दिल्ली के 79 सरकारी स्कूलों में 93 केंद्रों पर वाक-इन वैक्सीनेशन की सुविधा शुरू

 

दिल्ली में 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए लिए वाक-इन वैक्सीनेशन की सुविधा शुरू।
दिल्ली के 79 सरकारी स्कूलों में 93 केंद्रों पर यह सुविधा शुरू की गई है। इन केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग टीका लगवाने सीधे पहुंच सकते हैं। दिल्ली में करीब 57 लाख लोग इस श्रेणी में आते हैं जिनमें से 22 लाख आनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिये वैक्सीन लगवा चुके हैं।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। आप विधायक आतिशी ने सोमवार को बताया कि दिल्ली में 45 वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी के लोगों के लिए लिए वाक-इन वैक्सीनेशन की सुविधा शुरू की गई है। दिल्ली के 79 सरकारी स्कूलों में 93 केंद्रों पर यह सुविधा शुरू की गई है। इन केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग टीका लगवाने सीधे पहुंच सकते हैं। दिल्ली में करीब 57 लाख लोग इस श्रेणी में आते हैं, जिनमें से 22 लाख आनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिये वैक्सीन लगवा चुके हैं। आतिशी ने बताया कि दिल्ली में 16 मई को 90,832 लोगों को वैक्सीन की डोज लगाई गई हैं। ू

दिल्ली के 45.81 लाख लोगों को हुआ वैक्सीनेशन

आतिशी ने बताया कि दिल्ली में अभी तक 45 लाख 81 हजार 752 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जिनमें से 10 लाख 57 हजार 950 लोगों को दोनों डोज लगाई जा चुकी हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी में अभी तक कुल 44 लाख 94 हजार 250 डोज मिली हैं, जिसमें से सोमवार सुबह तक 42 लाख 690 डोज लगाई जा चुकी हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, फ्रंट लाइन वर्कर और हेल्थ केयर वर्कर के लिए कोविशील्ड का पांच दिन और कोवैक्सीन का एक दिन से भी कम समय का स्टाक बचा है।

उन्होंने बताया कि 18 से 44 वर्ष की श्रेणी के लिए दिल्ली को कुल आठ लाख 17 हजार 690 डोज मिली हैं, जिनमें से पांच लाख 85 हजार छह सौ इस्तेमाल हो चुकी हैं और 2.32 लाख बची हैं। इस श्रेणी में कोविशील्ड का चार दिन के लिए पर्याप्त का स्टाक मौजूद है, हालांकि कोवैक्सीन खत्म हो चुकी है।

20 अप्रैल से मई के शुरुआती कुछ दिनों के बीच कोरोना के मामले ज्यादा आए थे। इस वजह से 30 अप्रैल को सक्रिय मरीजों की संख्या एक लाख के करीब पहुंच गई थी। तब अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए कुल 20,938 बेड आरक्षित थे। जिसमें से 1199 बेड खाली तो थे लेकिन आक्सीजन व आइसीयू बेड की कमी के कारण मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने और घर में ही आक्सीजन सिलेंडर के सपोर्ट पर रहने को मजबूर थे। फिलहाल स्थिति यह है कि तीन मई की तुलना में अस्पतालों में 3400 मरीज कम हुए हैं। वहीं, 6094 बेड बढ़े हैं। जिसमें 4904 एक सप्ताह में बढ़े हैं। इसलिए अस्पतालों में कुल 27,571 बेड उपलब्ध हो गए हैं। जिसमें 10,829 बेड अभी खाली है। इससे आक्सीजन बेड की उपलब्धता बढ़ी है।

यदि कोरोना की संक्रमण दर कम होने का सिलसिला जारी रहा तो अगले कुछ दिनों में अस्पतालों में मरीजों का दबाव और भी कम होगा। ऐसे में अस्पतालों व अस्थायी कोविड अस्पतालों में बेड बढ़ने से कोरोना की तीसरी लहर आने पर भी मरीजों के इलाज में फायदा होगा।730 आइसीयू बेड खालीअस्पतालों में अभी 730 आइसीयू बेड भी खाली है। जिसमें से 427 आइसीयू बेड अस्थायी रूप से बने कोविड अस्पतालों में खाली है। इससे जरूरतमंद मरीजों के लिए आइसीयू बेड की उपलब्धता बढ़ी है। हालांकि, 110 अस्पतालों के आइसीयू में अब भी बेड खाली नहीं है, जिसमें ज्यादातर निजी बड़े अस्पताल शामिल है। इस वजह से निजी अस्पतालों में आइसीयू बेड की कमी बरकरार है।