नन्ही कोरोना योद्धा : दो साल की कोपल से हारा वायरस, होम आइसोलेशन में रहकर 14 द‍िन में दी मात

इंदिरा नगर के रहने वाले रजनीश गौड़ का पर‍िवार हुआ था कोरोना संक्रमित।

रजनीश गौड़ बताते हैं 11 अप्रैल को मेरी रिपोर्ट पाॅजिटिव आई इसके बाद पत्नी और बेटी का भी टेस्ट करवाया गया। 14 अप्रैल को आई रिपोर्ट देखकर तो मानो पैरों तले जमीन खिसक गई। पत्नी के साथ ही हमारी दो साल की मासूम बच्ची भी कोरोना संक्रमित निकली।

लखनऊ। दो साल की कोपल गौड़ ने मुस्कुराते हुए कोरोना को हरा दिया। बेटी की मुस्कुराहट ने कोरोना संक्रमित पिता और मां को भी जानलेवा वायरस से लड़ने की ताकत दी। इंदिरा नगर का यह परिवार आज पूरी तरह से स्वस्थ है। घर में कोपल की किलकारी गूंज रही। स्वस्थ होने के बाद रजनीश और खुशबू दोनों ने ही प्लाज्मा भी डोनेट किया। रजनीश गौड़ बताते हैं, 11 अप्रैल को मेरी रिपोर्ट पाॅजिटिव आई, इसके बाद पत्नी और बेटी का भी टेस्ट करवाया गया। 14 अप्रैल को आई रिपोर्ट देखकर तो मानो पैरों तले जमीन खिसक गई। पत्नी के साथ ही हमारी दो साल की मासूम बच्ची भी कोरोना संक्रमित निकली।

डाॅक्टर की सलाह पर हम होम आइसोलेशन में रहे। बेटी को कुछ दिन पहले ही वायरल हुआ था, वह ठीक भी हो चुकी थी। हमें लगातार बुखार और ऑक्सीजन लेवल नापने को कहा जाता। बेटी मुंह में थर्मामीटर तक नहीं लगाती, ऑक्सीमीटर के सेंसर तक उसकी अंगुली ही नहीं पहुंचती। हम डाॅक्टर के साथ लगातार आनलाइन जुड़े रहे। शुरू में बेटी कमजोरी के कारण दिन-भर सोती थी, पर फिर धीरे-धीरे पहले की तरह ही सक्रिय होने लगी।

मां खुशबू बताती हैं, हम तीनों ही कोरोना पाॅजिटिव थे, इसलिए बेटी हमारे साथ ही रहती। हम हर वक्त मास्क लगाकर रहते। बेटी मेरे साथ ही सोती थी, इसलिए मैं रात में भी मास्क लगाकर ही सोती थी। हम जब भी बेटी के पास होते, एक पल के लिए भी मास्क नहीं हटाते। बेटी मुंह में हाथ डालती, हम टोक देते। बार-बार उसका हाथ धोते, सैनिटाइज करते। बेटी के खिलौनों को भी रोज सैनिटाइज करते। उसके उठने से पहले ही कमरे का कोना-कोना सैनिटाइज कर देते। सात दिन में ही बेटी के कोरोना संबंधी लक्षण खत्म हो गए। 14 दिन बाद हमने दोबारा टेस्ट कराया। 25 अप्रैल को सबकी रिपोर्ट निगेटिव आई और हमने राहत की सांस ली।

ऐसे रखा बेटी के डाइट का ध्यान

खुशबू बताती हैं, सुबह दूध ब्रेड और फल, दिन में रोटी और दाल देती। रात में हल्दी दूध जरूर देती। लगातार दवाइयों से बेटी के मुंह का टेस्ट भी बिगड़ रहा था, इसलिए मैंने डाॅक्टर से पूछकर उसको चाॅकलेट भी दी। जूस के साथ ही फलों का पेस्ट बनाकर भी देती।