2015 में भी उन्नाव के परियर घाट पर गंगा में उतराए थे शव, तब कहां था कोरोना

छह साल पहले भी गंगा में मिली थीं लाशें। फाइल फोटो

गंगा में मिले शवों का सच जानने के लिए की पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2015 में उन्नाव के परियर घाट पर शव उतराने के बाद देशभर में चर्चा हुई थी। प्रशासन के आदेश के बाद श्मशान घाट पर शवों को दफनाया जाने लगा था।

कानपुर। अब तक दैनिक जागरण की पड़ताल में आपने पढ़ा कि गंगा में शव प्रवाहित करने व किनारे पर दफनाने की परंपरा काफी पुरानी है। यह कोरोना काल की देन नहीं है। कड़ी दर कड़ी जोडि़ए तो बातें अपने आप स्पष्ट हो जाएंगी कि कुछ लोग कैसे स्याह को सफेद और सफेद को स्याह दिखाते हैं। अब आपको बताते हैं एक और सच...। बात 13 जनवरी, 2015 की है जब उन्नाव जिले के परियर स्थित गंगा घाट के पास 100 से अधिक शव गंगा में उतराते मिले थे (देखें बाक्स)। तब न कोरोना था और न ही कोई और महामारी, फिर भी एक साथ इतने शवों का मिलना देशभर में चर्चा का विषय बना था।

कोरोना की इस महामारी में कई हंसते-खेलते परिवार उजड़ गए। संकट की इस घड़ी में भी कुछ लोग दुष्प्रचार से बाज नहीं आए। गंगा नदी के किनारे दफन शवों को लेकर सुनियोजित तरीके से भ्रम पैदा किया गया। ऐसी तस्वीर दिखाई गई, जो सच से परे थी।

परियर गंगा तट क्षेत्र उन्नाव जिले के कटरी मरौंदा मझवारा में आता है। वहां के पूर्व प्रधान विनोद निषाद का कहना है कि 2015 में जब परियर में 104 शव मिले थे तभी शासन-प्रशासन से यह आदेश जारी हुआ था कि गंगा में कोई शव नहीं बहाया जाएगा। तब श्मशान घाट पर शवों को भूसमाधि दी जाने लगी थी।

गंगा नदी में जलस्तर कम होने पर जब नरौरा बांध से पानी छोड़ा जाता है तब पीछे से कुछ शव बहाव में भी आ जाते हैं। परियर घाट के दूसरे छोर पर स्थित बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट के सामने के शव गांव के किनारे आकर लग जाते हैं। कई बार पशुओं के शव भी उतराते दिखे हैैैं।बांगरमऊ से उन्नाव की तरफ गंगा की जलधारा परियर घाट तक पहुंचने से पहले एक मोड़ पडऩे से अक्सर पानी कम होने पर धारा कानपुर की तरफ हो जाती है या छोटी-छोटी कई धाराओं में बंट जाती है। पानी का प्रवाह कम हो जाता है। इससे धारा के करीब दफनाए गए शव अक्सर बाहर आ जाते हैं। 14 जनवरी, 2015 में गंगा का पानी कम होने के बाद अचानक काफी संख्या में शव मिलने की घटना को याद करते हुए परियर में उनका क्रिया-कर्म करने वाले हरीराम धानुक कहते हैं-'तबहु यहाय भा रहे, धारा मा पानी कम परा तो सब लाशय उतरा के बाहर आ गई रहाय। सब जनये बहुत बवाल बताईन कि लाश फेंकी गई है।'

ऐसा ही कुछ कहना है यहीं के राम खिलावन का। वह बोले, 'पहले बहुत लोग लाश बहा देत रहए तो कुछ उनके कारण हुआ रहाय।' उस समय राज्य के पुलिस महानिदेशक एके गुप्ता ने कहा था कि उन्नाव में गंगा की मुख्य धारा से हटकर एक उपधारा बहती है। इस उपधारा में जल का प्रवाह कम होने के कारण उसमें प्रवाहित किए गए शव सतह पर आ गए।