102 नॉट आउट' की रिलीज को हुए तीन साल, निर्देशक उमेश शुक्ला ने की अमिताभ- ऋषि के साथ शूटिंग की यादें ताजा

3 Years Of 102 Not Out, Photo Courtesy: Instagram

फिल्म 102 नॉट आउट में करीब 27 साल बाद अमिताभ बच्चन और दिवंगत ऋषि कपूर एक साथ पर्दे पर नजर आए थे। इसमें दोनों पिता-पुत्र के किरदार में थे। हाल ही में फिल्म की रिलीज को तीन साल पूरे हुए हैं।

 मुंबई। फिल्म '102 नॉट आउट में करीब 27 साल बाद अमिताभ बच्चन और दिवंगत ऋषि कपूर एक साथ पर्दे पर नजर आए थे। इसमें दोनों पिता-पुत्र के किरदार में थे। हाल ही में फिल्म की रिलीज को तीन साल पूरे हुए हैं। निर्देशक उमेश शुक्ला ने इस फिल्म से जुड़ी दिलचस्प यादें साझा की...

यह फिल्म एक नाटक पर आधारित थी, जिसका लेखन और निर्देशन सौम्य जोशी ने किया था। मैं बतौर निर्माता इस नाटक से जुड़ा था। हमने इसके करीब 450 सफल शोज किए थे। तभी यह तय किया था कि आगे चलकर इस विषय पर फिल्म बनाएंगे। जब फिल्म बनाने के बारे में सोचा तो पहला ख्याल अमिताभ बच्चन जी का आया। उन्होंने 10 मिनट में फिल्म की स्क्रिप्ट सुनकर कहा कि अच्छी कहानी है, मैं यह फिल्म करना चाहूंगा। उनके बेटे के किरदार के लिए मैंने चिंटू जी (ऋषि कपूर) से बात की, उन्होंने भी 10-15 मिनट में स्क्रिप्ट सुनकर हां कह दिया। वह इस बात से खुश थे कि फिल्म में बच्चन साहब भी हैं।

फिल्म में तीसरा किरदार मेडिकल स्टोर में काम करने वाले लड़के का था, जो घरेलू काम में अमिताभ और चिंटू जी के किरदारों की मदद करता था। उस किरदार में जिमित त्रिवेदी परफेक्ट लगे। नाटक को फिल्म में रूपांतरित करना आसान नहीं था। नाटक में हम कई चीजें मान लेते हैं, लेकिन फिल्मों में ऐसा नहीं किया जा सकता है। जैसे एक सीन था जिसमें बच्चन साहब का किरदार चिंटू जी के किरदार को पूरा मुंबई घुमाता है। वह नाटक में हम नहीं दिखा सकते थे, उसके बारे में केवल बातचीत थी। फिल्म में हमने उसे विजुअली दिखाया। उस सीन में हमने मुंबई की कई जगहों को दिखाया था। उससे लोगों की मुंबई से जुड़ी यादें ताजा हो गई थीं। हालांकि दो बड़े कलाकारों के साथ मुंबई की सड़कों पर शूटिंग करना मुश्किल था।

मुंबई के नरीमन पॉइंट में घोड़ा गाड़ी वाले एक सीन में दोनों बग्गी में बैठे थे, वह शूट करना मुश्किल था। वहां पर शूटिंग देखने वाले लोगों ने कुछ तस्वीरें खींच ली थी, जो फिल्म रिलीज से पहले ही वायरल हो गई थीं, लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता था। हमने क्रू और सिक्योरिटी को बढ़ाकर वह सीन पूरा किया था।

दोनों मुख्य किरदारों के लुक पर काफी ध्यान दिया गया था। बच्चन साहब फिल्म में 102 साल के बुजुर्ग का किरदार निभा रहे थे। हमने पहले दो-तीन लुक ट्राई किए थे। उनके बालों को हमने जानबूझ कर थोड़ा लंबा रखा था, क्योंकि उनका किरदार जिंदादिल था, जिसपर बुढ़ापे का कोई दबाव नहीं था। वह किरदार अपनी उम्र को खुद पर हावी होने नहीं देता है। बाहर निकलने पर कोट पहनकर ही निकलता है, जबकि ऋषि जी के किरदार को ऐसा रखा गया था कि वह खुद को बुड्ढा मानने लगा है। उनका किरदार टिपिकल गुजराती किरदार था, इसलिए हमने उन्हें पायजामा और शर्ट पहनाया था।

मैंने एक शर्त रखी थी कि घर के सीक्वेंस में दोनों चप्पल नहीं पहनेंगे। गुजरातियों के घरों में चप्पल नहीं पहनी जाती है। दोनों इतने बड़े कलाकार हैं, लेकिन उन्होंने मेरी बात मानी। चप्पल न पहनने की वजह से जो एक घर में रहने वाली फीलिंग थी, वह आ रही थी। हमने घर का जो सेट लगाया था, उसमें उनके रहने से वाकई ऐसा लग रहा था कि वे उसी घर के सदस्य हैं। हमने फिल्म की वर्कशाप भी उसी घर में की थी। वहां बैठकर स्क्रिप्ट पढ़ी थी।शूटिंग पूरी करने के बाद जब उस घर को तोड़ऩा पड़ा था तो मेरी आंखों में आंसू आ गए थे। एक महीना उस घर में बिताया था। दोनों वरिष्ठ कलाकार हैं, पर उनके लिए सेट पर कभी इंतजार नहीं करना पड़ा। दोनों वक्त पर सेट पर सीन तैयार करके पहुंचते थे। फिल्म में कई ऐसे कॉमिक सीन थे, जिनमें डायलॉग्स नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी एक्टिंग से उन्हें मजेदार बना दिया था। ऋषि कपूर जी आज दुनिया में नहीं हैं, पर उनके साथ काम की यादें और यह फिल्म मेरे लिए हमेशा खास रहेगी।