प्लाट आवंटन मामले में कांग्रेस को झटका, भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ CBI कोर्ट ने किए आरोप तय

 

पंचकूला सीबीआइ कोर्ट पहुंचे भूपेंद्र सिंह हुड्डा। जागरण

एजेएल प्लाट आवंटन मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता व हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला सीबीआइ कोर्ट ने मामले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।

जेएनएन, पंचकूला। एजेएल प्लाट आवंटन मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीबीआइ कोर्ट से झटका लगा है। पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआइ कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। AJL प्लॉट आवंटन मामले में CBI कोर्ट ने IPC की धारा 420, 120बी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत आरोप तय किए गए। अब अगली सुनवाई में मुख्य ट्रायल शुरू हो जाएगा। वहीं, बचाव पक्ष द्वारा मामले में लगाई गई डिस्चार्ज याचिका को भी CBI कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

पंचकूला में स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआइ कोर्ट में एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान मामले के मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान सीबीआइ कोर्ट ने मामले में भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ आरोप तय कर बड़ा फैसला सुनाया। मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी। 7 मई को होने वाली सुनवाई के दौरान CBI कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होने का सिलसिला शुरू होगा। इससे पहले गुरुवार को CBI कोर्ट में सभी पक्षों की बहस खत्म हुई और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

26 अगस्त को इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हुड्डा एवं मोती लाल वोरा (अब दिवंगत) के खिलाफ अभियोजन की शिकायत दाखिल कर दी थी। हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया था।

कुछ दिन पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को एक भूखंड आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछताछ की थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज किए गए थे। पंचकूला स्थित यह भूखंड सेक्टर 6 में सी-17 नंबर एजेएल को आवंटित किया गया था। इसे पिछले साल ईडी ने कुर्क कर लिया था।

एजेएल को कथित तौर पर नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा संचालित किया जाता था। यह ग्रुप नेशनल हेराल्ड अखबार निकालता था। ईडी की जांच में पाया गया है कि हुड्डा ने हरियाणा का मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए यह भूखंड पुन:आवंटन की आड़ में नए सिरे से एजेएल को 1982 की दर (91 रुपये प्रति वर्ग मीटर) और ब्याज के साथ फर्जी तरीके से आवंटित कर दिया। एजेंसी ने कहा था कि 2005 में इस पुन: आवंटन से एजेएल को अनुचित फायदा हुआ। ईडी के मुताबिक, इस भूखंड का बाजार मूल्य 64.93 करोड़ रुपये था, जबकि इसे हुड्डा को 69.39 लाख रुपये में आवंटित कर दिया था।