बिना जांच 45 लोगों की बना दी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट, डाॅक्टर सहित पांच गिरफ्तार

पकड़े गए आरोपितों में एक निजी लैब का डाॅक्टर और उसके कर्मचारी भी शामिल हैं।
दक्षिणी दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि 29 अप्रैल को पुलिस के पास एक फोन आया। कालर ने बताया कि मालवीय नगर में अरविंदो काॅलेज के पास स्थित जीनस्ट्रिंग्स लैब में कुछ लोग कोरोना जांच की फर्जी रिपोर्ट बना रहे हैं।

नई दिल्ली । मालवीय नगर थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो लोगों की फर्जी कोरोना रिपोर्ट बनाकर देता था। पकड़े गए आरोपितों में एक निजी लैब का डाॅक्टर और उसके कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोपित डाॅ. मनीष कुमार, लैब टेक्नीशियन प्रज्ञानंद, हिमांशु और सतेन्द्र व निखिल ने एक ही परिवार के 45 लोगों को जांच की फर्जी रिपोर्ट बनाकर दी थी जिसके बाद पूरा मामला सामने आया।

दक्षिणी दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि 29 अप्रैल को पुलिस के पास एक फोन आया। कालर ने बताया कि मालवीय नगर में अरविंदो काॅलेज के पास स्थित जीनस्ट्रिंग्स लैब में कुछ लोग कोरोना जांच की फर्जी रिपोर्ट बना रहे हैं। मालवीय नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची जहां पुलिस को शिकायतकर्ता विपुल सैनी मिला।

विपुल सैनी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अप्रैल की शुरूआत में हिमांशु और प्रज्ञानंद को कोरोना जांच के लिए सैंपल दिए थे। 25 अप्रैल को उनके एक जानकार ने ऋषभ शुक्ला ने भी दोनों को जांच के लिए सैंपल दिए। ऋषभ शुक्ला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई लेकिन उनको कोई भी लक्षण नहीं थे। ऐसे में उन्होंने दूसरी लैब से अपनी जांच करवाई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। ऐसे में ऋषभ शुक्ला ने हिमांशु और प्रज्ञानंद से लैब में संपर्क किया और अपनी रिपोर्ट की जानकारी मांगी। इसके बाद सामने आया कि उन्होंने लैब में रजिस्टर ही नहीं किया था। ऋषभ शुक्ला ने विपुल को बताया और एफआइआर दर्ज करवाई।

अतुल ठाकुर ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि हिमांशु और प्रज्ञानंद लैब में टेक्नीशियन हैं। दोनों कोरोना मरीजों के सैंपल का होम कलेक्शन भी करते हैं। दोनों सैंपल लाकर जीनस्ट्रिंग्स लैब में कार्यरत डा. मनीष कुमार को देते थे। मनीष आरोपितों हिमांशु और प्रज्ञानंद को एक्सेल शीट में मरीजों की रिपोर्ट का फॉरमेट भेज देता था।इसके बाद हिमांशु और प्रज्ञानंद जीनस्ट्रिंग्स लैब के लेटरपैड पर मरीजों की रिपोर्ट निकाल कर दे दिया करते थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि लोगों को शक न हो इसलिए वह फोन पर भी मैसेज भी भेजा करते थे। मनीष अपने दो सहकर्मियों सतेन्द्र और निखिल की मदद से रिपोर्ट हिमांशु और प्रज्ञानंद तक पहुंचाता था।

विपुल सैनी के परिवार में शामिल 45 लोगों ने कोरोना जांच करवाई थी तो ज्यादातर की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई गई। कई ऐसे भी थे जिनकी रिपोर्ट तो नेगेटिव थी लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण थे। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपितों ने अभी तक कितने लोगों को फर्जी रिपोर्ट दी है।