं की यह खासियत रही है कि बंगाल में जब जो राजनीतिक दल मजबूती से उभरा, उन्होंने उनके प्रतिनिधियों को मौका दिया। यही कारण है कि कल्याण चौबे अबकी बार भाजपा को मौका देने की बात कर रहे हैं। इस सीट के इतिहास को देखें तो 1952 से 1969 तक यहां भाकपा का एकछत्र राज रहा। 1971 के उपचुनाव में यहां माकपा ने परचम लहराया। 1996 में कांग्रेस ने माकपा से यह सीट हथिया ली लेकिन अगले ही साल यह तृणमूल के खाते में चली गई, हालांकि 2006 में माकपा एक बार फिर इसपर कब्जा जमाने में सफल रही लेकिन 2011 में चली परिवर्तन की लहर में यहां के मतदाताओं ने भी तृणमूल पर ही भरोसा जताया। तब से अब तक इसपर तृणमूल का कब्जा है और साधन पांडे यहां पिछले एक दशक से विधायक हैं। इससे पहले वे बड़तल्ला सीट से छह बार जीत चुके हैं। परिसीमन के फलस्वरूप बड़तल्ला सीट का अस्तित्व खत्म हो चुका है।

घटा है तृणमूल का वोट प्रतिशत

तृणमूल के लिए चिंता का सबब यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पूरे बंगाल में जबर्दस्त जीत दर्ज करने के बावजूद इस सीट पर उसका वोट प्रतिशत घटा है। 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल को यहां 60.05 प्रतिशत वोट मिले थे। तब यहां तृणमूल का मुख्य मुकाबला माकपा से था। 2016 में तृणमूल का वोट 9.45 प्रतिशत घटकर 50.60 फीसद हो गया। इसके विपरीत पिछले विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा का वोट प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। 2011 में यहां भाजपा को महज 2.47 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2016 में 10.08 फीसद बढ़कर 12.55 फीसद हो गया और इस बार तो भाजपा ही यहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी बताई जा रही है।

लोकसभा चुनाव में फेल रहे हैं तीनों प्रत्याशी

मानिकतल्ला सीट के तीनों प्रमुख प्रत्याशियों में एक मेल यह है कि तीनों संसदीय चुनाव में विफल रहे हैं। साधन पांडे ने 1998 में तत्कालीन कलकत्ता नार्थ-ईस्ट सीट से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन संसद नहीं पहुंच पाए। वहीं कल्याण चौबे ने 2019 में कृष्णनगर से चुनाव लड़ा और उन्हें भी सफलता नहीं मिली। रूपा बागची भी 2014 में कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट से चुनाव हार गई थीं।