घर बैठे हो जाएगा 50 हजार विद्यार्थियों के भाग्य का फैसला

 

कोरोना संक्रमण ने तेजी से अपने पैर सभी जिलों में पसारने शुरू कर दिए।

24 अप्रैल से कराई जानी प्रस्तावित थीं। बाद में उनको पंचायत चुनाव के चलते स्थगित कर दिया गया। कहा गया कि अब परीक्षाएं आठ मई के बाद कराई जाएंगी। मगर इस बीच कोरोना संक्रमण ने तेजी से अपने पैर सभी जिलों में पसारने शुरू कर दिए।

अलीगढ़,  यूपी बोर्ड की परीक्षाएं पहले 24 अप्रैल से कराई जानी प्रस्तावित थीं। बाद में उनको पंचायत चुनाव के चलते स्थगित कर दिया गया। कहा गया कि अब परीक्षाएं आठ मई के बाद कराई जाएंगी। मगर इस बीच कोरोना संक्रमण ने तेजी से अपने पैर सभी जिलों में पसारने शुरू कर दिए। इसके चलते पहले 15 मई तक विद्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए। अब 20 मई और 25 मई तक विद्यालयों को बंद करने के आदेश शासनस्तर से जारी हुए। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए एहतियातन बोर्ड परीक्षाएं जुलाई तक कराने की बातें भी बोर्ड की ओर से सामने आईं। मगर सोमवार को बोर्ड से जारी आदेश ने विद्यार्थियों व शिक्षकों के मन में कयासों की लहरें उठाने का काम किया है। अगर कयास सही हुए तो घर बैठे ही जिले में पंजीकृत यूपी बोर्ड हाईस्कूल के 50 हजार छात्र-छात्राओं के भाग्य का फैसला हो जाएगा।

यूपी बोर्ड ने फिलहाल कोई फैसला नहीं किया

बोर्ड की ओर से जारी आदेश में हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं की छमाही व प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्राप्तांक बोर्ड की साइट पर अपलोड करने को कहा गया है। सीबीएसई ने भी हाईस्कूल की परीक्षा को निरस्त करते हुए परिणाम जारी करने के लिए इंटरनल एसेसएमेंट व गृह परीक्षाओं के नंबर स्कूल संचालकों से मांगे थे। अब वो परिणाम जारी करने की ओर बढ़ चुका है। बोर्ड के इस आदेश से शिक्षकों व प्रधानाचार्यों ने कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि अचानक विद्यार्थियों के नंबर मांगने का यही अर्थ निकल रहा है कि यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षाएं निरस्त की जाएंगी। इन नंबरों के अाधार पर ही विद्यार्थियों को प्रमोट कर 11वीं कक्षा में भेजा जाएगा। अगर शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के कयास सही हुए तो जिले में पंजीकृत हाईस्कूल के करीब 50 हजार विद्यार्थी प्रमोट हो जाएंगे। इससे मेधावी विद्यार्थियों में टेंशन भी है कि उनका परिणाम कहीं गड़बड़ न हो जाए। सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है कि अगर किसी विषय में विद्यार्थी को शंका हो कि उसको नंबर कम मिले हैं तो वो उस विषय की कंपार्टमेंट परीक्षा दे सकता है। ऐसे में अब इंतजार बोर्ड के अगले आदेश का किया जा रहा है।

प्रधानाचार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

डीआइओएस डा. धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बोर्ड से हाईस्कूल के विद्यार्थियों के छमाही व प्री-बोर्ड परीक्षाओं के नंबर मांगे गए हैं। अब इसके पीछे क्या मंशा है? इस संबंध में कोई बात स्पष्ट नहीं है। 18 मई की शाम तक सभी प्रधानाचार्यों को नंबर बोर्ड की साइट पर अपलोड करने हैं। इसके आदेश सभी प्रधानाचार्यों को दे दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले प्रधानाचार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके जिम्मेदार प्रधानाचार्य खुद होंगे।