47 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च के बाद भी नहीं बन सका एक भी अस्पताल : प्रवेश वर्मा
सांसद प्रवेश वर्मा ने दिल्ली सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2015 से लेकर 21 तक सूबे की सरकार ने 47 हजार 634 करोड़ रुपये स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च किए हैं लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक एक भी नये अस्पताल का निर्माण नहीं हो सका।

नई दिल्ली । कोरोना संकट के दौर में आम आदमी पार्टी व भाजपा के बीच चल रहे सियासी घमासान में सांसद प्रवेश वर्मा ने दिल्ली सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। सांसद ने अपने ट्वीट में पिछले सात वर्षों के दौरान स्वास्थ्य के मद में हुए खर्च का ब्योरा देते हुए दिल्ली सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। प्रवेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2015 से लेकर 21 तक सूबे की सरकार ने 47 हजार 634 करोड़ रुपये स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च किए हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक एक भी नये अस्पताल का निर्माण नहीं हो सका।

इसके अलावा आक्सीजन प्लांट लगाने, नए डाक्टरों की भर्ती व नए वेंटिलेटर बेड बढ़ाने में भी सरकार नाकाम रही है। आखिर दिल्ली सरकार द्वारा ये पैसे कहां खर्च किए गए। जनता के पैसों का हिसाब सरकार को जरूर देना चाहिए। अगर इन पैसों का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में किया जाता तो आज दिल्ली की जनता को ये दिन देखने नहीं पड़ते।

प्रवेश वर्मा ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि कोरोना संकट के बीच राजधानी की जनता परेशान है, लेकिन सरकार आंकड़ों को दुरुस्त करने में लगी हुई है। कोरोना जांच की संख्या कम कर दी गई है। जब जांच ही नहीं करेंगे तो संक्रमितों की संख्या कम होना लाजिमी है। उन्होंने कहा कि अभी तो जांच की संख्या और बढ़ानी चाहिए, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा कोरोना संक्रमितों की पहचान हो और उनका ईलाज सुनिश्चित किया जा सके। सांसद प्रवेश वर्मा के इन आरोपों पर दिल्ली सरकार का पक्ष मांगा गया, लेकिन नहीं मिल सका।सांसद की ओर से उपलब्ध कराये गये आंकड़े

वर्ष दिल्ली सरकार की ओर से स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया गया खर्च

  • 2015 4,787 करोड़ रुपये
  • 2016 5,259 करोड़ रुपये
  • 2017 5,736 करोड़ रुपये
  • 2018 6,729 करोड़ रुपये
  • 2019 7485 करोड़ रुपये
  • 2020 7,704 करोड़ रुपये
  • 2021 9,934 करोड़ रुपये