बिकरू को 25 साल बाद चुनाव से मिला प्रधान, कड़े मुकाबले में मधु ने दर्ज की जीत


बिकरू और भीटी ग्राम पंचायत में चमका लोकतंत्र।
 आठ पुलिस कर्मियों की हत्या और फरार कुख्यात विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद बिकरू गांव चर्चा में आया था। दुर्दांत विकास दुबे की ऐसी धमक थी कि 25 साल से निर्विरोध प्रत्याशी होने से मतदाताओं को मतदान का मौका नहीं मिला।

कानपुर। देश दुनिया में चर्चित हुए बिकरू गांव को आखिर चुनाव से अपना प्रधान मिल ही गया। 25 साल बाद चुनाव में हुए मतदान में गणना के बाद मधु ने जीत दर्ज करके इतिहास रच दिया है। यहां मधु और प्रतिद्वंद्वी बिंदु कुमार के बीच कांटे की टक्कर रही। कड़े मुकाबले के बाद मधु ने जीत दर्ज की है। उनकी जीत के बाद गांव में जश्न का माहौल है। यहां दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे, जबकि मधु और बिंद कुमार के बीच टक्कर मानी जा रही थी। कड़े मुकाबले के बीच मधु ने 381 वोट हासिल किए हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बिंद कुमार को 327 वोट मिले हैं।

पंचायत चुनाव में मतदान के बाद से बिकरू और पड़ोस के गांव भीटी गांव में चुनाव परिणाम आने से पहले ही आजादी जैसा माहौल है। यहां कुख्यात विकास दुबे का खौफ इतना था कि चुनाव तो दूर कोई भी उम्मीदवार बनने की भी नहीं सोच सकता था। हिस्ट्रीशीटर दुर्दांत विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद इस बार बिकरू में लोकतंत्र का सूरज चमका औा गांव में 25 साल बाद लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया और आखिर उन्हें प्रधान मिल गया है। यहां चुनाव परिणाम आने के बाद आरक्षित सीट पर मधु पत्नी संजय कुमार ने जीत दर्ज की है। उनकी प्रतिद्वंदी बिंदु कुमार 54 वोट से हारी हैं। गांव में उत्साह चरम पर है। कुछ ऐसा ही भीटी गांव का भी रहा और यहां भी पंद्रह साल बाद मतदान करने वाले मतदाताओं को भी परिणाम का इंतजार है।

आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद चर्चा में आया बिकरू गांव

दो जुलाई की रात दबिश के दौरान सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के बाद चर्चा में आए कुख्यात विकास दुबे की धमक किसी डॉन से कम नही थी। उसके दबदबे के चलते बिकरू में 25 और भीटी में 15 वर्षों से निर्विरोध प्रधान ही चुने जाते थे। इन प्रधानों पर विकास दुबे का वरद हस्त होता था। बिकरू में विकास दुबे दो बार छोटे भाई की पत्नी अंजली दुबे को प्रधान बनवा चुका है, जबकि भीटी से भाई अविनाश दुबे तथा बाद में करीबी जिलेदार को निर्विरोध जितवाता रहा। बिकरू कांड के बाद कुख्यात के एनकाउंटर होने से उसका यह साम्राज्य टूट गया।

25 साल बाद चमका लोकतंत्र का सूरज

बिकरू गांव में 25 साल बाद लोकतंत्र का सूरज चमका तो पंचायत चुनाव परिणाम को लेकर मतदाताओं में आजादी के जश्न जैसा माहौल है। गांव में प्रधान बनाने को लेकर जनता में उत्साह है। बिकरू ग्राम पंचायत का पद आरक्षित होने के कारण यहां 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे और उनके भाग्य का फैसला मतपेटी खुलते ही हो जाएगा। वहीं भीटी ग्राम पंचायत पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था और यहां पर 8 महिलाएं चुनाव मैदान में थीं। गांव वालों ने बताया कि प्रधान से लेकर बीडीसी व सदस्य के चुनाव नहीं होते थे। इस बार उन लोगों ने अपने मनमाफिक ग्राम प्रधान को बनाने के लिए वोट डाले हैं।

क्या कहते हैं प्रत्याशी

बिकरू में 76 तो भीटी में 81 फीसद मतदान हुआ। ग्राम पंचायत के प्रत्याशी बिंदु कुमार कहते हैं कि चुनाव परिणाम आने का बेसब्री से इंतजार है। प्रत्याशी दीपू सोनकर भी काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जनता को इस बार मनमाफिक प्रतिनिधि चुनने का मौका मिला है। प्रत्याशी राजबहादुर और राधेश्याम भी चुनाव परिणाम को लेकर काफी उत्साहित हैं। गांव से चुनाव लड़ रहीं मीरा देवी, विजयलक्ष्मी व शहनाज बेगम को चुनाव परिणाम का बेसब्री से इंतजार हैं। इन लोगों ने बताया कि चुनाव कोई भी जीते लेकिन गांव में अब किसी का खौफ नहीं रहा है। गांव के लोग निडर होकर लोकतंत्र का झंडा थाम चुके है। शिवराजपुर के निर्वाचन अधिकारी अभय कुमार ने बताया कि बिकरू पंचायत की मतगणना पहले ही चरण में है। इससे बिकरू का चुनाव परिणाम सबसे पहले आएगा।

बिकरू में पंचयात चुनाव पर एक नजर

गायत्री देवी - वर्ष 2000 - निर्विरोध

अंजली दुबे- वर्ष 2005 -निर्विरोध

रजनेश कुशवाहा- वर्ष 2010- निर्विरोध

अंजली दुबे - वर्ष 2015 -निर्विरोध