दिल्ली-एनसीआर के पहलवानों का अपराध से है पुराना नाता, नीतीश कटारा में भी थी सुखदेव पहलवान की भूमिका


दिल्ली-एनसीआर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं जिनमें नामी गिरामी पहलवानों का नाम सामने आता रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं जिनमें नामी गिरामी पहलवानों का नाम सामने आता रहा है। और तो और हरियाणा के रोहतक में तो एक पहलवान को इतना गुस्सा आया था कि उसने एक साथ पांच लोगों की हत्याएं कर दी थीं।

नई दिल्ली,  ये पहला मौका नहीं है जब किसी ख्याति प्राप्त पहलवान का नाम हत्या जैसे संगीन मामले में सामने आया हो, दिल्ली-एनसीआर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं जिनमें नामी गिरामी पहलवानों का नाम सामने आता रहा है। यदि प्रत्यक्ष रूप से इनका नाम सामने नहीं आया तो ये कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल जरूर रहे। और तो और हरियाणा के रोहतक में तो एक पहलवान को इतना गुस्सा आया था कि उसने एक साथ पांच लोगों की हत्याएं कर दी थीं। उसके अगले दिन वो सुर्खियों में था।

सुशील से पहले सुखदेव पहलवान का नाम कई महीनों तक चर्चा में था। आप लोग शायद भूल गए होंगे कि सुखदेव पहलवान का नाम किस वजह से चर्चा में था। हम आपको बताते हैं ये सुखदेव पहलवान वही शख्स था जिसने डीपी यादव के बेटों के साथ मिलकर नीतीश कटारा की हत्या कर दी थी, उसके बाद उसके शव को ठिकाने लगा दिया था। आज सुखदेव पहलवान विकास और विशाल के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।


दरअसल सुखदेव कुशीनगर का रहने वाला था, उसका भी सपना एक मशहूर पहलवान बनने का था, वो उसके लिए मेहनत भी करता था मगर पता नहीं कब और किन परिस्थितियों की वजह से वो डीपी यादव के संपर्क में आया और यहीं से उसकी दिशा बदल गई। जानकार बताते हैं कि कुशीनगर में सुखदेव की छवि एकदम साफ सुथरी थी, इलाके में उसकी एक अलग ही इमेज थी वो पहलवान तो था मगर किसी को परेशान नहीं करता था।

मगर संगत बदलने के साथ ही उसका भी दिलोदिमाग बदल गया। अपने ऊपर एक बाहुबलि का हाथ होने और उसके साथ रहने वाले चंद लोगों की संगत मिलने की वजह से वो भी बदल गया और अपराध की दुनिया में उतर गया। एक समय ऐसा आया कि डीपी यादव के नाम पर किसी को भी धमकाने और मारने के लिए सुखदेव पहलवान का इस्तेमाल किया जाने लगा। सुखदेव पहलवान लोगों के साथ भैया डीपी यादव के लिए गैरकानूनी कामों का राजदार बन गया। नीतीश कटारा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने उसे बीस साल की सजा सुनाई है, फिलहाल सुखदेव जेल में ही बंद हैं।


ऐसा नहीं है कि दिल्ली में पहलवानों का गैंगस्टरों से नाता नहीं रहा है। इसकी शुरूआत भी आज नहीं बल्कि दो दशक पहले ही हो गई थी। दिल्ली में रहने वाले पुराने पहलवान जानते हैं कि लगभग 25 साल पहले ढिचाऊं और मितराऊं गांव में कृष्ण पहलवान ने इसकी शुरूआत की थी। ये सिलसिला जो शुरू हुआ वो आज तक थमा नहीं है। कृष्ण पहलवान ने साल 1992 में अपने ही एक रिश्तेदार की हत्या करके इसकी शुरूआत कर दी थी।

इस गैंगवार को जानने वाले बताते हैं कि इसमें अब तक दोनों गांवों के 200 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और अभी किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है। कई परिवारों में तो अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं ही बची है। पुरूष को खत्म ही हो गए हैं। इस गैंगवार के पीछे एक छोटा सा प्लाट था जो अभी भी वैसे ही पड़ा हुआ है मगर प्लाट को अपना बताने के पीछे इन दोनों गांवों के सैकड़ों लोग अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं। ये वर्चस्व की लड़ाई अभी भी जारी है। कृष्ण पहलवान ढिचाऊं कला गांव का रहने वाला था जबकि अनूप बलराज मितराऊं गांव का रहने वाला था। इन दोनों गांवों में आज भी बाकी बचे लोगों में उसी तरह से खूनी रंजिश है। दिल्ली पुलिस ने कई परिवारों को सुरक्षा मुहैया करा रखी है, उस परिवार में उतने लोग नहीं है जितने पुलिसकर्मी यहां तैनात दिखते हैं।


उधर दिल्ली के पड़ोसी जनपद हरियाणा में भी पहलवानों के कारनामे सामने आते रहे हैं। इसी साल 14 फरवरी को हरियाणा के रोहतक में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया था। यहां अखाड़े के विवाद को लेकर छोटूराम स्टेडियम में एक रेसलर ने पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रेसलिंग कोच सुखविंदर ने स्टेडियम के अखाड़े में घुसकर फायरिंग की थी।

कुछ साल पहले हरियाणा में एक सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, इस हत्याकांड में भी पहलवान नवीन दलाल का नाम सामने आया था। इसी पहलवान नवीन दलालन ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर उमर खालिद पर 2 फायर भी किए थे। इसी तरह हरियाणा के पहलवान राकेश मलिक पर कत्ल का इल्जाम है। और तो और रेसलिंग फेडरेशन के मुखिया ब्रजभूषण शरण सिंह के ऊपर भी कई तरह के संगीन आरोप है, कई थानों में उनके खिलाफ भी शिकायती लेटर पहुंचे मगर सब दबे हुए हैं।