श्रमिकों व पटरी दुकानदारों को यूपी सरकार देगी 1000 रुपये भरण-पोषण भत्ता, जानें- किसे मिलेगा यह लाभ

 


यूपी सरकार श्रमिकों व पटरी दुकानदारों को 1000 रुपये भरण-पोषण भत्ता देगी।

कोरोना संक्रमण काल में यूपी सरकार पंजीकृत श्रमिकों अन्य श्रमिकों सभी पटरी रेहड़ी दुकानदारों रिक्शा व ई-रिक्शा चालकों नाविकों कुली पल्लेदारों नाई धोबी मोची हलवाई आदि जैसे रोज कमा कर खाने वालों को 1000 रुपये की धनराशि प्रति परिवार भरण-पोषण भत्ता देगी।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। कोरोना संक्रमण से उत्पन्न परिस्थितियों में राज्य सरकार पंजीकृत श्रमिकों, अन्य श्रमिकों, सभी पटरी, रेहड़ी दुकानदारों, रिक्शा व ई-रिक्शा चालकों, नाविकों, कुली, पल्लेदारों, नाई, धोबी, मोची, हलवाई आदि जैसे रोज कमा कर खाने वालों को 1000 रुपये की धनराशि प्रति परिवार भरण-पोषण भत्ता के रूप में फिलहाल एक माह के लिए देगी। यह धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

यह धनराशि सभी राशन कार्डधारकों को जून से अगस्त तक दिए जाने वाले निशुल्क राशन के अतिरिक्त होगी। पात्र व्यक्तियों को चिह्नित करने, उनका डाटा संकलित कर राहत आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर फीड करने और धनराशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की ओर से इस बारे में मंगलवार को शासनादेश जारी कर दिया गया है।

जीएसटी की परिधि में न आने वाले हलवाई ही भरण-पोषण भत्ता के लिए पात्र होंगे। धोबी श्रेणी में ड्राई क्लीनर दुकानदार पात्रता की श्रेणी में शामिल नहीं होंगे। परंपरागत रूप से कार्य करने वाले धोबी जो अपनी रोजी-रोटी के लिए दैनिक कार्य करते हैं, वही इसके पात्र होंगे। नगरीय क्षेत्रों में ठेला, खोमचा, रेहड़ी, खोखा आदि लगाने वाले पटरी दुकानदारों, दिहाड़ी मजदूरों रिक्शा व ई रिक्शा चालक, कुली, पल्लेदार, नाई, धोबी, मोची, हलवाई आदि को चिह्नित कर उनका डाटा संकलित करने और फिर उसे राहत आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर फीड कराने के लिए नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे। प्रवासी श्रमिकों, कामगारों मजदूरों के साथ ही नाविकों का डाटा संकलित कर राहत आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर फीड कराने के लिए अपर जिलाधिकारी (राहत इंचार्ज) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। नोडल अधिकारी यह प्रमाणपत्र देंगे कि उनके द्वारा डाटा का सत्यापन कर लिया गया है। इसमें किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है और पात्र व्यक्तियों को ही सूची में शामिल किया गया है। यह प्रमाणपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से राहत आयुक्त कार्यालय को भेजा जाएगा। पात्र व्यक्तियों को चिह्नित करने उनका डाटा संकलित कर वेबसाइट पर फीड करने का काम अगले 15 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।

प्रवासी श्रमिकों को भी आर्थिक सहायता : पिछले साल की तरह चालू वित्तीय वर्ष में भी प्रवासी श्रमिकों को 1000 रुपये प्रति परिवार डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ट्रेनों, बसों व अन्य साधनों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों का डाटा राहत आयुक्त की वेबसाइट पर फीड करने के बारे में शासन की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इन सभी श्रेणी के व्यक्तियों को धनराशि देने के बाद भी ऐसे व्यक्ति बच सकते हैं जिनके पास अपने परिवार के भरण-पोषण की सुविधा नहीं है। ऐसे व्यक्तियों के बारे में शहरी क्षेत्रों में नगर मजिस्ट्रेट या उप जिलाधिकारी और संबंधित नगर निकाय के नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी कि समिति इस बारे में जिलाधिकारी को अपनी संस्तुति देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी की समिति ऐसे व्यक्तियों की परिस्थितियों की जांच कर उन्हें सहायता देने के लिए अपनी सिफारिश जिलाधिकारी से करेगी।