मंगल गीतों के साथ थाने में संपन्‍न हुई महिला कांस्‍टेबल की Haldi Ceremony, नहीं मिली छुट्टी

 

डूंगरपुर जिले के कोतवाली थाने में महिला कांस्टेबल की हल्दी की रस्म पूरी करते साथी पुलिसकर्मी

राजस्‍थान के डूंगरपुर के थाने में महिला कांस्टेबल की हल्दी रस्म संपन्‍न हुई। कोरोना महामारी के चलते आवश्यक सेवाओं यथा चिकित्सा एवं पुलिस विभाग में अवकाश पर रोक के चलते छुट्टी नहीं मिली। शादी 30 अप्रैल को है।

 उदयपुर,  संवाददाता। कोरोना महामारी के चलते आवश्यक सेवाओं यथा चिकित्सा एवं पुलिस विभाग में अवकाश पर रोक लगी है। ऐसे में अति आवश्यक कार्य को छोड़कर अवकाश नहीं मिल रहा। शादी के लिए अवकाश तो मिल रहा है लेकिन उसकी रस्मों को पूरा करने के लिए अवकाश नहीं मिल रहे। ऐसे में डूंगरपुर जिले के कोतवाली थाना पुलिस के कर्मचारियों ने अपनी सहयोगी महिला कांस्टेबल की हल्दी की रस्म थाने में संपन्न कराई। जिसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। महिला कांस्टेबल की शादी 30 अप्रैल को होनी है। 

 वायरल वीडियो में कोतवाली थाने की कुछ महिला पुलिसकर्मी अपनी सहयोगी महिला कांस्टेबल मंगल गीत गाते हुए हल्दी लगा रही हैं। बाद में उसे साथी पुलिसकर्मियों ने उठाया और उसे कुर्सी पर बिठाकर उछालकर खुशियां मनाते दिखाई दे रहे हैं। इसकी पड़ताल की तो पता चला कि डूंगरपुर जिले के कोतवाली थाने में हल्दी की रस्म बुधवार को निभाई गई। जिस महिला कांस्टेबल को हल्दी लगाई जा रही थी, वह आशा रोत है तथा उसकी शादी आगामी 30 अप्रैल को होनी है। उसे शादी के लिए अवकाश तो मिल गया लेकिन हल्दी की रस्म के लिए अवकाश नहीं मिल पाया तो साथी महिला पुलिसकर्मियों थानाधिकारी दिलीप दान से अनुमति लेकर हल्दी की रस्म थाने में निभाने की योजना बनाई थी। 

 बताया गया कि आशा रोत डूंगरपुर जिले के हिराता गांव की है और कोटाड़ा माथुगामड़ा से उसकी 30 अप्रैल को शादी होने जा रही है। आशा जन अनुशासन पखवाड़ा में लगातार ड्यूटी कर रही थी। थानाधिकारी दिलीप दान ने बताया कि उसे शादी के लिए अवकाश दिया जा चुका था लेकिन उन्हें इसका पता नहीं था कि बुधवार को उसकी हल्दी की रस्म होनी थी। जैसे ही साथी कर्मचारियों ने इसकी जानकारी दी तो हमने तय किया कि उसकी हल्दी की रस्म तय दिवस पर थाने में संपन्न कराई जाए और खुशनुमा माहौल में मंगल गीतों के साथ उसकी हल्दी की रस्म पूरी कराई। 

 चारपाई पर दूल्हा-दुल्हन को उछालने की परंपरा, थाने में कुर्सी पर उछाला

आदिवासी इलाके डूंगरपुर में परम्परा के अनुसार हल्दी की रस्म चारपाई पर बिठाकर पूरी की जाती है। इसे आदिवासी क्षेत्र में मुडिया या मुरजू नाम से जाना जाता है। किन्तु थाने में कांस्टेबल आशा रोत को कुर्सी पर बिठाकर यह परम्परा पूरी की गई। हल्दी लगाने के बाद दूल्हा-दुल्हन को उनके घरों में मंगल गीत गाकर चारपाई पर बिठाकर उछाला जाता है। यहां चारपाई की व्यवस्था नहीं हो पाई और उसकी जगह कुर्सी उपयोग में ली।   

 पिछले साल लॉकडाउन के चलते टल गई थी शादी 

कांस्टेबल आशा की शादी पिछले साल मई में संपन्न होनी थी लेकिन तब लॉकडाउन और कोरोना महामारी के चलते इसे टाल दिया गया था। इस बार भी वह कोरोना महामारी तथा ड्यूटी के चलते शादी टालना चाहती थी लेकिन परिवार के लगातार दबाव के बाद 30 अप्रैल को शादी करने जा रही है। उसने यह भी बताया कि जिस दुकान से उसने दुल्हन की ड्रेस तैयार कराई, उसे कोरोना महामारी के चलते सीज कर दिया गया। हल्दी की रस्म के दूसरे दिन वह दुकान सीजिंग अवधि पूरी होने के बाद खुली और अपने पसंद की ड्रेस मिल पाई।