मास्क हटाया तो चलती कार में ही कट जाएगा चालान, यकीन नहीं आ रहा तो पढ़ें- यह स्टोरी

 

मास्क हटाया तो चलती कार में ही कट जाएगा चालान, यकीन नहीं आ रहा तो पढ़ें- यह स्टोरी

एक विशेष सॉफ्टवेयर से जुड़े सीसीटीवी कैमरों के जरिये ऐसे लोगों पर नजर रखी जाएगी जो चलती कार में मास्क हटाएंगे। ऐसे वाहन को बगैर रोके वाहन चालान कट जाएगा। इस तकनीक का नोएडा में ट्रायल चल रहा है।

नोएडा । अब कार चलाते वक्त मास्क हटाना और फिर बच जाना भी आसान नहीं होगा। एक विशेष सॉफ्टवेयर से जुड़े सीसीटीवी कैमरों के जरिये ऐसे लोगों पर नजर रखी जाएगी और वाहन को बगैर रोके चालान कट जाएगा। इस तकनीक का नोएडा में ट्रायल चल रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क सबसे अनिवार्य और मजबूत हथियार है। बार-बार की चेतावनी के बावजूद लोग इसके प्रति लापरवाह पड़ गए, जिसका दुष्परिणाम सामने है। मगर, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। अगर कार चलाते वक्त किसी ने मास्क हटाने की चालाकी की तो एक विशेष साफ्टवेयर से जुड़े सीसीटीवी कैमरे उसे पकड़ लेंगे और कार को रोके बगैर चालान हो जाएगा। जैसे ट्रैफिक नियम तोड़ने पर होता है, उसी तरह है। नोएडा में एक कंपनी तीन स्थानों पर प्रशिक्षण कर रही है। इन तीन स्थानों पर फिलहाल 19 कैमरों के जरिये नजर रखी जा रही है।

वीहांत टेक्नोलाजी के एक विशेष सॉफ्टवेयर से जुड़े इन कैमरों को सड़क की एक लेन पर फोकस किया गया है। इन कैमरों के सामने से अगर कोई कार 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी निकलती है तो वाहन चलाने वाले और उसके साथ बैठे व्यक्ति के चेहरे और कार की नंबर प्लेट का फोटो साफ-साफ खींचा जा सकता है। साफ्टवेयर की संवेदनशीलता इतनी है कि अगर आप कार चलाते हुए अपने मुंह पर हाथ भी रखते हैं, जिससे ऐसा लगे कि फोन पर बात कर रहे हैं, तो भी कैमरे फोटो खींच लेंगे। हालांकि कंट्रोल रूम उस फोटो से पता करेगा कि चालक फोन पर बात कर रहा है या फिर उसने हाथ को मुंह या गाल पर रख रखा था। साथ ही मास्क न लगाए हुए या फिर चेहरे पर गलत तरीके से मास्क लगाने वाले व्यक्ति का भी फोटो कैमरे खींचकर कंट्रोल रूम को भेज देंगे। इससे कंट्रोल रूम से संबंधित कार चालक का चालान किया जा सकेगा। 

दोपहिया वाहन पर तीन सवारी का भी होगा कैमरों से चालान

इसी सॉफ्टवेयर में एक नया फीचर और जोड़ा गया है। कैमरे के सामने से अगर किसी भी दोपहिया वाहन पर दो से अधिक सवारी या बिना हेलमेट के चालक और चालक के पीछे बैठने वाला व्यक्ति गुजरता है, तो उसका भी फोटो दोपहिया वाहन के नंबर के साथ खिंचेगा और यातायात नियमों के उल्लंघन में उनका चालान किया जा सकेगा।

यह है विशेषता

  •  सॉफ्टवेयर से जुड़े कैमरे दो मेगापिक्सेल के होते हैैं और ईथरनेट आइपी-आधारित उच्च-रिजोल्यूशन कैमरों पर पावर होना चाहिए।
  •  60 डिग्री की एक संकीर्ण सीमा होनी चाहिए क्योंकि इसे केवल एक लेन पर चलने वाले वाहनों का ट्रैक रखना है।
  •  कार की गति का पता लगाने के लिए सटीक फ्रेम वाले कैमरों का उपयोग किया जाता है।
  •  इस कार्य में मौसम सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए पोल या कैंटिलीवर या गैंट्री पर सभी बाहरी उपकरण आइपी 66 रेटेड हैं, जिससे कैमरे बारिश और धूल से सुरक्षित रहते हैं। इन उपकरण की तापमान रेटिंग माइनस 5 डिग्री से 55 डिग्री तक है, जो इसे सभी मौसम की स्थिति में उपयुक्त बनाती है।

 कपिल बरडेजा (सीईओ, वीहांत टेक्नोलाजी) का कहना है कि अभी नोएडा में इस सॉफ्टवेयर का ट्रायल चल रहा है, जो पूरा होने के बाद इसे पुलिस को प्रयोग के लिए दिया जाएगा। अभी तक जो फोटो कंट्रोल रूम को मिल रहे हैं, वही कंपनी को भी मिल रहे हैं। इनका आकलन करके सॉफ्टवेयर को और अधिक सटीक बनाया रहा है।

यहां किया जा रहा ट्रायल

नोएडा स्टेडियम

  • यहां लगे हैं छह कैमरे
  •  रेड लाइट स्पाइस माल से सेक्टर 10 की ओर
  •  सेक्टर-10 की तरफ से स्पाइस माल की ओर 

सेक्टर 25-31 चौराहा

  • यहां लगे हैं नौ कैमरे
  • सेक्टर 18 से सेक्टर 62 की ओर
  • स्पाइस माल से सिटी सेंटर की तरफ
  • सिटी सेंटर से स्पाइस माल की तरफ

सेक्टर 25-31 चौराहे पर ओवरब्रिज

  • यहां लगे हैं चार कैमरे
  •  सेक्टर 18 की ओर
  •  सेक्टर 62 की ओर