लुधियाना में रहते हैं अफगानिस्तान से आए 40 परिवार, बोले- कभी सीआइए तो कभी थाने वाले बुलाते हैं, अब चैन से जी सकेंगे

वर्ष 2012 में करीब 40 सिख परिवार अफगानिस्तान से लुधियाना आए थे। जागरण

अफगानिस्तान के श्योर बाजार से करीब 40 परिवार 2012 में लुधियाना पहुंचे थे। उस समय वहां पर सिखों समेत सभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा था। तब से यह परिवार लुधियाना के अलग-अलग कोनों में किराये के घरों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

लुधियाना। बुजुर्गों पर पाकिस्तान में अत्याचार हुआ तो वे जान बचाने के लिए अफगानिस्तान पहुंचे। एक पीढ़ी अफगानिस्तान में रही लेकिन वहां भी उन्हें अल्पसंख्यक होने का खामियाजा भुगतना पड़ा और आखिर में अफगानिस्तान से जान बचाने के लिए भारत आना पड़ा। यह कहानी है अफगानिस्तान से 2012 में लुधियाना आए 40 के करीब सिख परिवारों की। यहां आकर भी इन परिवारों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कभी सीआईए वाले तो कभी थाने वाले उन्हें तलब कर देते हैं। कोई पासपोर्ट मांगता है तो कोई वीजा बढ़ाने का दबाव डालता है। ज्यादातर परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह बीजा बढ़ाने के लिए पैसे खर्च कर सकें।

केंद्र सरकार की तरफ से अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों को अब नागरिकता देने का काम शुरू हो गया तो इन परिवारों की आस भी बंध गई। इन परिवारों को उम्मीद है कि अब उन्हें भी देश की नागरिकता मिल जाएगी और उन्हें भी सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इन परिवारों ने अब नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। 

लुधियाना के अलग-अलग हिस्सों में किराये पर रह रहे

अफगानिस्तान के श्योर बाजार से करीब 40 परिवार 2012 में लुधियाना पहुंचे थे। उस समय वहां पर सिखों समेत सभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा था। तब से यह परिवार लुधियाना के अलग-अलग कोनों में किराये के घरों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। अफगानिस्तान से आए शमी सिंह बताते हैं कि 2012 से ये परिवार अपना भरण पोषण करने के लिए धक्के खा रहे हैं। पुलिए आए दिन अलग-अलग जगहों पर बुला लेती है और उन पर दबाव बनाती है।

उन्होंने बताया कि देश में अधिकार पाने के लिए वह 2012 से ही लड़ाई लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री मनीष तिवारी से लेकर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद से भी मिले। यही नहीं, पूर्व विदेश राज्य मंत्री रही परनीत कौर से भी मुलाकात की लेकिन कहीं से भी राहत नहीं मिली। पुलिस जब बार-बार तंग करती रही तो उनके साथ अलग अलग जगहों पर रहने लगे ताकि पुलिस आए दिन उन्हें पूछताछ के लिए न बुलाए।

जल्द डीसी कार्यालय में करेंगे आवेदन

शमी सिंह बताते हैं कि वह चार बेटियों, एक बेटे, पत्नी को साथ लेकर लुधियाना आए थे। पहले कपड़े बेचकर जीवन यापन कर रहे थे और अब आटो चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो बेटियों की शादी कर ली है और एक बेटी की मौत हो गई। अब उनके परिवार में एक बेटा बेटी व पत्नी हैं। उन्होंने बताया कि अब केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की बात की है तो वह इसके लिए आवेदन करेंगे और उसके बाद उनके जैसे सभी परिवारों को नागरिकता मिलेगी। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल्दी ही डीसी दफ्तर जाकर आवेदन करेंगे।